Nalanda Police: नालंदा में उत्पाद विभाग के सिपाही अजीत कुमार की मौत का मामला अब एक सनसनीखेज मोड़ पर पहुंच गया है। जिस घटना को पहले शराब तस्करों की गोलीबारी बताया गया था, नालंदा पुलिस की प्रारंभिक जांच में वह कहानी झूठी निकली है। यह मामला अब आपसी संबंधों और गहरी साजिश की ओर इशारा कर रहा है।
नालंदा के एसपी हृदय कांत ने बिहारशरीफ में एक प्रेस वार्ता के दौरान महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी दी। पुलिस जांच के अनुसार, शराब तस्करों का पीछा करते समय एक साथी होमगार्ड जवान की राइफल से चली गोली अजीत कुमार के सिर में लगी, जिससे उनकी मौत हो गई। आरोप है कि घटना के बाद अधिकारियों को गुमराह करने और साक्ष्य मिटाने के लिए तस्करों की गोलीबारी में सिपाही के घायल होने की मनगढ़ंत कहानी बनाई गई। इस मामले में एक महिला दारोगा पुष्पा कुमारी, दो होमगार्ड जवान, एक अन्य सिपाही अनूप और वाहन चालक सहित कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
झूठी कहानी गढ़ने का आरोप, 5 लोग गिरफ्तार
पुलिस की जांच में सामने आया है कि महिला दारोगा और मृतक सिपाही अजीत कुमार के बीच दोस्ती थी। साथ ही, जिस होमगार्ड जवान की राइफल से गोली चली, उसकी भी महिला दारोगा से दोस्ती बताई जा रही है। इन चर्चाओं ने मामले को एक सुनियोजित हत्या की साजिश की ओर मोड़ दिया है। हालांकि, एसपी ने इन अटकलों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले के सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है।
पुलिस अधीक्षक हृदय कांत ने बताया कि 14 अक्टूबर की रात करीब साढ़े दस बजे उत्पाद विभाग की टीम शराब लदी पिकअप वैन का पीछा कर रही थी। इस टीम में स्थानीय जिला पुलिस शामिल नहीं थी। वाहनों की इस दौड़ में सबसे आगे तस्करों की पिकअप वैन थी, उसके पीछे सिपाही अजीत कुमार जिस काली स्कॉर्पियो में सवार थे, वह चल रही थी, और सबसे अंत में महिला दारोगा पुष्पा कुमारी की गाड़ी थी।
भागती गाड़ी को रोकने के लिए एक होमगार्ड जवान ने अपनी राइफल से गोली चलाई। गोली तस्करों की गाड़ी में लगने के बजाय आगे चल रही दूसरी गाड़ी (स्कॉर्पियो) में जा लगी, जिससे अजीत कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए।
अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश, पटना से बरामद हुई गोली लगी गाड़ी
गोली लगने के बाद अजीत कुमार को पावापुरी स्थित विम्स में भर्ती कराया गया, जहां से गंभीर हालत में उन्हें पटना रेफर कर दिया गया। आरोप है कि टीम ने तत्काल स्थानीय थाने या वरीय अधिकारियों को घटना की सूचना नहीं दी। बल्कि, जिले की सीमा से बाहर निकलने के बाद ही तस्करों की गोलीबारी में सिपाही के घायल होने की जानकारी दी गई। सुबह तक इसी झूठी कहानी के आधार पर अधिकारियों को जानकारी दी जाती रही। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि सच्चाई क्यों छिपाई गई और अधिकारियों को गुमराह करने में किन-किन लोगों की क्या भूमिका थी।
एसपी के नेतृत्व में गठित विशेष जांच दल ने टीम के सदस्यों से अलग-अलग पूछताछ की, जिसमें उनके बयानों में विरोधाभास सामने आया। जांच में यह भी पता चला कि गोली लगी गाड़ी को नालंदा पुलिस को सौंपने के बजाय पटना ले जाया गया था। पुलिस ने पटना से उस गाड़ी को बरामद किया, जिसमें गोली लगने के निशान साफ थे। इसके अलावा, गोली चलाने वाले होमगार्ड जवान की सरकारी राइफल भी जब्त कर ली गई है। पुलिस बरामद साक्ष्यों और आरोपितों के बयानों के आधार पर मामले की गहराई से जांच कर रही है।
छापेमारी के नियमों की अनदेखी, उच्चस्तरीय जांच जारी
उत्पाद अधीक्षक संजय कुमार चौधरी ने बताया कि छापेमारी से पहले स्थानीय थाने और वरीय अधिकारियों को सूचना नहीं दी गई थी। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि सक्षम पदाधिकारी की अनुमति के बिना यह कार्रवाई क्यों की गई, किन परिस्थितियों में फायरिंग का निर्देश दिया गया और घटना के बाद सच्चाई छिपाने की कोशिश क्यों की गई। शराब लदी पिकअप वैन और शराब तस्करी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए भी जांच जारी है, ताकि इस पूरे मामले की परतें खोली जा सकें।







