Bihar Tera Cotta: मिथिला क्षेत्र के शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बिहार सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन की सरकार पारंपरिक मिट्टी शिल्प से जुड़े कारीगरों के कौशल और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में, दरभंगा के मदारपुर स्थित टेराकोटा कॉमन फैसिलिटी सेंटर का शीघ्र ही जीर्णोद्धार किया जाएगा। यह केंद्र 2020 में उद्योग मंत्रालय द्वारा लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था, जिसका उद्देश्य शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक, बेहतर पैकेजिंग और प्रशिक्षण प्रदान करना था।
स्थानीय सांसद और लोकसभा में भाजपा सचेतक डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने गुरुवार को पटना में बिहार की उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह से मुलाकात के बाद इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र के उपयोग और उचित रख-रखाव के लिए सरकार द्वारा ठोस पहल सुनिश्चित की जाएगी। इस अवसर पर सांसद डॉ. ठाकुर ने उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह को मिथिला की परंपरा के अनुसार पाग और अंगवस्त्र से सम्मानित किया। उन्होंने मंत्री को दरभंगा के टेराकोटा फैसिलिटी सेंटर के आधुनिकीकरण के साथ-साथ जिले में नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए एक आग्रह पत्र भी सौंपा।






जर्जर केंद्र के लिए सांसद ने उठाई आवाज
सांसद डॉ. ठाकुर ने उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह का ध्यान दरभंगा स्थित टेराकोटा कॉमन फैसिलिटी सेंटर की जर्जर और उपेक्षित स्थिति की ओर खींचा। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि दरभंगा सहित पूरे मिथिला क्षेत्र के स्थानीय शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से निर्मित यह महत्वपूर्ण केंद्र उद्घाटन से पहले ही बदहाली का शिकार हो गया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
सांसद डॉ. ठाकुर ने उद्योग मंत्री को सौंपे पत्र के माध्यम से बिहार के मुख्यमंत्री से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, आवश्यक मरम्मत एवं संरक्षण सुनिश्चित करने, दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा केंद्र को शीघ्र संचालित कराने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केंद्र मिथिला के टेराकोटा शिल्पकारों के कौशल, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संस्थान है जिसे उपयोगी बनाकर यहां के स्थानीय शिल्पकारों के हुनर को बढ़ावा दिया जा सकता है।
मिथिला की पहचान, टेराकोटा का गौरवशाली इतिहास
डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने टेराकोटा के समृद्ध इतिहास पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बिहार में प्रागैतिहासिक काल से ही टेराकोटा के नमूने मिलते हैं। मौर्य, गुप्त, पाल और शुंग काल में बनी टेराकोटा की कलाकृतियों के इस्तेमाल के कई उदाहरण मौजूद हैं। वैदिक युग में वैशाली और मिथिला क्षेत्र में हुए अलग-अलग उत्खनन में भी इसके प्रयोग के बहुत सारे प्रमाण मिले हैं।
सांसद डॉ. ठाकुर ने रेखांकित किया कि यह तथ्य साबित करता है कि टेराकोटा न केवल मिथिला या बिहार की, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और प्राचीन विरासत का एक जीवंत हिस्सा है। इस पहल से इस ऐतिहासिक कला को नई पहचान मिलेगी और स्थानीय कारीगरों को आर्थिक रूप से सशक्त होने का अवसर प्राप्त होगा। मुलाकात के दौरान दरभंगा पूर्वी जिला के जिला महामंत्री संजय कुमार सिंह उर्फ पप्पू सिंह और भाजपा नेता मनीष झा सहित अन्य भाजपा नेता भी उपस्थित रहे।








