Bihar Crime News: बिहार में अपराध के खिलाफ पुलिस की सक्रियता देखने को मिली है। औरंगाबाद जिले में एक नाबालिग लड़की से सामूहिक दुष्कर्म की हृदयविदारक घटना सामने आई है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, झारखंड में हुई एक अन्य गैंगरेप की घटना के तीन फरार आरोपियों को भी बिहार के आरा रेलवे स्टेशन से दबोचा गया है, जो पुलिस की बड़ी सफलता मानी जा रही है।
औरंगाबाद के कुटुंबा थाना क्षेत्र में यह वारदात हुई है। आरोप है कि घर से अस्पताल पैदल जा रही एक नाबालिग लड़की को सड़क से ही तीन युवकों ने जबरन अपनी कार में बैठा लिया। इन हैवानों ने कई घंटों तक लड़की को अपने कब्जे में रखा और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। बाद में, वे लड़की को उसके घर से करीब एक किलोमीटर दूर छोड़कर फरार हो गए। घर पहुंचने के बाद पीड़िता ने अपने परिजनों को आपबीती सुनाई, जिसके बाद हड़कंप मच गया।
औरंगाबाद गैंगरेप: दो आरोपी गिरफ्तार, एक की तलाश
पीड़िता के परिजनों ने तुरंत कुटुंबा थाना पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और आरोपियों की धरपकड़ के लिए अभियान चलाया। पुलिस ने इस मामले में नामजद प्रिंस कुमार और रौशन कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। तीसरे आरोपी राजू की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। तीनों आरोपी स्थानीय क्षेत्र के ही रहने वाले बताए गए हैं।
थानाध्यक्ष इमरान आलम ने बताया, ‘मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। वरीय पुलिस अधिकारियों ने भी घटना का संज्ञान लिया है और पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है।’
झारखंड के गैंगरेप आरोपी आरा से दबोचे गए
एक अलग मामले में, झारखंड के धनबाद जिले के सुदामडीह थाना क्षेत्र के भौंरा गौररखुंटी में एक आदिवासी किशोरी से हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में भी बड़ी कार्रवाई हुई है। इस घटना के बाद से फरार चल रहे तीनों मुख्य आरोपियों को धनबाद एसएसपी के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। घटना के महज तीन दिनों के भीतर पुलिस ने दयाशंकर यादव, साजन अंसारी और रंजन साव को बिहार के आरा रेलवे स्टेशन के पास से नाटकीय ढंग से दबोचा।
सोमवार को सभी आरोपियों का मेडिकल परीक्षण कराया गया और इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस अनुसंधान में यह भी खुलासा हुआ है कि सुदामडीह थाना क्षेत्र के ही कुछ लोग आरोपियों को पुलिस की हर गतिविधि की जानकारी दे रहे थे। इन मददगारों ने ही आरोपियों को पुलिस ट्रैकिंग से बचने के लिए अपने मोबाइल फोन स्विच ऑफ करने की सलाह दी थी। दोनों ही मामलों में पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने अपराधियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है और न्याय की उम्मीद जगाई है।







