Darbhanga News: कम बारिश की आशंका के बीच दरभंगा के किसानों को ‘जीरो टिलेज’ मशीन के गलत संचालन से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए सीधी बुआई का फैसला करने वाले किसान अब खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। मशीन चलाने वाले ऑपरेटर की तकनीकी लापरवाही के कारण खेतों में धान के बजाय केवल खरपतवार उग आए हैं, जिससे किसानों पर दोबारा बुआई का आर्थिक बोझ आ गया है।







Deshaj Times: फ़ोटो कैप्शन: 18 जून को धान की सीधी बुआई करवाते किसान राजा सहनी.

Deshaj Times: फ़ोटो कैप्शन: उसी खेत में 06 जुलाई को कदवा करवाते किसान राजा सहनी.
कमजोर मॉनसून की आशंका और उम्मीदों पर पानी
जाले के रतनपुर निवासी किसान राजा सहनी ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि उन्होंने 18 जून को ‘जीरो टिलेज’ मशीन से धान की सीधी बुआई कराई थी। इस पद्धति को अपनाने का मुख्य कारण यह था कि इसमें पारंपरिक रोपनी की तुलना में काफी कम पानी की आवश्यकता होती है। संभावित कमजोर मॉनसून के पूर्वानुमान के मद्देनजर यह तकनीक किसानों के लिए एक उम्मीद की किरण थी। हालांकि, मशीन चालक को सही तकनीक की जानकारी न होने के कारण यह पूरी प्रक्रिया ही प्रभावित हो गई, और किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।
राजा सहनी ने बताया कि ‘जीरो टिलेज’ मशीन में दो अलग-अलग बक्शे होते हैं, एक में बीज और दूसरे में उर्वरक रखा जाता है। लेकिन चालक ने दोनों को अलग रखने के बजाय एक ही बक्शे में बीज और उर्वरक मिला दिया। इसके साथ ही, बीज गिराने वाले खटके की सेटिंग भी मनमाने ढंग से कर दी। इस गलती के कारण खेत में पर्याप्त मात्रा में बीज नहीं गिर सका और उनका अंकुरण नहीं हुआ। नतीजतन, खेतों में धान के बजाय केवल खरपतवार उग आए।
दोबारा बुआई का खर्च और प्रशिक्षण की मांग
इस बड़ी लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। राजा सहनी के अनुसार, अब उन्हें अपने खेतों की दोबारा ‘कदवा’ (खेत तैयार करना) कराकर पारंपरिक तरीके से धान की रोपनी करनी पड़ रही है। इस अप्रत्याशित स्थिति के कारण उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है, जिससे उनकी आय प्रभावित होगी। उन्होंने बताया कि अल नीनो के कारण सामान्य से कम वर्षा की संभावना की जानकारी उन्हें सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से मिली थी, जिसके बाद उन्होंने कम पानी वाली खेती की तकनीक अपनाई। लेकिन तकनीकी जानकारी के अभाव में मशीन संचालन की गलती ने उन्हें बड़ा नुकसान पहुंचाया है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि ‘जीरो टिलेज’ मशीन चलाने वाले चालकों को उचित प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो और किसानों को अनावश्यक नुकसान से बचाया जा सके।









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