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Bihar Politics | पूनः मूषक भवः यही है बिहार पॉलिटिक्स का बैजबॉल….Nitishball…

आपका फिर से जाना और मुस्कुराना गजब ढ़ा गया। इस मुस्कुराहट में समाजवाद के कितने दांत बाहर दिख रहे। समाजवादी होने की कितनी गर्मी अभी भी शेष है। अर्नगल प्रलाप। अंजाम क्या होगा। जब भाव न जागा भावों में, उस भावों का कोई भाव नहीं। तेरा अंत होगा और...शुरूआत यही है। जहां, चाल-चरित्र-निर्माण-राह-सम्मान-सजगता-दूरगामी सोच-संदर्भ-मायने-सब अचंभित। ताश के 52 पत्ते और सबके सब हरजाई। चलिए यहीं, इस हरजाई वाली बिहारी पॉलिटिक्स के दल-दल-दल बदल में आपको छोड़ जाते हैं...

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Bihar Politics | पूनः मूषक भवः | यही है बिहार पॉलिटिक्स का बैज बॉल…| नीतीशबॉल…| हैदराबाद का आरजीआइ स्टेडियम। भारत बनाम इंग्लैंड पहला टेस्ट। इंग्लैंड दोनों पारी खेल चुका है। अब भारत लक्ष्य साधने मैदान में उतर चुका है।

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इधर, बिहार की वर्तमान तेजस्वी-नीतीश सरकार फ्लॉप हो चुका है। इस सरकार की पोस्टर फट चुकी है। नीतीश फिर इस फटे पोस्टर से बतौर नायक बाहर निकलें हैं। फिर से आज, शाम 5 बजे, बीजेपी के साथ बिहार में सरकार बनाएंगें। यह नीतीश का डिकोड भले माना जा रहा है। जहां, 2022 में छोड़ने और 2024 में लौटना, सामने है। मगर इसके फलसफा कईं हैं। उन रास्तों पर आगामी चलना, प्रॉक्सी पॉलिटिक्स को फिर से झेल पाना शायद उतना ही मुश्किल, दोराहे पर जहां शर्तों से असहज होना अमूमन पूर्ववत। यानि,पूनः मूषक भवः।

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Bihar Politics | इस तोड़ की जरूरत क्या थी!

मगर, यही अगर, यही है बिहार पॉलिटिक्स का बैजबॉल और बीजेपी को लगता है कि नीतीशबॉल से वर्ष 2024 में 24 का फतह कर लेंगे। तो जरा रूकिए। कारण, मैच अभी खत्म नहीं हुआ है। यह उस लक्ष्य की शुरूआत भर जहां लालू प्रसाद बीच में खड़े हैं।

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Bihar Politics | इतना आसान नहीं होता। सरकार को तोड़ना। उसे जोड़ना और फिर पटरी पर लाना

इतना आसान नहीं होता। सरकार को तोड़ना। उसे जोड़ना और फिर पटरी पर लाना। उसे चलाना। यह सिस्टम है। इसमें पूरे पांच साल लगते हैं। लेकिन, यह कहना, गठबंधन सरकार में विकास के कार्य नहीं हुए। तो पचता कम है। कारण है। नीतीश कुमार ने अपने इतने लंबे-चौबे शासन काल में इतने लोगों को रोजगार से नहीं जोड़ा जितना पिछले कुछ दिनों में फेहरिस्त इतनी लंबी-चौबी वाली खाई बन गई। इसे पाटना, इस नए गठबंधन के लिए बड़ा टास्क होगा।

Bihar Politics | कहीं दाग ना लग जाए…प्यार किया तो करके निभाना…कहीं आग ना लग जाए

मंदिर। कमंडल। मंडल। यह सब अपनी जगह है। रोजी-रोटी-रोजगार अपनी जगह। निसंदेह, तेजस्वी का चेहरा चमका है। इन दिनों तेजस्वी की भूमिका को लोग सराह जरूर रहे हैं। ऐसे में, दांव कहीं उल्टा ना पड़े। दूसरी बात, बीजेपी के जो लोग आज के दिन को ऐतिहासिक बता रहे हैं।

Bihar Politics | हमसे ना पूछो पगड़ी के किस्से

वही कल तलक पगड़ी इस वजह से बांधे घूम रहे थे कि नीतीश को गद़दी से उतारेंगे तभी पगड़ी खोलेंगे। बेशक, यह राजनीति है। इसके कोई मायने नहीं है। इसे अनिश्चितता कहने वाले वही लोग हैं जो पहले दरवाजा बंद करते हैं फिर खिड़की से झांकते हैं। दरवाजा खोलते हैं। मेहमान को अंदर सिर पर बैठा लेते हैं।

