Bhojpur News: भोजपुर में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर अब कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। 17 जून को बिलौटी गांव में हुए इस कथित एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग सीधे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है, जहां 30 जून को इस पर सुनवाई होगी। सोमवार को जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ इस जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी, जिसमें पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और सीबीआई जांच की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 30 जून को होगी। अधिवक्ता विशाल तिवारी ने यह जनहित याचिका दायर की है, जिसमें घटना की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की गई है। याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि जांच प्रक्रिया की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में गठित एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति द्वारा की जाए। इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ता ने एनकाउंटर में शामिल पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ कानून के अनुसार एफआईआर दर्ज करने की अपील की है।






राष्ट्रपति सचिवालय का अहम हस्तक्षेप
इस मामले में एक नया मोड़ तब आया, जब राष्ट्रपति सचिवालय ने भी घटना का संज्ञान लिया। जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह द्वारा 24 जून को भेजे गए ईमेल पर कार्रवाई करते हुए सचिवालय ने बिहार के मुख्य सचिव को जांच करने और उसकी रिपोर्ट याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इस हस्तक्षेप से यह मामला अब राज्य सरकार के साथ-साथ संवैधानिक संस्थाओं के स्तर पर भी चर्चा का केंद्र बन गया है, जिससे निष्पक्ष जांच की उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं।
राष्ट्रपति सचिवालय ने बिहार के मुख्य सचिव को भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिवार की मांगें
भरत तिवारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी इस मामले में अहम बिंदु बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, उनके शरीर में कुल पांच गोलियां लगी थीं। इनमें दो गोलियां बाईं जांघ में, दो दाईं जांघ में और एक गोली बाएं पैर के मध्य हिस्से में लगी बताई गई है। परिवार घटना के बाद से लगातार निष्पक्ष जांच और सीबीआई जांच की मांग कर रहा है। परिवार ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं, जिनमें बिलौटी गांव में भरत तिवारी की प्रतिमा स्थापित करना, उन्हें शहीद का दर्जा देना, परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और गांव का नाम उनके नाम पर रखना शामिल है। साथ ही परिवार ने घटना में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग दोहराई है।
तेरहवीं पर हजारों लोगों के जुटने की तैयारी
इस बीच, भरत तिवारी की तेरहवीं भी आयोजित की जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना है। परिवार के अनुसार, कार्यक्रम में लगभग 25 हजार लोगों के पहुंचने की उम्मीद है, जिसके लिए गांव और आसपास के खेतों में बड़े टेंट लगाए गए हैं। आगंतुकों के बैठने और भोजन की भी व्यापक व्यवस्था की गई है। इस आयोजन को देखते हुए स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर तैयारियां की गई हैं, जो इस मामले की गंभीरता और जनभावना को दर्शाती हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और राष्ट्रपति सचिवालय के हस्तक्षेप से यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया है। आगामी दिनों में होने वाली तेरहवीं और परिवार की मांगों के बीच, सभी की निगाहें अब जांच के नतीजों और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं। बिहार सरकार ने पहले ही इस प्रकरण की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।








