Darbhanga News: बिहार के दरभंगा जिले में स्थित कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय का पूरा परिवार इन दिनों शोक में डूबा है। विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग में फाईन आर्ट विषय के कुशल सहायक प्राध्यापक डॉ. गोपाल कुमार महतो का अचानक निधन हो गया है।
उनके असामयिक निधन से विश्वविद्यालय परिसर और छात्रों के बीच गहरा दुख है। डॉ. महतो 55 वर्ष के थे और स्थानीय अलीनगर के सुन्दरपुर निवासी थे। उन्होंने 13 जून 2018 को विश्वविद्यालय में योगदान दिया था और 21 सितम्बर की रात उन्होंने अंतिम सांस ली।
पीआरओ डॉ. निशिकांत ने इस दुखद खबर की जानकारी देते हुए बताया कि डॉ. महतो की फाईन आर्ट विषय पर बहुत मजबूत पकड़ थी। शिक्षा शास्त्र के छात्र उन्हें अत्यधिक सम्मान देते थे। पिछले आठ वर्षों से वे लगातार विभाग में अध्यापन कार्य पूरी लगन से कर रहे थे।
छात्रों के बीच लोकप्रिय थे डॉ. गोपाल महतो
डॉ. गोपाल कुमार महतो अपने मृदुभाषी स्वभाव और छात्र-हितैषी व्यवहार के कारण छात्रों और सहकर्मियों के बीच काफी लोकप्रिय थे। उनकी शिक्षण शैली और विषय पर उनकी गहरी समझ ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दिलाई थी। उनके निधन से कला और शिक्षाशास्त्र के क्षेत्र में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है, जिसे भर पाना मुश्किल होगा।
कुलपति की अध्यक्षता में शोक सभा
डॉ. महतो के निधन पर बुधवार को कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पांडेय की अध्यक्षता में शिक्षा शास्त्र विभाग में एक शोक सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों ने भाग लिया। शोक प्रस्ताव पढ़ते हुए शिक्षा शास्त्र विभाग के निदेशक डॉ. घनश्याम मिश्र ने डॉ. महतो को ‘अत्यन्त सौम्य, मृदुभाषी, छात्रवत्सल तथा समाजोपयोगी व्यक्ति’ बताया।
उनके आकस्मिक निधन से विभाग एवं विश्वविद्यालय को काफी क्षति पहुँची है।
मृतात्मा की शांति के लिए शोक सभा में दो मिनट का मौन धारण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर डीन प्रो. पुरेन्द्र वारिक, एफ ए इंद्र कुमार, सीसीडीसी डॉ. शिवलोचन झा, कुलसचिव डॉ. दिनेश झा, एफओ डॉ. पवन कुमार झा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. निहार रंजन सिंह, ओएसडी डॉ. रामसेवक झा और वित्त समिति सदस्य पंकज मोहन झा समेत विभाग के सभी छात्र एवं शिक्षक उपस्थित थे। डॉ. महतो का जाना विश्वविद्यालय समुदाय के लिए एक अपूरणीय क्षति है।








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