Bihar Politics | क्या जनता पागल हो गई है….ना…

क्या जनता इतनी बेवफूक है। क्या जनता सचमुच ऐसे पात्रों के आगे नतमस्तक है। वह पगला गई है। ऐसा नहीं है। जनता समझदार है। वह समझदारी से फैसला करती है। यह 28 जनवरी का दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जीवन का सबसे आत्मघाती ना साबित हो जाए। यह भी देखना होगा। कारण, तेजस्वी ने पहले ही कह दिया था, नीतीश से कोई गिला-शिकवा नहीं है। वो जो करें। मतलब, मायने अंदर है। और, वर्तमान खाने में है।

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Bihar Politics | हजम कितना होगा, पचा कितना पाएंगें…ये हाजमोला भी काम शायद ही आए

कारण है, बीजेपी के जितने भी नेता हैं, कुर्सी के लिए, सत्ता के लिए भले अभी साथ हों, या दिख रहे हों, लेकिन अंदरखाने इनकी नीयत साफ नहीं दिखती। फिर से एक बड़ा खेला बिहार में होना निश्चित है।

Bihar Politics | शुचिता के नाम पर शून्य बट्‌टा सन्नाटा

भले, कुछ ही समय पहले नीतीश ने राज्यपाल अर्लेकर को अपना इस्तीफा भी सौंप दिया है, जिसके बाद पत्रकारों से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि हमने अलायन्स बनाया था, काम करने के लिए। लेकिन अलायन्स बनाने के बाद कोई काम नहीं हो रहा था। ऐसा नहीं, काम बिहार में या देश में क्या हो रहा है। मायने यह नहीं रखता। मायने, उस राजनीतिक शुचिता के भी होने चाहिए। जिसे, बीजेपी और जदयू दोनों ने खो दिया है।

Bihar Politics | पर्दे के पीछे जो पर्दा नशीं है,फिर से तो फरमाना। तुम भी जरूर आना…

पलकों के पीछे से क्या तुमने कह डाला फिर से तो फरमाना। नैनो ने सपनों की महफ़िल सजाई है तुम भी ज़रूर आना। तो क्या इसी पलकों वाली पर्दे के पीछे हैं पीके यानि प्रशांत किशोर। कई बार की रट। महागठबंधन में रहते  नीतीश कुमार की पार्टी लोकसभा चुनाव में 5 सीटें भी नहीं ला पाएंगीं। क्या यही वो कार्यकर्ता हैं या पार्टी के लोग हैं जिनकी बात आज सार्वजनिक तौर पर नीतीश ने गठबंधन तोड़ने और राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने के बाद कही कि यह पार्टी के लोगों का मन था। यानि, पीके कहीं अब भी तो नहीं नीतीश के लिए काम कर रहे अंदरखाने। या फिर बाहरी और फौरी तौर पर प्रशांत किशोर की सलाह पर नीतीश कुमार ने अमल कर लिया। उसे आत्मसात करते मान लिया है। क्या पीके भी इसी का हिस्सा बनेंगे। भविष्य की राजनीति में वर्तमान यही था,पार्टी में नंबर 2 की पोजीशन और बाद में पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाना। मगर, दिल है कि मानता नहीं…

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Bihar Politics | बिहार के हर लोग कटघरे में हैं। एक हास्य पात्र।

इस स्तर की राजनीति से बिहार या देश का भला होने वाला है, ऐसा हरगिज नहीं माना जा सकता। खैर, जदयू कोटे से मंत्री संजय झा और निमंत्रण पत्र। समर्थन पत्र। शाम में शपथ ग्रहण। सबकुछ होगा। सीएम नीतीश कुमार ही होंगे। यह भी तय है। मगर, बिहार का कितना भला होगा, हो सकता है, विशेष राज्य का दर्जा भी मिल जाए। लेकिन, उस राजनीतिक दर्जे का क्या…जहां बिहार के हर लोग कटघरे में हैं। एक हास्य पात्र।

Bihar Politics | जब भाव न जागा भावों में, उस भावों का कोई भाव नहीं…तेरा अंत होगा…

चलिए। आपको छोड़ जाते हैं। तेजप्रताप यादव अपनी भावों के साथ X पर हैं…

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