Bihar Encounter: भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच अब निर्णायक मोड़ पर आ गई है। इस बहुचर्चित Bihar एनकाउंटर की जांच कर रहे न्यायिक आयोग ने एक बड़ा फैसला लेते हुए 15 पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को गवाही के लिए समन जारी किया है। इन सभी को जुलाई माह में आयोग के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
जांच आयोग ने यह महत्वपूर्ण कदम बिलौटी गांव में 17 जून को हुए एनकाउंटर की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया है। इस मामले में पहले ही परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद न्यायिक जांच के आदेश दिए गए थे। अब अधिकारियों की गवाही से घटनाक्रम की पूरी तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।






भोजपुर एनकाउंटर: 15 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज, SDO-DSP समेत सभी की पिस्टल जब्त!
Bihar Encounter: भोजपुर जिले में चर्चित भरत भूषण तिवारी Bihar Encounter मामले की न्यायिक जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। इस प्रकरण की जांच कर रहे आयोग ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए जगदीशपुर के एसडीओ, तत्कालीन डीएसपी और तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष सहित कुल 15 पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को गवाही के लिए समन जारी किया है। आयोग ने इन सभी संबंधित अधिकारियों और जवानों को अलग-अलग तिथियों पर उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
जानकारी के अनुसार, शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया गया था। यह आयोग लगातार साक्ष्य जुटाने में लगा है। इसी कड़ी में आयोग ने उन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को तलब किया है, जो घटना के समय मौके पर मौजूद थे या इस कार्रवाई का हिस्सा थे। आयोग के समक्ष उनके बयान इस मामले की जांच में निर्णायक साबित हो सकते हैं।
16 और 17 जुलाई को होगी अहम सुनवाई
न्यायिक आयोग द्वारा जारी समन में संबंधित अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को 16 एवं 17 जुलाई को आयोग के सामने उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। आयोग घटना से जुड़े सभी तथ्यों, गवाहों के आरोपों और पुलिस अधिकारियों के पक्ष को विस्तार से सुनना चाहता है। इन बयानों के आधार पर ही आगे की जांच को दिशा दी जाएगी।
एनकाउंटर में इस्तेमाल सभी सर्विस पिस्टल जब्त
इस Bihar Encounter मामले की जांच के दौरान पुलिस ने मुठभेड़ में इस्तेमाल किए गए हथियारों की वैज्ञानिक जांच भी तेज कर दी है। इसी क्रम में तत्कालीन जगदीशपुर डीएसपी के बॉडीगार्ड, एक दारोगा और एक एएसआई की सरकारी सर्विस पिस्टल जब्त कर ली गई है। इन हथियारों को विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) भेजा जाएगा, जहां बैलिस्टिक और अन्य तकनीकी परीक्षण किए जाएंगे। इससे पहले, तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष की सरकारी पिस्टल, एसटीएफ के एक जवान की सर्विस पिस्टल और भरत तिवारी के पास से बरामद पिस्टल भी जांच के लिए जब्त की जा चुकी हैं। अधिकारियों का मानना है कि फोरेंसिक रिपोर्ट से घटना की कई महत्वपूर्ण कड़ियां स्पष्ट हो सकती हैं।
अधिकारियों का कहना है कि फोरेंसिक रिपोर्ट से घटना की कई महत्वपूर्ण कड़ियां स्पष्ट हो सकती हैं, जिससे जांच को सही दिशा मिलेगी।
