Darbhanga Land Dispute: बिहार के दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान पूर्वी स्थित महिसोट पंचायत के नरकटिया गांव में एक सार्वजनिक कुएं की जमीन पर मंदिर निर्माण को लेकर गहरा तनाव फैल गया है। ग्रामीणों के बीच जमीन के स्वामित्व और निर्माण कार्य को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए हैं, जिससे किसी भी समय विवाद बढ़ने की आशंका बनी हुई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए दरभंगा के आयुक्त ने जिलाधिकारी को तत्काल जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

सरकारी जमीन पर मंदिर निर्माण का आरोप, बढ़ा मतभेद
नरकटिया गांव में खाता संख्या 229 और खेसरा संख्या 379 की जमीन बिहार सरकार के नाम दर्ज है। ग्रामीणों के अनुसार, इसी सरकारी जमीन पर पहले एक सार्वजनिक कुआं था, जिसका उपयोग आस-पास के लोग करते थे। अब आरोप है कि इस कुएं को मिट्टी से भरकर सहनी पक्ष के लोगों द्वारा अपने समुदाय के नाम पर मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। यादव समुदाय के कुछ ग्रामीणों ने इस निर्माण कार्य का विरोध किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच मतभेद और बढ़ गया है। पूर्वी प्रखंड भाजपा उपाध्यक्ष सह ग्रामीण संतोष यादव ने दरभंगा के आयुक्त को आवेदन देकर निर्माण कार्य पर तुरंत रोक लगाने और सरकारी जमीन की जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों को सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की चिंता
गांव के लोग इस धार्मिक स्थल से जुड़े मामले में प्रशासन से बेहद सावधानी बरतने की अपील कर रहे हैं। उन्हें डर है कि जमीन या निर्माण को लेकर उत्पन्न विवाद कहीं आपसी कटुता में न बदल जाए और गांव के सामाजिक माहौल को प्रभावित न करे। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को जमीन की पैमाइश कर पुराने कुएं की वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जमीन का स्वरूप क्या है और निर्माण वैध है या नहीं। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि निर्माण कार्य जारी रहा, तो दोनों पक्षों के बीच विवाद और गहरा सकता है। इसी कारण, जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की गई है।
आयुक्त ने DM को दिए जांच के निर्देश
इस पूरे मामले की गंभीरता को समझते हुए, दरभंगा आयुक्त कार्यालय ने जिलाधिकारी को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में पूरे मामले की गहन जांच कर वस्तुस्थिति का पता लगाने और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। अब नरकटिया गांव के ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की जांच और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासनिक जांच जल्द होने से जमीन को लेकर बनी असमंजस की स्थिति दूर होगी और गांव में किसी भी संभावित बड़े विवाद को समय रहते टाला जा सकेगा।








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