Kushweshwarsthan Purvi News: बिहार के कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड कार्यालय में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी (पीओ) मो. अबुल कलाम पर एक कर्मी के साथ अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज करने का आरोप लगा है। इस मामले ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है, खासकर तब जब शिकायत के साथ ऑडियो क्लिप भी उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई है। पीड़ित कर्मी ने प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) से इसकी शिकायत करते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
यह घटना मोबाइल पर एक जांच रिपोर्ट मांगने के दौरान हुई, जिसने अब वरीय अधिकारियों तक अपनी दस्तक दे दी है। इस आरोप के बाद मनरेगा पीओ मो. अबुल कलाम पर विभागीय कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
आरोप क्या है और किसने लगाया?
केवटगामा ग्राम कचहरी के सचिव और वर्तमान में प्रखंड कार्यालय में प्रतिनियुक्त अर्जुन दास ने बीडीओ को दिए अपने आवेदन में बताया है कि अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, बिरौल के कार्यालय से जुड़े एक परिवाद की जांच रिपोर्ट के संबंध में उन्होंने मनरेगा पीओ मो. अबुल कलाम से मोबाइल फोन पर बात की थी। आरोप है कि इसी बातचीत के दौरान पीओ ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और गाली-गलौज की। अर्जुन दास ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए पीओ के खिलाफ आवश्यक कानूनी और विभागीय कार्रवाई की मांग की है।
बीडीओ प्रभा शंकर मिश्रा ने बताया, “मामले को लेकर आवेदन प्राप्त हुआ है और साथ में ऑडियो क्लिप भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले से जिलाधिकारी को पत्र के माध्यम से अवगत करा दिया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई वरीय स्तर से प्राप्त निर्देश के आधार पर की जाएगी।”
बीडीओ का अगला कदम और वरीय अधिकारियों का रुख
इस गंभीर शिकायत पर प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रभा शंकर मिश्रा ने त्वरित प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पुष्टि की कि उन्हें अर्जुन दास का आवेदन और उसके समर्थन में एक ऑडियो क्लिप भी प्राप्त हुआ है। बीडीओ मिश्रा ने बताया कि उन्होंने पूरे मामले की जानकारी जिलाधिकारी को पत्र के माध्यम से दे दी है। अब इस प्रकरण में आगे की कार्रवाई वरीय अधिकारियों से मिलने वाले निर्देशों के आधार पर की जाएगी, जिससे मनरेगा पीओ पर लगे आरोपों की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।
इस मामले में वरीय अधिकारियों के हस्तक्षेप से निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। प्रखंड कार्यालय में इस तरह के आरोप से कार्य संस्कृति पर सवाल उठ रहे हैं, और सभी की निगाहें अब जिलाधिकारी के अगले कदम पर टिकी हैं कि मनरेगा पीओ मो. अबुल कलाम के खिलाफ क्या निर्णय लिया जाता है। हालांकि पीओ ने आरोप को निराधार बताया है।







