Darbhanga Kisan News: दरभंगा जिले में कृषि विभाग से जुड़ी एक महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जाले प्रखंड के कतरौल बसंत पंचायत में कार्यरत किसान सलाहकार नरेंद्र झा को उनके पद से मुक्त कर दिया गया है। जिला कृषि पदाधिकारी, दरभंगा द्वारा जारी एक आदेश में नरेंद्र झा पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिसने स्थानीय कृषि समुदाय में हड़कंप मचा दिया है। यह घटना दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और अधिकारियों के साथ समन्वय को लेकर विभाग कितना सख्त है।
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फार्मर रजिस्ट्री अभियान में लापरवाही और गंभीर आरोप
दरभंगा जिला कृषि पदाधिकारी ने 4 जून 2026 को एक आदेश जारी करते हुए नरेंद्र झा को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के अनुसार, नरेंद्र झा पर सबसे बड़ा आरोप फार्मर रजिस्ट्री महाअभियान के दौरान घोर लापरवाही बरतने का है। विभाग का कहना है कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण अभियान के तहत एक भी किसान का पंजीकरण नहीं कराया, जो उनके कर्तव्यों के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। यह अभियान किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अतिरिक्त, उन पर सरकारी पदाधिकारियों के खिलाफ भ्रामक और गलत संवाद फैलाकर उन पर दबाव बनाने की कोशिश करने का भी आरोप है। यह आरोप विभागीय कार्यप्रणाली में बाधा डालने और अनुशासनहीनता के दायरे में आता है।
कार्यालय आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अनुमंडल कृषि पदाधिकारी, सदर दरभंगा की अनुशंसा पर नरेंद्र झा से इस संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया था। हालांकि, उनके द्वारा प्रस्तुत जवाब को विभाग ने संतोषजनक नहीं पाया। विभाग का मानना है कि उनका जवाब आरोपों को खारिज करने में सक्षम नहीं था और उसमें ठोस तथ्यों का अभाव था। किसान सलाहकार चयन मार्गदर्शिका में निर्धारित प्रावधानों के विपरीत आचरण, मनमाना व्यवहार, स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय संलिप्तता, और अपने सौंपे गए कर्तव्यों के निर्वहन में लगातार लापरवाही जैसे आधारों पर उन्हें पद से हटाया गया है। ये सभी आरोप एक किसान सलाहकार के लिए गंभीर माने जाते हैं, क्योंकि उनका सीधा संपर्क किसानों से होता है और उन्हें सरकारी योजनाओं को उन तक पहुँचाना होता है।
नरेंद्र झा का आरोपों पर तीखा पलटवार और खंडन
वहीं, किसान सलाहकार नरेंद्र झा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इन आरोपों को पूर्वाग्रह से ग्रसित और पूरी तरह से बेबुनियाद बताया है। नरेंद्र झा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका राजनीति से किसी भी प्रकार का कोई संबंध नहीं है और वे कभी भी किसी राजनीतिक दल या गतिविधि में शामिल नहीं रहे हैं। उन्होंने अपने बचाव में एक महत्वपूर्ण दावा भी किया। उनके अनुसार, जनवरी महीने में पंचायत भवन में एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया था, जिसमें सामूहिक प्रयासों से कुल 290 किसानों की फार्मर आईडी बनाई गई थी। इस शिविर में उन्होंने किसानों की ई-केवाईसी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनका कहना है कि उन्होंने अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी ईमानदारी से किया है।
नरेंद्र झा ने विभाग के इस दावे को भी चुनौती दी है कि उनसे किसी कार्य के संबंध में अनुमंडल कृषि पदाधिकारी द्वारा स्पष्टीकरण मांगा गया था। उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई औपचारिक नोटिस या स्पष्टीकरण का अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ था, जैसा कि कार्यालय आदेश में उल्लेख किया गया है। उनका यह बयान कृषि विभाग के दावों पर सवाल खड़े करता है और पूरे मामले को और भी उलझा देता है। यह घटना देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें बिहार किसान सलाहकार के चयन और उनके कार्यों की निगरानी प्रणाली पर भी बहस छेड़ सकती है।
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कृषि समुदाय में असमंजस और आगे की राह
इस पूरे घटनाक्रम ने दरभंगा के कृषि विभाग और स्थानीय किसान समुदाय में एक तरह का असमंजस पैदा कर दिया है। एक तरफ जहां विभाग सरकारी नियमों के सख्ती से पालन की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पदमुक्त किए गए किसान सलाहकार अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बता रहे हैं। यह स्थिति इस बात पर प्रकाश डालती है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में जमीनी स्तर पर कितनी चुनौतियां आती हैं। नरेंद्र झा की पदमुक्ति से अन्य किसान सलाहकारों के बीच भी एक संदेश गया है कि उन्हें अपने कर्तव्यों के प्रति अधिक सजग रहना होगा।
अब देखना यह होगा कि इस मामले में आगे क्या कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई होती है। क्या नरेंद्र झा अपने निष्कासन को चुनौती देने के लिए कोई कानूनी रास्ता अपनाते हैं, या फिर विभाग अपने फैसले पर कायम रहता है। यह घटना निश्चित रूप से कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा सकती है, लेकिन इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो। किसानों को उम्मीद है कि इस विवाद से उनके हितों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक सुचारु रूप से पहुंचता रहेगा।







