Bihar Politics: बिहार की राजनीति में अचानक गरमाहट आ गई है। पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिली हार के ठीक बाद जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस अहम भेंट ने बिहार के सियासी गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।
संसद भवन स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई इस मुलाकात के दौरान नीतीश कुमार के साथ जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह भी मौजूद थे। जमुई से संवाददाता विजय कुमार ठाकुर की रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक का समय राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।






हार का ठीकरा और JDU का दावा
इस मुलाकात के बाद संजय झा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए लिखा कि उन्हें ‘जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष, राज्यसभा सांसद तथा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद भवन स्थित उनके कार्यालय में आत्मीय मुलाकात का अवसर मिला।’ उन्होंने बताया कि इस दौरान ‘बिहार सहित पूर्वोत्तर भारत के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।’ ललन सिंह ने भी इस मुलाकात को ‘आत्मीय एवं सार्थक भेंट’ बताया।
हालांकि, इस बैठक का असली महत्व इसके पीछे की राजनीतिक पृष्ठभूमि में छिपा है। जनता दल यूनाइटेड के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी की हार का एक बड़ा कारण यह था कि पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को चुनाव प्रचार में प्रमुखता से आगे नहीं किया। इस दावे ने बीजेपी और जेडीयू के बीच गठबंधन की अंदरूनी खींचतान को उजागर कर दिया है।
जदयू विधायक अनंत सिंह ने भी बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की जीत पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, ‘अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने रहते, तो ऐसा नहीं होता। जनता नाराज है।’
मुलाकात से क्यों बढ़ी अटकलें?
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब JDU के भीतर से ही बीजेपी की हार के लिए गठबंधन की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं और इसके अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं। कुछ इसे गठबंधन में संभावित नई रणनीति के संकेत के तौर पर देख रहे हैं, जबकि अन्य इसे हार के बाद ‘डैमेज कंट्रोल’ के प्रयास के रूप में व्याख्या कर रहे हैं।
बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत ने भी बिहार की राजनीति में एक नई चुनौती पेश की है, जिसने सत्तारूढ़ गठबंधन को आत्मचिंतन पर मजबूर किया है।
आगे क्या होगा? मंथन और गिद्ध दृष्टि
अंदरखाने से मिल रही जानकारी के मुताबिक, बांकीपुर की हार के बाद बड़े नेता गहन मंथन कर रहे हैं। इस हार के कारणों और भविष्य की रणनीति पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। समीक्षक नारद मुनि सहित अन्य राजनीतिक पंडित हर गतिविधि पर गिद्ध दृष्टि बनाए हुए हैं, ताकि बिहार की राजनीति में आने वाले संभावित बदलावों को समझा जा सके। नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री मोदी की इस मुलाकात के बाद बिहार की राजनीतिक दिशा क्या होगी, यह आने वाले दिनों में और स्पष्ट होगा। रिपोर्ट: विजय कुमार ठाकुर








