Bihar Cabinet: बुधवार को मुख्यमंत्री बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में कई बड़े और जनहितैषी फैसलों पर मुहर लगी है। इन निर्णयों से शिक्षा, पशुपालन और उद्योग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में राज्य के विकास को नई गति मिलेगी। कैबिनेट ने बेगूसराय और पटना में दो नए विश्वविद्यालयों की स्थापना को मंजूरी दी है, वहीं पशुपालकों के लिए एक बड़ी राहत योजना भी शुरू की गई है।
बेगूसराय में राष्ट्रकवि दिनकर के नाम पर विश्वविद्यालय, पटना में मां सीता महिला विश्वविद्यालय
बिहार कैबिनेट ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती के अवसर पर बेगूसराय में ‘रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय’ की स्थापना को स्वीकृति दी है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना और कर्मचारियों के वेतन आदि पर होने वाले खर्च के लिए 15 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि यह पहल दिनकर की साहित्यिक और राष्ट्रचेतना की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगी।
‘दिनकर की साहित्यिक और राष्ट्रचेतना की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है।’
इसी क्रम में कैबिनेट ने पटना में ‘मां सीता महिला विश्वविद्यालय’ की स्थापना को भी हरी झंडी दी है। महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किए जा रहे इस विश्वविद्यालय के लिए भी पदाधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन संबंधी खर्चों की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है, जिससे राज्य में महिला शिक्षा के लिए एक अलग और समर्पित संस्थान का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
पशुपालकों को बड़ी राहत: बैंक लोन पर 100% ब्याज सब्सिडी
सरकार ने पशुपालकों के हित में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए ‘मुख्यमंत्री गो-धन विकास ऋण योजना’ को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत पशुपालकों को बैंक से लिए गए ऋण के ब्याज पर 100 फीसदी की सब्सिडी मिलेगी। इसका सीधा मतलब है कि लाभुकों को केवल मूलधन ही चुकाना होगा, जिससे उन पर वित्तीय बोझ काफी कम हो जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए सरकार ने 1,600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को स्वीकृति दी है।
इसके अतिरिक्त, कोसी क्षेत्र में डेयरी उद्योग को मजबूत करने के लिए आठ नई परियोजनाओं को भी मंजूरी मिली है। इन परियोजनाओं के तहत 500 नई दुग्ध सहकारी समितियां और आधुनिक डेयरी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इन महत्वपूर्ण डेयरी विकास योजनाओं के लिए 126.07 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जो क्षेत्र में दुग्ध उत्पादन और पशुपालकों की आय बढ़ाने में सहायक होगी।
नवादा में फिर शुरू होगा चीनी उद्योग, हजारों किसानों को फायदा
कैबिनेट ने नवादा जिले के वारिसलीगंज में एक नई चीनी मिल की स्थापना को भी मंजूरी दी है। यह परियोजना 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का प्रस्ताव है, जिससे न केवल नवादा बल्कि नालंदा, शेखपुरा और जमुई जिलों के गन्ना किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा। यह चीनी मिल इन क्षेत्रों के किसानों को अपनी उपज के लिए एक स्थायी बाजार और प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध कराएगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
सम्राट कैबिनेट के इन फैसलों से यह स्पष्ट है कि सरकार शिक्षा, कृषि और उद्योग के माध्यम से राज्य के समग्र विकास पर केंद्रित है। नए विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करेंगे, गो-धन योजना पशुपालकों को सशक्त बनाएगी और चीनी मिल की स्थापना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।







