SSC CGL Bihar: सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में 10,731 पदों पर भर्ती के लिए आयोजित SSC CGL टियर-1 परीक्षा के पहले दिन बिहार और उत्तर प्रदेश के परीक्षा केंद्रों पर 60 प्रतिशत से अधिक पंजीकृत अभ्यर्थी उपस्थित नहीं हुए। इस भारी अनुपस्थिति ने परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवारों के बीच कटऑफ और प्रतिस्पर्धा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
कर्मचारी चयन आयोग (SSC) द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण परीक्षा के पहले दिन, दोनों राज्यों के 36 केंद्रों पर कुल 29,609 उम्मीदवार पंजीकृत थे। इनमें से केवल 11,593 अभ्यर्थी ही परीक्षा देने पहुंचे, जो कुल पंजीकरण का महज 39.15 प्रतिशत है। यह आंकड़ा सरकारी नौकरी के लिए होने वाली किसी भी बड़ी परीक्षा के लिए अप्रत्याशित माना जा रहा है।
बिहार और यूपी में उपस्थिति का चौंकाने वाला आंकड़ा
SSC मध्य क्षेत्र के तहत आने वाले उत्तर प्रदेश और बिहार के परीक्षा केंद्रों पर पहले दिन उपस्थिति दर बेहद कम रही। उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा लगभग 37.98 प्रतिशत दर्ज किया गया, जबकि बिहार में 41.60 प्रतिशत अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। यहां तक कि प्रयागराज जैसे बड़े परीक्षा केंद्र वाले शहरों में भी बड़ी संख्या में उम्मीदवार परीक्षा देने नहीं पहुंचे। इस SSC CGL बिहार परीक्षा में इतनी कम उपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
10,731 पदों पर होनी है भर्ती, जानिए किस वर्ग में कितने पद
SSC CGL 2026 भर्ती अभियान के तहत केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में ग्रुप बी और ग्रुप सी के कुल 10,731 पद भरे जाने हैं। इस भर्ती में CBIC (केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड) और CBDT (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) जैसे प्रमुख विभागों में इंस्पेक्टर और टैक्स असिस्टेंट जैसे पद भी शामिल हैं। पदों का वर्गवार विवरण इस प्रकार है:
| वर्ग | पदों की संख्या |
|---|---|
| अनारक्षित | 4,412 |
| ओबीसी | 2,772 |
| ईडब्ल्यूएस | 1,028 |
| एससी | 1,715 |
| एसटी | 804 |
यह स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में सरकारी नौकरियों के बावजूद, बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का परीक्षा में न पहुंचना चिंता का विषय है, लेकिन जो अभ्यर्थी उपस्थित हुए हैं, उनके लिए यह एक अवसर भी हो सकता है।
परीक्षा छोड़ने के पीछे क्या हैं संभावित कारण?
परीक्षा में इतनी कम उपस्थिति के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तैयारी पूरी न होना और परीक्षा को लेकर आखिरी समय का दबाव इनमें प्रमुख है। अक्सर कई अभ्यर्थी बिना पर्याप्त तैयारी के फॉर्म भर देते हैं और परीक्षा नजदीक आने पर दबाव या तैयारी की कमी के कारण परीक्षा में शामिल होने से बचते हैं। इसके अलावा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के सामने अब करियर के कई अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। ऐसे में कुछ उम्मीदवार परीक्षा फॉर्म भरने के बाद अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर परीक्षा में शामिल न होने का फैसला कर सकते हैं।
टियर-1 परीक्षा का पैटर्न और नेगेटिव मार्किंग
SSC CGL टियर-1 परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की जाती है। अभ्यर्थियों को 60 मिनट में कुल 100 सवाल हल करने होते हैं। परीक्षा में रीजनिंग, मैथ्स, इंग्लिश और जनरल अवेयरनेस से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। गलत उत्तर के लिए नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान भी है, जो उम्मीदवारों के लिए एक अतिरिक्त चुनौती होती है। समय की कमी और परीक्षा का दबाव भी कुछ उम्मीदवारों के लिए परीक्षा छोड़ने का कारण बन सकता है।
कम अटेंडेंस का कटऑफ पर क्या होगा असर?
परीक्षा में 60 प्रतिशत से अधिक अभ्यर्थियों के शामिल न होने से उम्मीदवारों की वास्तविक संख्या निश्चित रूप से कम हुई है। हालांकि, इसका कटऑफ पर कितना असर पड़ेगा, यह फिलहाल पूरी तरह से तय नहीं कहा जा सकता। कटऑफ कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें परीक्षा का कठिनाई स्तर, परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवारों का प्रदर्शन और श्रेणीवार प्रतिस्पर्धा शामिल है। टियर-1 उत्तीर्ण करने वाले उम्मीदवारों को दिसंबर में प्रस्तावित टियर-2 परीक्षा की तैयारी करनी होगी। कम उपस्थिति से उन अभ्यर्थियों को कुछ हद तक राहत मिल सकती है जिन्होंने अच्छी तैयारी के साथ परीक्षा दी है, क्योंकि प्रतिस्पर्धा कुछ कम हो सकती है।







