Darbhanga Divyang Camp: दरभंगा जिले के घनश्यामपुर प्रखंड में दिव्यांग बच्चों के लिए आयोजित एक विशेष शिविर ने उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है। इस शिविर में 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 72 दिव्यांग बच्चों के यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) कार्ड बनाए गए, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में आसानी होगी।
बिहार शिक्षा परियोजना दरभंगा के समावेशी शिक्षा प्रभाग द्वारा घनश्यामपुर प्रखंड के ग्राम पंचायत राज पनुहद स्थित मध्य विद्यालय पुनहद में 19 सितंबर 2026 को यह महत्वपूर्ण शिविर लगाया गया। इसमें घनश्यामपुर और किरतपुर प्रखंड के 6 से 18 आयु वर्ग के बच्चों का प्रमाणीकरण किया गया।
डॉक्टर्स की टीम ने दी महत्वपूर्ण सेवाएं
सिविल सर्जन कार्यालय दरभंगा से आए चिकित्सकों की एक विशेष टीम ने शिविर में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दीं। इस टीम में फिजिशियन डॉ. कृति रंजन, डॉ. राजेश कुमार, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. प्रिंस कुमार और सर्जन डॉ. दीपक कुमार शाह शामिल थे, जिन्होंने दिव्यांग बच्चों की जांच की।
इस शिविर में कुल 135 दिव्यांग बच्चे उपस्थित हुए। इनमें से 72 बच्चों को दिव्यांगता प्रमाणीकरण (यू डी आई डी) कार्ड जारी किए गए, जो उनकी पहचान और अधिकारों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
सहायक उपकरणों से मिलेगी नई उड़ान
दिव्यांग बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार विभिन्न सहायक उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे। शिविर में कई बच्चों को चिन्हित किया गया है, जिन्हें जल्द ही ये उपकरण मिलेंगे।
- व्हीलचेयर: 12 बच्चे
- ट्राईसाइकिल: 3 बच्चे
- मानसिक दिव्यांगता किट: 5 बच्चे
- ब्रेल किट: 3 बच्चे
- श्रवण यंत्र: 19 बच्चे
ये उपकरण दिव्यांग बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी दैनिक गतिविधियों को सुगम बनाने में मदद करेंगे।
बिहार शिक्षा परियोजना दरभंगा के समावेशी शिक्षा समन्वयक मुस्ताक अहमद, सुमन कुमार चौधरी, फिजियोथैरेपिस्ट शशि कुमार मिश्रा, ऑडियोलॉजिस्ट कुमारी प्रियंका रानी के साथ अमल बर्मन, प्रोदीप दास, अवधेश कुमार शर्मा, मयंक सुधा, धर्मेंद्र कुमार पाल और श्याम कुमार ने शिविर को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने सभी दिव्यांग बच्चों और उनके अभिभावकों को तत्परता से सहयोग किया।
दिव्यांग बच्चों के लिए ऐसे ही एक और शिविर का आयोजन 21 सितंबर 2026 को मध्य विद्यालय बहेरा के प्रांगण में किया जाएगा। यह जानकारी सुमन कुमार चौधरी ने दी। इन शिविरों से दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले दिव्यांग बच्चों तक पहुंच सुनिश्चित हो रही है और उन्हें आवश्यक सहायता मिल पा रही है।







