दरभंगा, देशज टाइम्स। लनामिवि विश्वविद्यालय संगीत व नाट्य विभाग व संगीत संकल्प के बैनर तले गुरुवार को शास्त्रीय संगीत समारोह का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ आगत अतिथियों के दीप प्रज्वलन से हुआ। इस कार्यक्रम में मुंबई से पहुंची बतौर मुख्य गायिका अनीता गोस्वामी ने अपने गायन से मंत्रमुग्ध कर दिया। तबला पर संगति कर रहे थे शिव नारायण महतो व कौशिक कुमार मल्लिक, हारमोनियम पर संगीत कुमार मल्लिक व तानपूरा पर पूजा कुमारी। विभागाध्यक्ष प्रो.लावण्य कीर्ति सिंह काव्या ने आगत अतिथियों को परंपरागत तरीके से पाग, चादर व पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया। वहीं, संगीत संकल्प के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
विदुषी अनिता गोस्वामी ने अपने गायन का आरंभ राग वृंदावनी सारंग में एकताल विलंबित, मध्यलय व द्रुत ख्याल से किया। विलंबित के बोल थे, सगुन विचारो रे, मध्यलय के बोल थे, रटाकर रसना राम नाम को व द्रुत के बोल थे, ना बोलो श्याम। इसके बाद राग काफी में बोल बनाव ठुमरी सैंया गए परदेश की सुंदर रचना प्रस्तुति की। राग बसंत में मध्यलय फगवा बृज देखन को चलो री ,तत्पश्चात अवध में
बाजेला बधाइया हो रामा” का गायन किया। गायन का समापन तुलसीदास कृत भजन कोउ उदार जग माहि ऐसो की भक्तिपूर्ण प्रस्तुति की। सुर सिंगार संसद, मुंबई की ओर से ‘सुरमणि’ से सम्मानित व रेणुका सेन,पं.अमिय घोष,उस्ताद इकबाल अहमद खान व ‘पद्मभूषण ‘ छन्नूलाल मिश्र की शिष्या विदुषी अनिता की परिपक्व गायन शैली में सुरों का सुंदर संयोजन, तीनों सप्तकों में स्वच्छंद विचरण,
छोटी – छोटी मुर्कियों का सुंदर प्रयोग, राग के साथ ही साथ ठुमरी में भी मोहक स्वर लगाव की सुंदर अभिव्यक्ति थी। अनिता गोस्वामी आकाशवाणी की ए ग्रेड व आइसीसीआर की निबंधित कलाकार हैं। इन्होंने देश ही नहीं विदेशों में भी अपना कार्यक्रम प्रस्तुत किया है। कार्यक्रम में विभागीय शिक्षकों, शिक्षकेतर कर्मचारियों, छात्र-छात्राओं के अतिरिक्त शहर के अनेक संगीतज्ञ व संगीत प्रेमी उपस्थित थे। अंत में, धन्यवाद ज्ञापन पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. पुष्पम नारायण ने किया।








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