Bihar Politics: बिहार की राजनीति में इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विरासत को लेकर एनडीए के भीतर ही घमासान छिड़ गया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई थी। इसके बाद नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेता उन पर भड़क गए हैं। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा को अपना कुनबा संभालने की नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें दिन में सपने नहीं देखने चाहिए।
जदयू नेता उमेश सिंह कुशवाहा ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की। इसमें उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा का नाम लिए बिना तीखा हमला किया। उन्होंने कहा, ‘चादर जितनी हो, पांव उतने ही फैलाने चाहिए। लेकिन कुछ अतिमहत्वाकांक्षी लोगों की आदत होती है कि खाली बैठे-बैठे ख्याली पुलाव पकाने और कभी पूरे ना होने वाले दिवास्वप्न देखने की।’ उन्होंने आगे जोड़ा, ‘ऐसे महानुभावों को हमारी सलाह है कि जदयू की चिंता छोड़कर पहले अपने कुनबे की चिंता करें। क्योंकि आपका कुनबा तो पंचर वाहन की तरह समय-समय पर अपना संतुलन खोता रहता है।’
जदयू प्रदेश अध्यक्ष ने उपेंद्र कुशवाहा पर तंज कसते हुए यह भी दावा किया कि उनकी असल बेचैनी की वजह कुछ और है। उमेश सिंह कुशवाहा ने स्पष्ट कहा, ‘नीतीश के बेटे निशांत कुमार बिहार का भविष्य हैं। उनकी बढ़ती लोकप्रियता और जनस्वीकार्यता कुछ लोगों को हजम नहीं हो रही है।’
नीतीश की विरासत पर जंग! JDU ने उपेंद्र कुशवाहा को बताया ‘पंचर वाहन’, बिफर गए RLM चीफ
Bihar Politics: बिहार की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विरासत को लेकर एनडीए के भीतर ही घमासान छिड़ गया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार की विरासत संभालने की इच्छा जताई थी, जिस पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने रालोमो प्रमुख को ‘पंचर वाहन’ बताते हुए अपना कुनबा संभालने की नसीहत दे डाली है।
‘पंचर वाहन’ कहकर JDU ने साधा निशाना, निशांत कुमार का भी जिक्र
जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने उपेंद्र कुशवाहा के बयान पर कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख का नाम लिए बिना ही उन पर निशाना साधा। उमेश सिंह कुशवाहा ने अतिमहत्वाकांक्षी लोगों को ‘ख्याली पुलाव’ पकाने से बचने की सलाह दी।
उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा, “चादर जितनी हो, पांव उतने ही फैलाने चाहिए। लेकिन कुछ अतिमहत्वाकांक्षी लोगों की आदत होती है कि खाली बैठे-बैठे ख्याली पुलाव पकाने और कभी पूरे ना होने वाले दिवास्वप्न देखने की। ऐसे महानुभावों को हमारी सलाह है कि जदयू की चिंता छोड़कर पहले अपने कुनबे की चिंता करें। क्योंकि आपका कुनबा तो पंचर वाहन की तरह समय-समय पर अपना संतुलन खोता रहता है।”
जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने तंज कसते हुए यह भी दावा किया कि उनकी असल बेचैनी की वजह कुछ और है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार बिहार का भविष्य हैं और उनकी बढ़ती लोकप्रियता कुछ लोगों को हजम नहीं हो रही है।
उपेंद्र कुशवाहा का क्या था दावा?
दरअसल, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने नालंद जिले के राजगीर में आयोजित चिंतन शिविर में एक बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार ने बिहार की राजनीति से फुर्सत ले ली है। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में बेहतरीन सेवा दी है। कुशवाहा ने इस बात पर चिंता जताई थी कि बिहार और देश की बड़ी जमात में यह सवाल है कि नीतीश कुमार की विरासत आगे कैसे बढ़ेगी।
उपेंद्र कुशवाहा ने दावा किया कि नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाने का दायित्व राष्ट्रीय लोक मोर्चा को संभालना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार की एक बड़ी जमात भी ऐसा ही चाहती है। कुशवाहा ने यह भी स्वीकार किया कि इसमें वे कितना सफल होंगे, यह नहीं जानते, लेकिन वे नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं।
नीतीश की विरासत का असली हकदार कौन? बिहार की सियासत में अचानक क्यों मचा हंगामा
Bihar Politics: बिहार की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को लेकर एक नई हलचल देखी जा रही है। इस हलचल की शुरुआत उपेंद्र कुशवाहा के उस दावे से हुई है, जिसमें उन्होंने खुद को नीतीश कुमार की विरासत का हकदार बताया है। इस बयान के बाद से ही राज्य की सियासत गरमा गई है और राजनीतिक गलियारों में उत्तराधिकार को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
नीतीश की विरासत पर उपेंद्र कुशवाहा का दावा
जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से अलग होकर नई पार्टी बनाने वाले उपेंद्र कुशवाहा ने हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत पर अपना दावा पेश किया है। कुशवाहा के इस दावे ने न सिर्फ जेडीयू के भीतर बल्कि पूरे राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में एक नई बहस को जन्म दिया है। उनके बयान के बाद से यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह सिर्फ एक बयानबाजी है या फिर नीतीश कुमार के बाद की राजनीति के लिए अभी से जमीन तैयार की जा रही है।
