Bihar Pind Daan: बिहार के गया जी में एक बार फिर विदेशी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था देखने को मिली है। रूस से आए 20 श्रद्धालुओं का एक दल यहां पितरों की मोक्ष स्थली देवघाट पर पिंडदान कर्मकांड कर रहा है। यह नजारा सनातन परंपरा के प्रति बढ़ती वैश्विक रुचि को दर्शाता है, जहां दूर देशों से भक्त अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए भारत की इस पवित्र भूमि पर पहुंचते हैं।
इस्कॉन मंदिर के संयोजन और अरविंद कटारियार के निर्देशन में यह धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो रहा है। मंदिर के प्रबंधक जगदीश श्याम दास ने बताया कि कुल 20 रूसी श्रद्धालु गया जी पहुंचे हैं। इनमें से 15 श्रद्धालु प्रत्यक्ष रूप से पिंडदान कर रहे हैं, जबकि 5 अन्य सदस्य इस पवित्र कार्य में सहयोग दे रहे हैं। देवघाट पर वैदिक विधि-विधान से पिंडदान करते हुए ये श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
सनातन संस्कृति की ओर खिंच रहे विदेशी
यह पहली बार नहीं है जब विदेशी धरती से श्रद्धालु गया जी पहुंचे हैं। इससे पहले भी फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे कई अन्य देशों के भक्त यहां आकर पिंडदान का कर्मकांड संपन्न कर चुके हैं। हिंदू धर्म और सनातन संस्कृति के प्रति दुनिया भर में बढ़ती श्रद्धा लगातार दिखाई दे रही है, जो इन प्राचीन अनुष्ठानों के वैश्विक महत्व को रेखांकित करती है।
इस्कॉन से जुड़कर समझी पिंडदान की महत्ता
इन विदेशी श्रद्धालुओं का मानना है कि सनातन संस्कृति और हिंदू धर्म का विश्व में एक विशेष स्थान है। उन्होंने बताया कि इस्कॉन मंदिर से जुड़ने के बाद उन्हें इस प्राचीन परंपरा की अहमियत समझ में आई। इसी प्रेरणा से वे अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए गया जी में पिंडदान कर रहे हैं। श्रद्धालुओं के अनुसार, इस धार्मिक कर्मकांड में भाग लेने से उन्हें अपार मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुष्टि का अनुभव हो रहा है।
गया जी में विदेशी श्रद्धालुओं का यह आगमन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सनातन धर्म के वैश्विक प्रसार और इसकी शाश्वत शिक्षाओं की प्रासंगिकता को भी उजागर करता है। यह दिखाता है कि कैसे प्राचीन भारतीय परंपराएं आज भी विश्व भर के लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं।







