Darbhanga Flood: बिहार के दरभंगा जिले में बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। कुशेश्वरस्थान पूर्वी और किरतपुर प्रखंड क्षेत्रों में कोसी व कमला बलान नदियों का जलस्तर तो गिरा है, लेकिन कई गांवों में सड़कें अब भी डूबी हुई हैं। इससे आवागमन बुरी तरह प्रभावित है और ग्रामीणों को नाव के सहारे जीवन गुजारना पड़ रहा है।
कुशेश्वरस्थान पूर्वी में नाव ही सहारा, सामुदायिक किचन से भोजन
कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के कई गांवों में अभी भी 2 से 3 फीट तक पानी जमा है। ग्रामीण एसएच-56 कुशेश्वरस्थान-फुलतोड़ा सड़क तक पहुंचने के लिए नावों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसके बाद वे वाहनों से आगे का सफर करते हैं। अंचल प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित मार्गों पर कुल 15 नावों का परिचालन सुनिश्चित किया है।
सीओ राकेश रौशन भारती ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों के लिए 10 स्थानों पर सामुदायिक किचन चलाए जा रहे हैं, जहां तैयार भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। ग्रामीणों की मांग पर संबंधित स्थानों की जांच के बाद आवश्यकतानुसार और नावें उपलब्ध कराई जाएंगी।
वहीं, ग्रामीणों ने क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित घोषित करने की मांग की है। बहवा में कोसी नदी से हो रहे कटाव स्थल पर जल संसाधन विभाग के अधिकारी कटावरोधी कार्य शुरू करेंगे ऐसी जानकारी आ रही है।
घनश्यामपुर और किरतपुर में भी चुनौतियां
घनश्यामपुर प्रखंड क्षेत्र में कमला नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसके कारण कमला नदी के पूर्वी और पश्चिमी तटबंध के बीच बसे दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। बाउर, रसियारी, कामत टोल, कनकी मुसहरी, बुढेब टोल और बैजनाथपुर जैसे गांवों की मुख्य सड़कों पर 2 से 3 फीट तक पानी जमा है। कई विद्यालय भी चारों ओर से पानी से घिर चुके हैं, जिससे पठन-पाठन बाधित हो रहा है। इसके बावजूद, शिक्षक-शिक्षिकाएं 3 से 4 फीट गहरे पानी से होकर विद्यालय पहुंचने को मजबूर हैं, या जहां नाव की व्यवस्था है, वहां नाव से पहुंच रहे हैं।
किरतपुर प्रखंड क्षेत्र में कोसी नदी के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन रघुनाथपुर, रामख्तरिया, चकला, रामपुर, लक्ष्मीपुर, ककोरबा, बरदीपुर, कदवारा, भंडरिया, सिरनिया, भलुवाही और पकरिया समेत नदी के दोनों तटबंधों के बीच बसे गांवों में बाढ़ का असर अभी भी बना हुआ है। इन क्षेत्रों में जनजीवन अस्त-व्यस्त है और मवेशियों के लिए चारा जुटाना एक बड़ी समस्या बन गया है। आवागमन के लिए नाव और पैदल चलना ही मुख्य सहारा है।
किरतपुर के अंचलाधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि कोसी नदी का जलस्तर फिलहाल खतरे के निशान से ऊपर नहीं है और प्रशासन बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है।








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