Bihar Census: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बिहार समेत पूरे देश के लिए जनगणना (संशोधन) नियम- 2026 को अधिसूचित कर दिया है। इस अहम बदलाव के बाद अब जनगणना- 1990 के नियमों में संशोधन हुआ है। सरकार ने गणनाकर्ताओं की श्रेणियों को काफी बढ़ा दिया है, जिससे आगामी जनगणना प्रक्रिया में व्यापक भागीदारी संभव हो सकेगी।
अब ये कर्मचारी भी बन सकेंगे गणनाकर्ता
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जनगणना अधिनियम- 1948 की धारा 18(1) के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह अधिसूचना जारी की है। संशोधित नियमों के अनुसार, अब सरकारी और निजी स्कूल के कर्मचारी, बैंकों के क्लर्क और सार्वजनिक उपक्रमों के अधिकारी भी गणनाकर्ता के रूप में अपनी सेवाएं दे सकेंगे। राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन को किसी भी उपयुक्त व्यक्ति को गणनाकर्ता नियुक्त करने का अधिकार होगा।
नई सूची में शामिल किए गए हैं:
- सरकारी शिक्षण संस्थान के शिक्षक
- स्थानीय प्राधिकरण शिक्षण संस्थान के शिक्षक
- सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान के शिक्षक
- गैर-सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थान के शिक्षक
- समितियों या ट्रस्टों द्वारा संचालित संस्थानों के शिक्षक
- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के क्लर्क या अधिकारी
- वैधानिक निकायों के क्लर्क या अधिकारी
- बैंकों के क्लर्क या अधिकारी
- कंपनियों के क्लर्क या अधिकारी
- अन्य संस्थानों, सोसायटियों और ट्रस्टों के क्लर्क या अधिकारी
यह फैसला शुक्रवार को राजपत्र अधिसूचना जारी होने के तुरंत बाद लागू हो गया है।
डिजिटल होगी देश की आठवीं जनगणना
देश की आठवीं जनगणना, जो जनगणना 2027 के नाम से जानी जाएगी, 1 अप्रैल 2026 को शुरू हुई है। यह पहली बार है जब देशभर में जनगणना पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से की जा रही है। जनगणना प्रक्रिया को दो चरणों में पूरा किया जाएगा।
पहले चरण में अप्रैल से सितंबर तक आवास, सुविधाओं और घरेलू संपत्ति से जुड़े डेटा को अपडेट किया गया है। वहीं, दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा। इस चरण में जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, शिक्षा, प्रवासन और प्रजनन संबंधी कारकों को शामिल किया जाएगा। इसी चरण में जातिगत जनगणना भी संपन्न होगी, जो विभिन्न सामाजिक योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
16 भाषाओं में मोबाइल ऐप और 11,718 करोड़ का बजट
डिजिटल जनगणना को सुविधाजनक बनाने के लिए एक मोबाइल ऐप और वेबसाइट भी लॉन्च की गई है, जो 16 भाषाओं में उपलब्ध है। इससे कोई भी नागरिक घर बैठे ‘स्व-गणना’ का हिस्सा बन सकता है और अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकता है। केंद्र सरकार ने इस वृहद जनगणना प्रक्रिया के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। इसमें देश के 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के 7,000 से अधिक उप-जिले शामिल होंगे, जिससे यह देश का सबसे बड़ा डेटा संग्रह अभियान बन जाएगा।







