Bihar Factory News: बिहार सरकार ने राज्य के निबंधित कारखानों में चल रहे ‘इंस्पेक्टर राज’ को खत्म करने की तैयारी पूरी कर ली है। एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए, सरकार ने अब अधिकारियों द्वारा बिना पूर्व सूचना के किसी भी फैक्ट्री में औचक निरीक्षण पर रोक लगा दी है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाना और भ्रष्टाचार पर प्रभावी ढंग से लगाम लगाना है।
निरीक्षण से पहले मिलेगी पूरी जानकारी
नई प्रणाली के तहत, केवल विभाग द्वारा नामित अधिकारी ही निरीक्षण कर सकेंगे। जांच करने से पहले फैक्ट्री संचालक को अधिकारी का नाम और निरीक्षण की तारीख की जानकारी 15 दिन पहले ऑनलाइन भेज दी जाएगी। इससे किसी भी तरह की मनमानी, दबाव या अवैध वसूली की आशंका समाप्त हो जाएगी, जो पहले अक्सर देखने को मिलती थी।






सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को वेब आधारित निरीक्षण प्रणाली के माध्यम से संचालित करने का फैसला किया है। कंप्यूटर द्वारा यह तय होगा कि किस अधिकारी को किस फैक्ट्री का निरीक्षण करना है। यह सुनिश्चित करेगा कि निरीक्षण प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की ‘सेटिंग’ या पक्षपात की गुंजाइश न रहे, जिससे बिहार में उद्योगों के लिए निष्पक्ष वातावरण बनेगा।
वेतन, पीएफ और सुरक्षा मानकों पर ऑनलाइन निगरानी
निरीक्षण के बाद, अधिकारी को तीन दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। यह ऑनलाइन सिस्टम कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलने, पीएफ जमा होने और फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन होने जैसी महत्वपूर्ण बातों पर भी नजर रखेगा। यदि कहीं कोई कमी पाई जाती है, तो उसे ऑनलाइन ही सुधारने का निर्देश दिया जाएगा।
श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के अनुसार, राज्य में सामाजिक सुरक्षा (बिहार) नियमावली 2026 लागू कर दी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य श्रमिकों को बेहतर सुरक्षा देना और उद्योगों को एक पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराना है। सरकार का दावा है कि इस पहल से पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी।
कामगार भी अपनी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे, जिससे सरकार सीधे निगरानी रख पाएगी कि कौन-सी फैक्ट्री श्रम कानूनों का उल्लंघन कर रही है। यह पहल न केवल फैक्ट्री मालिकों को राहत देगी बल्कि कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी।
बिहार में कारखानों की स्थिति
वर्तमान में, बिहार में कुल 7,952 निबंधित कारखाने हैं। इनमें से लगभग 2,000 कारखानों में 20 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त, 120 कारखानों को खतरनाक श्रेणी में रखा गया है, जिन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह नई ऑनलाइन प्रणाली इन सभी कारखानों में नियमों के पालन और जवाबदेही को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।








