LNMU Research: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (दरभंगा) में 455 शोधार्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में हुई स्नातकोत्तर शोध परिषद् (पीजीआरसी) की बैठक में कुल 455 शोध-प्रारूपों को गहन विचार-विमर्श के बाद स्वीकृति मिल गई है। इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद, शोधार्थी अब औपचारिक रूप से अपने शोध कार्य को आगे बढ़ा सकेंगे।
महात्मा गांधी सदन में आयोजित इस बैठक में विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, सभी विभागाध्यक्ष, विषय-विशेषज्ञ और वरीय प्राध्यापक मौजूद रहे। कुल स्वीकृत शोध-प्रारूपों में 450 पैट-2023 (PAT-2023) के और 5 पूर्ववर्ती शोधार्थियों के प्रस्ताव शामिल हैं।
किस संकाय में कितने शोध-प्रारूप हुए स्वीकृत?
उप परीक्षा नियंत्रक (शोध) डॉ सुरेश पासवान ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि छह संकायों में कुल 455 शोध-प्रारूपों को मंजूरी मिली है। यह स्वीकृति विभिन्न विषयों में शोध करने वाले छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर है। नीचे दी गई तालिका में संकायवार और विषयवार स्वीकृत शोध-प्रारूपों की संख्या देखी जा सकती है:






| संकाय का नाम | विषय | स्वीकृत शोध-प्रारूपों की संख्या |
|---|---|---|
| मानविकी संकाय (कुल: 156) | अंग्रेजी | 61 |
| हिन्दी | 46 | |
| मैथिली | 21 | |
| संस्कृत | 07 | |
| दर्शनशास्त्र | 11 | |
| उर्दू | 10 | |
| सामाजिक विज्ञान संकाय (कुल: 143) | इतिहास | 14 |
| राजनीति विज्ञान | 27 | |
| समाजशास्त्र | 14 | |
| अर्थशास्त्र | 23 | |
| भूगोल | 15 | |
| गृह विज्ञान | 08 | |
| मनोविज्ञान | 42 | |
| विज्ञान संकाय (कुल: 93) | रसायनशास्त्र | 20 |
| भौतिकी | 12 | |
| वनस्पति विज्ञान | 14 | |
| जन्तु विज्ञान | 26 | |
| गणित | 21 | |
| वाणिज्य संकाय (कुल: 15) | कॉमर्स | 12 |
| मैनेजमेंट | 03 | |
| शिक्षा संकाय | शिक्षा | 36 |
| ललित कला संकाय | म्यूजिक एवं ड्रामा | 07 |
| पूर्ववर्ती शोधार्थी | – | 05 |
यह विस्तृत स्वीकृति दर्शाती है कि विश्वविद्यालय विभिन्न विषयों में शोध को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकेगी।
LNMU रिसर्च: अब शोधार्थियों को क्या करना होगा?
इस स्वीकृति के बाद, सभी शोधार्थी विश्वविद्यालय से आधिकारिक पत्र प्राप्त होने का इंतजार करेंगे। पत्र मिलने के बाद, वे अपने स्वीकृत शोध-प्रारूप के अनुसार, अपने-अपने शोध-पर्यवेक्षकों के मार्गदर्शन में अपने शोध-कार्य को औपचारिक रूप से शुरू कर पाएंगे। यह कदम शोधार्थियों को अपने अकादमिक लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करेगा।कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी ने इस अवसर पर सभी संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों और विषय-विशेषज्ञों के योगदान की सराहना की, जिन्होंने शोध-प्रारूपों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह निर्णय ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में शोध के माहौल को और मजबूत करेगा।








