Bihar – Darbhanga Paperless Registration: सतीश चंद्र झा दरभंगा। बिहार में सरकार की नई पेपरलेस निबंधन व्यवस्था की शुरुआत पहले ही दिन सवालों के घेरे में आ गई। सोमवार, 17 अगस्त को पूरे बिहार के भू-निबंधन कार्यालयों में इस व्यवस्था को लागू किया गया, लेकिन बेनीपुर और बहेड़ा में एक भी दस्तावेज का निबंधन नहीं हो सका। जमीन की रजिस्ट्री कराने आए सैकड़ों लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी और उन्हें निराश लौटना पड़ा। इस अप्रत्याशित स्थिति से सरकार को राजस्व का भी भारी नुकसान हुआ।
नई व्यवस्था ने बढ़ाई आम लोगों की मुश्किलें
बेनीपुर और बहेड़ा के भू-निबंधन कार्यालयों में सोमवार को दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। अधिकारी से लेकर कर्मचारी और कातिब तक दिनभर खाली बैठे रहे। दरअसल, आम लोग सरकार की इस नई व्यवस्था को समझ ही नहीं पा रहे थे। ग्रामीण क्षेत्रों से आए अधिकतर क्रेता-विक्रेताओं को ऑनलाइन प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी, जिसके चलते उन्हें बिना काम कराए ही वापस लौटना पड़ा।
भू-निबंधन पदाधिकारी आर्यमणि ने बताया, ‘सरकार के निर्देश के आलोक में सोमवार से पेपरलेस निबंधन कार्य शुरू किया गया है। नई व्यवस्था में क्रेता और विक्रेता को जमीन रजिस्ट्री के दौरान परेशानी नहीं होगी। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी तथा डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से निबंधन हो जाएगा। इसमें कातिबों को सर्विस प्रोवाइडर के रूप में रखा गया है और उनका भी डिजिटल सिग्नेचर होगा। लोगों को ओटीपी के माध्यम से ही घर बैठे निबंधन की प्रक्रिया के बाद ऑनलाइन दस्तावेज मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि सोमवार को नई व्यवस्था का पहला दिन होने के कारण एक भी निबंधन नहीं हो सका।’
कातिब संघ ने उठाए सवाल, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वीकार्यता पर संदेह
नई पेपरलेस निबंधन व्यवस्था को लेकर कातिब संघ ने भी अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। संघ का कहना है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि के लोगों के लिए यह प्रणाली काफी जटिल है और वे इसे आसानी से स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। संघ ने सरकार से इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
कातिब संघ के सचिव गुणा नन्द झा ने कहा, ‘नए नियम के तहत आमजन निबंधन कराने को तैयार नहीं हैं। यहां ग्रामीण क्षेत्र के अधिकतर क्रेता-विक्रेता होने के कारण लोग इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इस व्यवस्था पर सरकार को पुनर्विचार करनी चाहिए।’
पहले ही दिन की यह विफलता दर्शाती है कि नई व्यवस्था के सफल क्रियान्वयन के लिए व्यापक जागरूकता और प्रशिक्षण की आवश्यकता है। अन्यथा, यह आम जनता के लिए सुविधा के बजाय परेशानी का सबब बनती रहेगी और सरकार को राजस्व का नुकसान होता रहेगा।