समन पाने वाले पुलिसकर्मियों में एसडीओ, तत्कालीन डीएसपी और थानाध्यक्ष के अलावा शाहपुर थाने के दारोगा, जांच अधिकारी, एएसआई, एसटीएफ के दारोगा, सिपाही, चालक हवलदार और डीएसपी के बॉडीगार्ड समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। सभी को निर्धारित तिथियों पर आयोग के समक्ष उपस्थित होकर अपने बयान दर्ज कराने होंगे।
जांच पर टिकी हैं सबकी निगाहें
भरत तिवारी एनकाउंटर मामला शुरू से ही चर्चा का विषय बना हुआ है। घटना के बाद परिजनों ने एनकाउंटर पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद न्यायिक जांच के आदेश दिए गए। आयोग लगातार गवाहों के बयान दर्ज कर रहा है और तकनीकी साक्ष्यों को भी एकत्रित किया जा रहा है। अब पुलिस अधिकारियों और जवानों की गवाही के साथ-साथ फोरेंसिक रिपोर्ट भी इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जांच से जुड़े कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं, जिनसे पूरे घटनाक्रम की तस्वीर और स्पष्ट होगी। फिलहाल सभी की निगाहें न्यायिक आयोग की आगामी सुनवाई और जांच की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि एनकाउंटर की परिस्थितियां क्या थीं और मामले में आगे किस प्रकार की कार्रवाई की जाएगी।
15 पुलिस अधिकारी-कर्मी तलब, इन तिथियों पर होगी सुनवाई
न्यायिक आयोग ने घटना से जुड़े सभी पहलुओं को जानने और गवाहों के आरोपों के साथ पुलिस अधिकारियों के पक्ष को विस्तार से सुनने के लिए समन जारी किए हैं। जिन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को तलब किया गया है, उनमें ये प्रमुख नाम शामिल हैं:
- जगदीशपुर के एसडीओ
- तत्कालीन डीएसपी
- तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष
- शाहपुर थाने के दारोगा
- जांच अधिकारी
- एएसआई
- एसटीएफ के दारोगा
- एसटीएफ के सिपाही
- चालक हवलदार
- डीएसपी के बॉडीगार्ड
आयोग ने इन सभी संबंधित अधिकारियों और जवानों को 16 एवं 17 जुलाई को आयोग के समक्ष उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया है। उनकी गवाही इस जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
फोरेंसिक जांच के लिए जब्त की गईं सर्विस पिस्टल
एनकाउंटर की जांच के दौरान पुलिस ने हथियारों की वैज्ञानिक पड़ताल भी तेज कर दी है। इस कड़ी में कई अधिकारियों और कर्मियों की सरकारी सर्विस पिस्टल जब्त कर ली गई है, जिन्हें विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) भेजा जा रहा है। इन पिस्तौलों की बैलिस्टिक और अन्य तकनीकी जांच की जाएगी।
एफएसएल भेजी गई पिस्तौलों में ये शामिल हैं:
- तत्कालीन जगदीशपुर डीएसपी के बॉडीगार्ड की सरकारी सर्विस पिस्टल
- एक दारोगा की सरकारी सर्विस पिस्टल
- एक एएसआई की सरकारी सर्विस पिस्टल
- तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष की सरकारी पिस्टल
- एसटीएफ के एक जवान की सर्विस पिस्टल
- भरत तिवारी के पास से बरामद पिस्टल
अधिकारियों का मानना है कि फोरेंसिक रिपोर्ट से घटना की कई महत्वपूर्ण कड़ियां स्पष्ट हो सकती हैं और इससे पूरे घटनाक्रम को समझने में मदद मिलेगी।
न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पर टिकी सबकी निगाहें
यह मामला शुरू से ही सुर्खियों में रहा है। न्यायिक आयोग लगातार साक्ष्य जुटा रहा है और गवाहों के बयान दर्ज कर रहा है। अब पुलिस अधिकारियों और जवानों की गवाही तथा फोरेंसिक रिपोर्ट इस जांच में निर्णायक भूमिका निभाएगी। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जांच से जुड़े कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं, जिनसे पूरे घटनाक्रम की तस्वीर और स्पष्ट होगी। सभी की निगाहें न्यायिक आयोग की आगामी सुनवाई और उसकी अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि एनकाउंटर की परिस्थितियां क्या थीं और आगे क्या कार्रवाई होगी।








