Bihar Flood: बिहार में बाढ़ की विकट स्थिति को लेकर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बाढ़ राहत कार्यों में कमी और नेताओं की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल उठाते हुए विपक्ष की भूमिका पर भी तंज कसा। पप्पू यादव ने दावा किया है कि राज्य में लगभग 56 लाख लोग बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं और कोसी-गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच उनका जीवन दूभर हो गया है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में दवाइयों और ब्लीचिंग पाउडर तक की कमी का आरोप लगाते हुए पप्पू यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने विपक्ष के नेताओं पर भी निशाना साधा, खासकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और चिराग पासवान की भूमिका पर कड़ी टिप्पणी की।
विपक्ष की भूमिका पर पप्पू यादव का तीखा वार
पप्पू यादव ने बाढ़ के मुद्दे पर विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते हुए बिना नाम लिए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि बिहार में तीन-चार युवराज हैं, जो अपने क्षेत्रों में जाने के बजाय दूसरी गतिविधियों में व्यस्त हैं। पूर्णिया सांसद ने एक युवराज का जिक्र करते हुए कहा कि वे एक दिन अपने क्षेत्र में गए, कुछ घंटे बाद उनकी तबीयत खराब हो गई और अगले दिन एमएलसी के चयन के कार्यक्रम के कारण वे क्षेत्र में नहीं गए।
पप्पू यादव ने व्यंग्य करते हुए कहा, ‘शायद माल गिनने में समय लग गया होगा।’
उन्होंने नेता प्रतिपक्ष के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि राहत और बचाव सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी है और विपक्ष अपनी तरफ से जितना संभव है, उतना कर रहा है। पप्पू यादव ने पूछा कि क्या विपक्ष की जिम्मेदारी सिर्फ झुनझुना हिलाना है। उन्होंने राघोपुर और हाजीपुर जैसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नेताओं की सक्रियता न दिखने पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि कुछ नेता जनता के बीच जाने के बजाय विदेश जाने और पैसे कमाने जैसी गतिविधियों में लगे हैं।
केंद्र और राज्य सरकार पर भी गंभीर आरोप
पप्पू यादव ने बिहार में बाढ़ की स्थिति के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि बिहार ज्ञान और साहित्य की धरती रहा है, लेकिन आज बड़ी आबादी बाढ़ की मार झेल रही है। उन्होंने राहत शिविरों में बुनियादी सुविधाओं और स्वास्थ्य व्यवस्था की कमी पर चिंता जताई, जहां जरूरी दवाइयां और ब्लीचिंग पाउडर तक उपलब्ध नहीं हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा सवाल किया कि नेपाल को केंद्र की ओर से मदद मिलती है, लेकिन बिहार के लिए वैसी चिंता क्यों नहीं दिखाई जाती। पप्पू यादव ने पूछा, ‘क्या बिहार भारत से बाहर है? क्या बिहार की जनता भारत से बाहर है?’ उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह पर बिहार में एक चीनी मिल तक शुरू न करवा पाने का आरोप लगाया और अमित शाह से बाढ़ को लेकर किए गए वादों का हिसाब मांगा।
चुनावी दौर और मौजूदा बाढ़ की स्थिति की तुलना करते हुए पप्पू यादव ने कहा कि चुनाव के समय नेताओं के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध थे, लेकिन अब बाढ़ प्रभावित लोगों तक पहुंचने के लिए वही हेलीकॉप्टर दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों की स्थिति को बेहद खराब बताया, जहां लोग जानवरों और कीड़ों से भी बदतर हालात में रहने को मजबूर हैं। पप्पू यादव ने बाढ़ से जुड़े सरकारी खर्च को लेकर CAG रिपोर्ट का हवाला देते हुए जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर बनी सड़कों ने कई इलाकों में पानी की निकासी को बाधित किया है, जिससे बाढ़ का असर बढ़ा है।
चिराग पासवान और नेताओं की प्राथमिकताएं
पप्पू यादव ने चिराग पासवान को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चिराग पासवान को बिहार की जनता की चिंता नहीं है और वे मूर्ति लगवाने में व्यस्त हैं। उन्होंने बाढ़ की गंभीरता के बीच नेताओं की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए।
मुख्यमंत्री के हवाई सर्वेक्षण पर भी पप्पू यादव ने सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कुछ मिनटों का हवाई सर्वेक्षण कर लेते हैं और फिर अधिकारियों के साथ कार्यक्रम होता है। उन्होंने कहा कि बाढ़ जैसी बड़ी आपदा में केवल हवाई सर्वेक्षण से जमीन पर मौजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता।
पप्पू यादव ने सरकार से बाढ़ की गंभीरता को समझते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित व्यवस्था नहीं की गई, तो कुछ जिलों को छोड़कर पूरा बिहार बाढ़ की चपेट में आ सकता है, जिससे स्थिति और भयावह हो जाएगी।







