Darbhanga Kisan Sarathi App: बिहार में कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। दरभंगा जिले के जाले प्रखंड सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 210 किसानों ने 15 जुलाई को ‘किसान सारथी ऐप’ के माध्यम से आयोजित एक पोलिंग में हिस्सा लिया। इन किसानों ने कृषि संबंधी विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय और सुझाव दिए, जो सीधे सरकार और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) तक पहुंचेंगे। इस पहल से भविष्य की कृषि योजनाओं को किसानों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में मदद मिलेगी।
यह महत्वपूर्ण गतिविधि नई दिल्ली स्थित एनएएससी कॉम्प्लेक्स में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा आयोजित ‘आईसीएआर सीएसआर कॉन्क्लेव-2026’ के तहत संपन्न हुई। कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के जरिए कृषि क्षेत्र में नवाचार, नई तकनीकों के हस्तांतरण और सतत कृषि विकास को बढ़ावा देना है। इसमें वैज्ञानिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, सीएसआर संगठन और नीति-निर्माता एक साथ आए, ताकि कृषि क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत किया जा सके और कृषि परिवर्तन की दिशा में विचार-विमर्श हो सके।






Darbhanga – जाले के किसानों की बात सीधे सरकार तक! 210 किसानों के फीडबैक से बदलेंगी कृषि योजनाएं
Bihar Kisan Sarathi App: बिहार में खेती-किसानी को नई दिशा देने की पहल तेज हो गई है। दरभंगा जिले के जाले स्थित कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़े 210 किसानों ने 15 जुलाई को ‘किसान सारथी ऐप’ के माध्यम से एक महत्वपूर्ण पोलिंग में भाग लिया। इस पहल का उद्देश्य किसानों की वास्तविक राय को सरकार और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) तक पहुंचाना है, ताकि कृषि योजनाओं को उनकी जरूरतों के अनुरूप ढाला जा सके।
किसानों की राय से मजबूत होंगी कृषि योजनाएं
कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर ने इस पहल के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ‘किसान सारथी ऐप’ के जरिए मिली किसानों की प्रतिक्रियाएं कृषि क्षेत्र के लिए गेम चेंजर साबित होंगी। डॉ. शेखर के अनुसार, “किसान सारथी ऐप के माध्यम से किसानों की वास्तविक राय सरकार और आईसीएआर तक पहुंचती है। इससे किसानों की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है तथा कृषि योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सलाहकारी सेवाओं को उनकी जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सकता है।” इस फीडबैक से फसल, मौसम, कीट-रोग, सिंचाई और अन्य कृषि विषयों पर किसानों की प्राथमिकताएं स्पष्ट होती हैं, जिससे अधिक उपयोगी कृषि परामर्श तैयार किए जा सकते हैं।
डॉ. दिव्यांशु शेखर ने कहा, “पोलिंग में प्राप्त सुझावों के आधार पर कृषि विज्ञान केन्द्र, आईसीएआर और कृषि विभाग भविष्य की योजनाओं, प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों को और प्रभावी ढंग से संचालित कर सकेंगे।”
आईसीएआर कॉन्क्लेव-2026: कृषि में नवाचार का नया अध्याय
यह महत्वपूर्ण गतिविधि नई दिल्ली स्थित एनएएससी कॉम्प्लेक्स में आयोजित होने वाले ‘आईसीएआर सीएसआर कॉन्क्लेव-2026’ के तहत संपन्न हुई। इस कॉन्क्लेव का मुख्य लक्ष्य कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के माध्यम से कृषि क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी हस्तांतरण और सतत कृषि विकास को बढ़ावा देना है। इस बड़े आयोजन में वैज्ञानिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, सीएसआर संगठन और नीति-निर्माता कृषि क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत बनाने और कृषि परिवर्तन की दिशा में गहन विचार-विमर्श करेंगे।
‘किसान सारथी ऐप’ पर मिले इन सुझावों से न केवल दरभंगा बल्कि पूरे बिहार के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। कृषि विभाग और आईसीएआर इन जानकारियों का उपयोग करके भविष्य में ऐसी योजनाएं और कार्यक्रम बनाएंगे जो किसानों की वास्तविक समस्याओं का समाधान कर सकें और उन्हें आधुनिक खेती से जोड़ सकें। यह पहल कृषि क्षेत्र में डेटा-संचालित निर्णय लेने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
किसानों की आवाज से बदलेंगी कृषि नीतियां
कृषि विज्ञान केन्द्र के वरीय वैज्ञानिक सह अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर ने इस पहल के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ‘किसान सारथी ऐप’ एक सीधा माध्यम है, जिसके जरिए किसानों की वास्तविक परेशानियाँ और सुझाव सरकार तक पहुँचते हैं।
डॉ. दिव्यांशु शेखर ने कहा, “किसान सारथी ऐप के माध्यम से किसानों की वास्तविक राय सरकार और आईसीएआर तक पहुंचती है। इससे किसानों की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है तथा कृषि योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सलाहकारी सेवाओं को उनकी जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सकता है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐप के माध्यम से फसल, मौसम, कीट-रोग, सिंचाई और अन्य कृषि विषयों पर किसानों की प्राथमिकताएं सामने आती हैं। यह जानकारी अधिक उपयोगी कृषि परामर्श तैयार करने में सहायक होगी, जिससे किसानों को सीधे फायदा मिलेगा।
भविष्य की योजनाओं को मिलेगा नया आयाम
इस पोलिंग में प्राप्त सुझावों के आधार पर कृषि विज्ञान केन्द्र, आईसीएआर और कृषि विभाग मिलकर भविष्य की योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों को और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित कर पाएंगे। यह सीधे तौर पर किसानों के जीवन में सुधार लाने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने में सहायक होगा। किसानों की सक्रिय भागीदारी यह सुनिश्चित करती है कि नीतियां सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत पर आधारित हों।
यह पहल दर्शाती है कि कैसे डिजिटल तकनीक का उपयोग कर किसानों को सशक्त बनाया जा सकता है और उनकी जरूरतों के आधार पर कृषि विकास को गति दी जा सकती है। आने वाले समय में इन फीडबैक के आधार पर बिहार में कृषि योजनाओं में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिससे राज्य के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।








