Bihar AI Workshop: सोमवार, को ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (दरभंगा) में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग और अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ ने मिलकर ‘रिसर्च विद एआई : फ्रॉम आइडियाज टू इनोवेशन’ शीर्षक से पाँच दिवसीय हस्त-प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया। यह Bihar AI Workshop 14 से 18 सितंबर तक चलेगी, जिसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को अनुसंधान, शिक्षण तथा नवाचार के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रभावी, नैतिक और व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराना है।
कार्यशाला के उद्घाटन से पहले, कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी ने रसायन विज्ञान विभाग में कई नई सुविधाओं का लोकार्पण किया। इनमें प्रो डॉ नीलाम्बर चौधरी अध्यक्ष कक्ष, एक सम्मेलन कक्ष और नवीनीकृत रसायन विज्ञान विभाग शामिल हैं। इन सुविधाओं को शैक्षणिक, शोध और अकादमिक गतिविधियों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
AI से शोध प्रक्रिया होगी और भी प्रभावी
कार्यशाला के उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी ने की। इस अवसर पर महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, सतना के पूर्व कुलपति प्रो एन. सी. गौतम मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे, जबकि बिहार के राज्यपाल के सलाहकार (संकाय उत्कृष्टता एवं शैक्षणिक विकास) प्रो बिनोद कुमार त्रिपाठी विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल हुए। अतिथियों का पाग, चादर और स्मृति-चिह्न देकर स्वागत किया गया। दीप प्रज्वलन के बाद राष्ट्र-गीत, राष्ट्रगान और एलएनएमयू कुलगीत प्रस्तुत किए गए।
विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता और रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो दिलीप कुमार चौधरी ने अपने स्वागत संबोधन में आधुनिक तकनीक के साथ गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यशाला के संयोजक डॉ अभिषेक राय और डॉ अनिन्द्र शर्मा ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शोध की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, व्यवस्थित और नवाचारपरक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसका उपयोग शोध-विषय एवं शोध-प्रश्नों के विकास, साहित्य समीक्षा, आंकड़ों के विश्लेषण, वैज्ञानिक लेखन और नवाचार सहित अनुसंधान के विभिन्न चरणों में किया जा सकता है। उन्होंने AI के उपयोग में दक्षता, नैतिकता, बुद्धिमत्ता और जिम्मेदारी बनाए रखने पर विशेष बल दिया।
भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का संगम
विशिष्ट अतिथि प्रो बिनोद कुमार त्रिपाठी ने भारतीय गुरुकुल परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि प्राचीन शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि कौशल विकास, व्यावहारिक ज्ञान, चरित्र निर्माण और समग्र व्यक्तित्व विकास था। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में आधुनिक तकनीक व पारंपरिक ज्ञान के समन्वय की अनिवार्यता पर प्रकाश डाला।
‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग दक्षता, नैतिकता, बुद्धिमत्ता एवं जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए तथा तकनीक मानव की सृजनात्मकता और विवेक को मजबूत करने का माध्यम बने।’ – प्रो बिनोद कुमार त्रिपाठी
मुख्य अतिथि प्रो एन. सी. गौतम ने अनुसंधान में मौलिक चिंतन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, गुणवत्ता और नवाचार के महत्व को रेखांकित किया।
‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता शोधकर्ताओं के लिए प्रभावी सहायक उपकरण है, लेकिन इसके माध्यम से प्राप्त जानकारी का सत्यापन, आलोचनात्मक मूल्यांकन तथा अकादमिक ईमानदारी बनाए रखना आवश्यक है।’ – प्रो एन. सी. गौतम
कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी ने कार्यशाला के समसामयिक विषय-वस्तु के लिए आयोजकों को बधाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में सही दृष्टिकोण, वैचारिक चिंतन, नैतिक मूल्यों और कौशल विकास की क्षमता विकसित करना है।
‘शिक्षा विद्यार्थियों को सोचने, समझने, प्रश्न करने, समस्याओं का समाधान खोजने तथा अपने ज्ञान को व्यवहार में लागू करने योग्य बनाए, तभी उसका वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा।’ – प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के मूल उद्देश्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि नई शिक्षा नीति रटने और परीक्षा-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर समग्र विकास, वैचारिक समझ, आलोचनात्मक चिंतन, अनुभवात्मक अधिगम और कौशल विकास पर केंद्रित है। उन्होंने भारतीय ज्ञान प्रणालियों, विशेषकर प्राचीन भारतीय शल्य चिकित्सा परंपरा का उदाहरण देते हुए कहा कि आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता को भारतीय ज्ञान परंपरा की वैचारिक गहराई, मानवीय मूल्यों और नैतिक दृष्टिकोण के साथ जोड़कर शिक्षा एवं अनुसंधान को नई दिशा दी जा सकती है।
AI के नैतिक और जिम्मेदार उपयोग पर जोर
कुलपति ने जोर देकर कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबंधित ऐसी हस्त-प्रशिक्षण कार्यशालाएँ अत्यंत आवश्यक हैं, ताकि शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी केवल तकनीक का उपयोग करना ही न सीखें, बल्कि उसके सार्थक, नैतिक, बौद्धिक और जिम्मेदार उपयोग को भी समझें। उन्होंने प्रतिभागियों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता को शॉर्टकट के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय अपनी मौलिक सोच, वैचारिक स्पष्टता और शोध क्षमता को मजबूत करने वाले साधन के रूप में अपनाने का आह्वान किया।
यह पाँच दिवसीय कार्यशाला प्रतिभागियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विभिन्न उपकरणों के माध्यम से शोध-विषय एवं शोध-प्रश्नों का चयन, साहित्य समीक्षा, आंकड़ों का विश्लेषण, वैज्ञानिक लेखन, शोध प्रस्तुतीकरण एवं नवाचार सहित अनुसंधान के विभिन्न चरणों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगी। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रो संजय कुमार चौधरी द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद अतिथियों और प्रतिभागियों का सामूहिक छायाचित्र लिया गया तथा हाई टी एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भारतीय ज्ञान परंपरा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, कौशल विकास, वैचारिक चिंतन और नैतिक मूल्यों के समन्वय के माध्यम से विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।







