Jale Education: बिहार के जाले स्थित महाकवि कालिदास सूर्यदेव महाविद्यालय, त्रिमुहान-चंदौना ने शनिवार को अपना 59वां स्थापना दिवस समारोह बड़े उत्साह के साथ मनाया। इस अवसर पर विधायक जीवेश कुमार ने छात्रों को शिक्षा के साथ कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ सिद्धार्थ शंकर सिंह ने की, जिसमें विभिन्न वक्ताओं ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया।
नैतिक शिक्षा के बिना अधूरा है विज्ञान का ज्ञान
समारोह को संबोधित करते हुए डॉ कामेश्वर पासवान ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज के समय में मॉडल साइंस की पढ़ाई पर अत्यधिक जोर दिया जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही नैतिक शिक्षा को भी उतना ही महत्व देना अत्यंत आवश्यक है। डॉ पासवान ने स्पष्ट किया कि केवल विज्ञान की शिक्षा से समाज का समुचित और संतुलित विकास संभव नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों के विकास की अनिवार्यता पर बल दिया, ताकि वे समाज के जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बन सकें।
‘कलम युग’ में शिक्षण संस्थानों की मजबूती जरूरी
प्राचार्य डॉ सिद्धार्थ शंकर सिंह ने अपने अध्यक्षीय भाषण में वर्तमान दौर को ‘कलम युग’ की संज्ञा दी। उन्होंने इस ‘कलम युग’ को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने के लिए शिक्षण संस्थानों को लगातार सुदृढ़ बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ सिंह ने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने छात्रों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करने में शिक्षण संस्थानों की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला।
कौशल विकास से ही मिलेगी आत्मनिर्भरता की राह
विधायक जीवेश कुमार ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा, ‘पढ़ाई करने की कोई निर्धारित उम्र सीमा नहीं होती। वर्तमान दौर कौशल विकास का युग है। विद्यार्थी जब हुनरमंद बनेंगे और अपने कौशल को निखारेंगे, तभी वे आत्मनिर्भर हो सकेंगे।’ उन्होंने सभी छात्रों से आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा के साथ-साथ विभिन्न कौशलों को विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दें, ताकि वे सशक्त और सफल बन सकें।
समारोह का संचालन डॉ ज्योतिन्द्र कुमार ने किया। इस 59वें स्थापना दिवस समारोह में शिक्षाविदों और जनप्रतिनिधियों ने मिलकर छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षा, नैतिक मूल्यों और कौशल विकास के महत्व पर एक सशक्त संदेश दिया। यह संदेश विद्यार्थियों को न केवल व्यक्तिगत सफलता की ओर प्रेरित करेगा, बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए भी तैयार करेगा।





