Bihar drought: सावन का महीना खत्म होने को है, लेकिन बिहार के कई इलाकों में बारिश की कमी से किसानों की हालत बेहद खराब हो गई है। खासकर कमतौल और बेलबाड़ा जैसे क्षेत्रों में सूखे की मार से खेत फट चुके हैं, और धान की फसल सूखने लगी है। किसानों के चेहरों पर चिंता साफ देखी जा सकती है, क्योंकि उन्हें अपने परिवार के भरण-पोषण की चिंता सता रही है। रिपोर्ट: आंचल कुमारी, कमतौल, दरभंगा।
सूखे से मुरझाई धान की फसल, किसानों की बढ़ती चिंता
बारिश न होने के कारण कमतौल के खेतों में चौड़ी-चौड़ी दरारें पड़ गई हैं। धान के पौधे पानी की कमी से झुलस रहे हैं और उनकी हरियाली मुरझाने लगी है। बेलबाड़ा के किसान इंद्र कुमार यादव, आयुष कुमार, धीरज राय, अनिल राय, हरिवंश दास, अशर्फी चौपाल, चुनचुन राय, नरेंद्र कुमार सिंह, जीवछ साहनी और ममता देवी जैसे कई किसानों ने अपना दर्द साझा किया है। उनका कहना है कि समय पर बारिश नहीं होने से धान की रोपनी के बाद खेतों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाया।
महंगा डीजल बना चुनौती, वैकल्पिक सिंचाई की मांग
किसानों के लिए सिंचाई का दूसरा विकल्प भी मुश्किल हो गया है। डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण बोरिंग से खेतों की सिंचाई करना अब महंगा सौदा बन गया है, जो छोटे और मध्यम किसानों की पहुंच से बाहर है। एक किसान ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा:
“धरती फट गई है। हमारे कलेजे भी फट रहे हैं। अगर अब भी बारिश नहीं हुई तो फसल पूरी तरह चौपट हो जाएगी। फिर खाने को लाले पड़ जाएंगे। बच्चों का भरण पोषण करना मुश्किल हो जाएगा।”
भूखमरी की आशंका, सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की अपील
किसानों ने कृषि विभाग से तत्काल मदद की गुहार लगाई है। उनकी मांग है कि सरकार जल्द से जल्द सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था करे, ताकि उनकी मेहनत और फसल को बचाया जा सके। यदि समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो इस बार अन्नदाता को गंभीर आर्थिक संकट और यहां तक कि भुखमरी का सामना करना पड़ सकता है। यह स्थिति बिहार में Bihar drought के कारण उत्पन्न हुई है, जिस पर सरकार को तुरंत ध्यान देना चाहिए।







