दरभंगा, देशज टाइम्स। संस्कृत विश्वविद्यालय के अधीन स्ववित्त पोषित योजना के तहत संचालित शिक्षा शास्त्र विभाग के परिनियमों व पाठ्यक्रमो में परिमार्जन,संशोधन व परिशोधन के लिए आयोजित त्रिदिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन करने के बाद कुलपति प्रो. सर्व नारायण झा ने कहा कि शिक्षा शास्त्री में नामांकित छात्र सिर्फ छात्र नहीं बल्कि छात्र शिक्षक हैं और उन्हें अनुशासित रहना बहुत जरूरी है। जो संस्कार व संस्कृति वे आज शिक्षा शास्त्र विभाग में सीखेंगे वही कल होकर वे बच्चों को भी प्रदान करेंगे। उन्होंने कक्षाओं में सभी छात्र शिक्षकों की उपस्थिति को जरूरी बताते हुए कहा कि अगर लगातार दस दिनों तक कोई छात्र शिक्षक अनुपस्थित होते हैं तो यह सूचना उनके अभिभावकों को भेजी जाएगी। वीसी ने आवश्यकता के हिसाब से पाठ्यक्रमों में संशोधन को कई उदाहरणों के जरिये आवश्यक बताया। उन्होंने खुलासा किया कि शिक्षा शास्त्र विभाग के सभी कर्मियों की सेवा नियमितीकरण के लिए उन्होंने सरकार को प्रस्ताव भेजा है। यह जानकारी देते हुए पीआरओ निशिकांत ने बताया कि डॉ. नंदकिशोर चौधरी के संचालन में शुरू हुई कार्यशाला 17 फरवरी तक चलेगा। मौके पर प्रोवीसी प्रो. चन्द्रेश्वर प्रसाद सिंह ने चरित्र निर्माण पर जोर देते हुए कहा कि युग व समय के हिसाब से सभी पाठ्यक्रमों में बदलाव जरूरी है। उन्होंने सुझाया कि किस विषयों को पढ़ायें से बेहतर है कि उन विषयों को कैसे व किस तरह पढ़ायें, इस पर मंथन होना चाहिए।प्रोवीसी ने कहा कि शिक्षा शास्त्र विभाग छात्र नहीं शिक्षक तैयार कर रहा है। उन्होंने इस कार्यशाला के आयोजन के लिए कुलपति को भी धन्यवाद दिया। इसके पूर्व विभाग की शिक्षिका डॉ. रीता सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया और विषय वस्तु के साथ साथ वर्तमानपाठ्यक्रमों को भी विस्तार से रखा।
वहीं विशेषज्ञ के रूप में शिरकत कर रहे सिंडिकेट सदस्य प्रो. विनय कुमार चौधरी ने कार्यक्रम के अवसर पर छात्र शिक्षकों की कमजोर उपस्थिति पर चिंता जाहिर की और नई नियमावली में इस ओर भी ध्यान देने को जरूरी बताया। पाठ्यक्रमों में सतत बदलाव की उन्होंने भी वकालत की। बदलते जमाने के परिदृश्य में हर संशोधन को उन्होंने सापेक्ष्य कहा। इसी तरह विषय विशेषज्ञ के रूप में आये एनसीटीई के पूर्व सदस्य व एससीआरटी के पर्व निदेशकप्रो. एएस मोईन ने कहा कि अगर पाठ्यक्रम उत्साहबर्धक होंगे और कैम्पस की गतिविधियां भी सकारात्मक होंगी तो छात्रों की उपस्थिति हर हाल में बढ़ेगी। अपने अनुभवों के आलोक में उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक से कोर्स में परिमार्जन होगा और उसमें छात्रों की भूमिका भी रहेगी। जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान ,लखनऊ परिसर के प्रो. लोकमान्य मिश्र व प्रो. एल एन पांडे के अलावा जम्मू परिसर के प्रो. मदन मोहन झा भी विषय विशेषज्ञ के रूप में कार्यशाला में मौजूद थे। उद्घाटन सत्र के बाद शैक्षणिक सत्र में सभी विशेषज्ञों ने विषय वस्तु पर विचार विमर्श किया। उधर शिक्षा शास्त्र के निदेशक डॉ. घनश्याम मिश्र ने आगत अतिथियों का पाग व चादर से सम्मानित किया। उनके अनुसार, एनसीटीई के 2014 के रेगुलेशन के मुताबिक मौजूद पाठ्यक्रम संचालित हो रहा है।समय के हिसाब से इसमें संशोधन अपेक्षित है।








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