Bihar Electric Bus: अब बिहार के शहरों की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसें दौड़ेंगी और डीजल बसों को धीरे-धीरे हटाया जाएगा। इस योजना की शुरुआत राजधानी पटना के साथ मुजफ्फरपुर और गयाजी से की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में बसों से होने वाले धुएं को कम करके नागरिकों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराना है।
सरकार के इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत, सबसे पहले पटना, मुजफ्फरपुर और गयाजी में चलने वाली डीजल सिटी बसों को पूरी तरह से हटाया जाएगा। इनकी जगह पर्यावरण के अनुकूल इलेक्ट्रिक बसें सड़क पर उतरेंगी, जिससे सार्वजनिक परिवहन सेवा में इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों की हिस्सेदारी बढ़ेगी।
25 अगस्त को मिलेगी 75 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी
परिवहन विभाग ने जानकारी दी है कि 25 अगस्त को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 75 पीएम इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इन बसों में से 50 बसें पटना के लिए होंगी, जबकि मुजफ्फरपुर और गयाजी को 25-25 बसें मिलेंगी। दिसंबर तक इन तीनों शहरों में इन Bihar Electric Bus का संचालन शुरू हो जाएगा। इसके बाद मार्च 2027 तक इन शहरों में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या को लगभग दोगुना करने की तैयारी है।
फिलहाल, पटना में 25 पीएम इलेक्ट्रिक बसें पहुंच चुकी हैं और उन्हें बस बेड़े में शामिल करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। 25 अगस्त के बाद इन बसों को निर्धारित रूटों पर उतारा जाएगा। भविष्य में पटना में कुल 150 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना है, जिससे शहर की सिटी बस सेवा में डीजल बसों पर निर्भरता काफी कम होगी।
सिर्फ तीन शहर नहीं, पूरे बिहार में होगा विस्तार
इलेक्ट्रिक बसों की यह योजना केवल पटना, मुजफ्फरपुर और गयाजी तक ही सीमित नहीं रहेगी। राज्य के अन्य शहरों में भी इसका विस्तार किया जाएगा। केंद्र सरकार ने मार्च 2027 तक बिहार के छह जिलों के लिए 400 इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। इसके लिए पहले चरण की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं।
इस योजना के लागू होने के बाद बिहार के कई शहरों में सार्वजनिक परिवहन का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। सरकार का पूरा ध्यान अब ऐसी बसों पर है, जिनसे प्रदूषण कम हो और शहरों में यात्रा भी बेहतर और आरामदायक हो।
बढ़ते प्रदूषण से मिली सीख
गौरतलब है कि पिछली ठंड के मौसम में पटना, मुजफ्फरपुर और गयाजी में वायु प्रदूषण की स्थिति बेहद खराब हो गई थी। दिसंबर में इन तीनों शहरों का एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 के पार पहुंच गया था। इस गंभीर स्थिति के बाद ही इन शहरों में प्रदूषण कम करने के लिए डीजल बसों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई, जिसे अब चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का मानना है कि शहरों में बड़ी संख्या में चलने वाली डीजल बसों से निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण का एक बड़ा कारण है। इसलिए सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों को अधिक बढ़ावा देने की तैयारी है।