जेडीयू ने निशांत कुमार का नाम उछाला
हालांकि, उपेंद्र कुशवाहा के इस दावे के तुरंत बाद, सत्ताधारी दल जेडीयू ने नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी के तौर पर उनके बेटे निशांत कुमार का नाम आगे कर दिया। जेडीयू के इस कदम ने राजनीतिक विश्लेषकों और आम जनता के बीच सस्पेंस और बढ़ा दिया है। निशांत कुमार का नाम सामने आने के बाद अब यह बहस और तेज हो गई है कि आखिर नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत का असली हकदार कौन होगा और भविष्य में बिहार की राजनीति किस दिशा में जाएगी।
बीजेपी ने उत्तराधिकार की बहस को टाला
इस पूरे मामले पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है। बीजेपी नेताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति में होने का हवाला देते हुए उत्तराधिकार की इस बहस को टालने की कोशिश की है। पटना के राजनीतिक पंडितों का मानना है कि बीजेपी इस विवाद से दूर रहकर स्थिति पर नजर बनाए हुए है, ताकि भविष्य में बनने वाले समीकरणों में वह अपनी भूमिका तय कर सके। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह राजनीतिक हलचल आने वाले समय में क्या मोड़ लेती है।
नीतीश-कुशवाहा का पुराना सियासी इतिहास
राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच राजनीतिक रिश्ते कई उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। 90 के दशक में जब नीतीश कुमार ने लव-कुश समीकरण को साधते हुए समता पार्टी की नींव रखी थी, तब उपेंद्र कुशवाहा उनके साथ मजबूती से खड़े थे। नीतीश खुद कुर्मी समाज से और कुशवाहा, कोइरी समाज से प्रभावशाली नेता बनकर उभरे थे।
हालांकि, राजनीतिक मतभेदों के चलते उपेंद्र कुशवाहा ने जदयू से अलग होकर राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) का गठन किया। साल 2014 में भाजपा से गठबंधन कर उपेंद्र कुशवाहा नरेंद्र मोदी कैबिनेट में मंत्री भी बने थे। 2021 में दोनों नेताओं के रिश्ते फिर सुधरे और रालोसपा का जदयू में विलय हो गया। तब उपेंद्र कुशवाहा को जदयू संसदीय बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया था। लेकिन, 2023 में एक बार फिर उनके रिश्तों में खटास आई और उपेंद्र कुशवाहा ने जदयू से अलग होकर राष्ट्रीय लोक मोर्चा का गठन कर लिया। वर्तमान में जदयू और रालोमो दोनों ही एनडीए का हिस्सा हैं, और नीतीश कुमार की विरासत को लेकर यह घमासान सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
उपेंद्र कुशवाहा का दावा: नीतीश की विरासत हम संभालेंगे
इससे पहले, नालंदा जिले के राजगीर में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार ने बिहार की राजनीति से एक तरह से फुर्सत ले ली है। कुशवाहा ने नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री के रूप में बेहतर सेवा देने की बात स्वीकार करते हुए यह भी जोड़ा कि बिहार और देश की बड़ी जमात में इस बात की चिंता है कि नीतीश की विरासत आगे कैसे बढ़ेगी।
रालोमो अध्यक्ष ने दावा किया कि नीतीश की विरासत को आगे बढ़ाने का दावा कई लोग करेंगे। मगर आज की तारीख में राष्ट्रीय लोक मोर्चा का मानना है कि उसे यह दायित्व संभालना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार की एक बड़ी जमात भी यही चाहती है। उपेंद्र कुशवाहा ने यह भी कहा कि वह नहीं जानते कि इसमें वे कितना सफल होंगे, मगर वे नीतीश की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
कुशवाहा का लंबा राजनीतिक सफर: उतार-चढ़ाव भरे रिश्ते
राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच राजनीतिक रिश्ते हमेशा उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। 90 के दशक में जब नीतीश कुमार ने बिहार में लव-कुश समीकरण को साधते हुए समता पार्टी की नींव रखी थी, तब उपेंद्र कुशवाहा उनके साथ मजबूती से खड़े थे। नीतीश खुद ‘लव’ (कुर्मी) और कुशवाहा ‘कुश’ (कोइरी) के प्रभावशाली नेता बनकर उभरे थे।
हालांकि, राजनीतिक मतभेदों के चलते उपेंद्र कुशवाहा ने जदयू से अलग होकर राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) का गठन किया। साल 2014 में भाजपा के साथ गठबंधन कर उपेंद्र कुशवाहा रालोसपा से नरेंद्र मोदी कैबिनेट में मंत्री भी बने। साल 2021 में नीतीश और कुशवाहा के रिश्ते फिर से सुधरे और रालोसपा का जदयू में विलय हो गया, जिसके बाद उपेंद्र कुशवाहा को जदयू संसदीय बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया।
मगर, 2023 में दोनों के रिश्तों में एक बार फिर खटास आ गई। उपेंद्र कुशवाहा ने जदयू से अलग होकर अपनी नई पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा का गठन किया। वर्तमान में जदयू और रालोमो दोनों ही एनडीए का हिस्सा हैं। नीतीश की विरासत को लेकर दोनों पार्टियों के बीच छिड़े इस घमासान ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में चर्चा को और तेज कर दिया है।







