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मार्च, 15, 2026
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Darbhanga News:आइडियल पब्लिक स्कूल में छात्रों का दिखा Waste Management का नायाब तरीका, स्कूली बच्चों ने सिखाया कचरा प्रबंधन का ककहरा, बदल जाएगी शहर की सूरत!

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Waste Management: स्वच्छता की पहली सीढ़ी सिर्फ घर की देहरी नहीं, बल्कि हमारे विवेक का वो दरवाजा है जहां कचरे को संसाधन समझने की समझ पैदा होती है।

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Waste Management को लेकर अलीनगर में कुछ ऐसा ही कर दिखाया गया है, जहां बच्चों ने बड़ों को आईना दिखाया। दरभंगा जिले के अलीनगर स्थित आइडियल पब्लिक स्कूल, पकड़ी में गुरुवार को कचरा प्रबंधन पर एक अनूठा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान छात्रों ने कचरा पृथक्करण का व्यावहारिक पाठ सिखाकर सभी को चकित कर दिया।

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Waste Management पर बच्चों की अनोखी पाठशाला

कार्यक्रम में छात्रों ने रंग-बिरंगे कूड़ेदानों के मॉडल का उपयोग कर कचरे के सही विभाजन की प्रक्रिया को बेहद सरल ढंग से प्रस्तुत किया। छात्र रौनक कुमार सदा ने हरे कूड़ेदान का महत्व बताते हुए समझाया कि इसमें रसोई से निकलने वाला गीला कचरा, जैसे भोजन के अवशेष और सब्जियों के छिलके डाले जाने चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वहीं, आयुष कुमार ने लाल कूड़ेदान के जरिए जैव-चिकित्सीय और हानिकारक कचरे को अलग रखने की जरूरत पर बल दिया। इसके बाद प्रीतम कुमार झा ने नीले कूड़ेदान का प्रदर्शन करते हुए इसमें कागज, प्लास्टिक और बोतल जैसा सूखा कचरा डालने की प्रक्रिया समझाई।

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बच्चों ने अपने शानदार प्रस्तुतीकरण से यह स्पष्ट संदेश दिया कि यदि हर परिवार अपने स्तर पर ही कचरे को इन श्रेणियों में बांटना शुरू कर दे, तो स्वच्छता अभियान और पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को अभूतपूर्व मजबूती मिल सकती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस पहल को देखकर वहां मौजूद अभिभावक और अन्य छात्र-छात्राएं भी बेहद प्रभावित हुए।

सामाजिक बदलाव का केंद्र बना विद्यालय

इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक अरुण सिंह ने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं होता, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन का एक शक्तिशाली माध्यम भी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के समय में बच्चों के मन में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता का बीज बोना सबसे बड़ी आवश्यकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय परिवार के सभी सदस्यों और छात्रों ने मिलकर स्वच्छता बनाए रखने और हरित सोच को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन मिलने पर बच्चे समाज में बड़े बदलावों के वाहक बन सकते हैं।

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