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बिगड़ते हालात! बिहार में बाढ़ का विकराल रूप, गंगा-गंडक के बाद सोन भी उफनी, CM सम्राट का बड़ा ऐलान -इंद्रपुरी बराज के 56 गेट खुले

Bihar Flood: पूरे बिहार में बाढ़ की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। गंगा, गंडक और सोन नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे कई इलाकों में पानी फैल गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद बाढ़ की स्थिति स्वीकार करते हुए प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

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Bihar Flood: बिहार में बाढ़ का खतरा अब और विकराल रूप ले चुका है। गंगा और गंडक नदियों के बाद अब सोन नदी भी उफान पर है, जिससे राज्य के कई इलाकों में जलजमाव की स्थिति गंभीर हो गई है। मुख्यमंत्री बिहार सम्राट चौधरी ने खुद प्रदेश में बाढ़ की स्थिति को स्वीकार करते हुए प्रशासन को तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

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सोन नदी का जलप्रवाह सवा पांच लाख क्यूसेक तक पहुंच गया, जो इस साल का अब तक का सबसे अधिक स्तर है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इंद्रपुरी बराज के कुल 69 गेट में से 56 गेट खोल दिए गए हैं। राज्य में 10 अलग-अलग स्थानों पर प्रमुख नदियां लाल निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे दक्षिण और पूर्वी बिहार के कई निचले इलाकों में पानी तेजी से फैलने लगा है।

बिहार में हाहाकार! सोन, गंगा, गंडक नदियां उफान पर, 31 जिलों में बाढ़ का खतरा, जानें क्या करें?

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Bihar Flood: मानसून के आखिरी दौर में एक बार फिर बिहार में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। राज्य की प्रमुख नदियां उफान पर हैं, जिससे तटवर्ती इलाकों में चिंता बढ़ गई है। गंगा और गंडक नदियां कई दिनों से खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, वहीं अब सोन नदी में भी जलस्तर तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही कोसी और बूढ़ी गंडक के जलस्तर में बढ़ोतरी से नदी किनारे बसे गांवों में कटाव तेज होने की खबरें आ रही हैं।

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सोन नदी में इस साल का सर्वाधिक जलप्रवाह

मंगलवार को सोन नदी का जलप्रवाह पांच लाख पच्चीस हजार क्यूसेक से अधिक दर्ज किया गया, जो इस साल का सबसे अधिक आंकड़ा है। रोहतास स्थित इंद्रपुरी बराज पर बढ़ते दबाव के कारण 69 गेटों में से 56 गेट खोल दिए गए हैं। बाणसागर बांध से छोड़ा गया पानी भी सोन नदी में पहुंचने से जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।

सोन नदी में इस साल का सर्वाधिक जलप्रवाह दर्ज किया गया है, जिससे रोहतास और औरंगाबाद के तटवर्ती गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।

रोहतास, औरंगाबाद और आसपास के क्षेत्रों में सोन नदी के किनारे बसे गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। कुछ जगहों पर ग्रामीण सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। प्रशासन ने लोगों को नदी किनारे न जाने, नाव चलाने और तैराकी से बचने की सलाह दी है।

बिहार में हाई अलर्ट और भारी बारिश की चेतावनी

जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन ने सभी प्रमुख नदियों के तटबंधों पर निगरानी बढ़ा दी है। रेलवे लाइन के आसपास भी विशेष चौकसी बरती जा रही है। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सारण, गोपालगंज, भागलपुर, खगड़िया और पटना सहित कई जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। निचले और दियारा इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

मौसम विभाग ने पटना समेत 31 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिससे स्थिति और गंभीर होने की आशंका है। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।

बाढ़ से जूझ रहा बिहार: नदियां उफान पर, कई इलाकों में फैला पानी

मोतिहारी में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में बाढ़ की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंडक, कोसी, बागमती और गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसके कारण कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार बाढ़ और जल प्रबंधन को लेकर निरंतर कार्य कर रही है, और प्रभावित इलाकों में प्रशासन को सभी आवश्यक कदम उठाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

“गंडक, कोसी, बागमती और गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। इससे कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी है। सरकार बाढ़ और जल प्रबंधन को लेकर लगातार काम कर रही है। प्रशासन को भी प्रभावित इलाकों में जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।”

– मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी

सोन नदी में जलस्तर बढ़ने का एक प्रमुख कारण बाणसागर बांध से छोड़ा गया पानी है। रविवार को बाणसागर से छोड़ा गया पानी मंगलवार को सोन नदी में पहुंच गया, जिसके परिणामस्वरूप सोन के किनारे बसे गांवों में अब खतरा मंडराने लगा है। मनेर में भी सोन नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

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जल संसाधन विभाग के अनुसार, नेपाल में आई बाढ़ के बाद गंडक नदी में पानी का उतार-चढ़ाव लगातार जारी है। मंगलवार को वाल्मीकिनगर बराज से लगभग सवा लाख से डेढ़ लाख क्यूसेक के बीच पानी छोड़ा गया। गंडक नदी डुमरियाघाट में खतरे के निशान से 56 सेंटीमीटर ऊपर और बंगराघाट के पास 24 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। वहीं, कोसी बलतारा में 1.11 मीटर और कुरसेला में 41 सेंटीमीटर ऊपर है। खगड़िया में बूढ़ी गंडक नदी भी खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर ऊपर है।

गंगा नदी का जलस्तर भी कई जगहों पर लाल निशान से ऊपर बना हुआ है। दीघा, गांधी घाट, हाथीदह और कहलगांव जैसे प्रमुख स्थानों पर गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे तटवर्ती इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है।

कटाव का कहर और प्रशासन की चुनौती: राघोपुर में भीषण तबाही

भागलपुर के नवगछिया स्थित राघोपुर में गंगा का कटाव बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। तटबंध पर लगातार बढ़ते दबाव को देखते हुए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह मंगलवार को नई दिल्ली में चल रही एक महत्वपूर्ण बैठक को बीच में छोड़कर पटना लौट आए।

इसके बाद जल संसाधन सचिव तत्काल भागलपुर पहुंचे और उन्होंने तटबंध की सुरक्षा के लिए किए जा रहे कार्यों का गहनता से जायजा लिया। अधिकारियों को मौके पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने आश्वस्त किया कि राघोपुर में बांध की सुरक्षा और आगे के कटाव को रोकने के लिए सभी आवश्यक और संभावित उपाय युद्धस्तर पर किए जा रहे हैं, साथ ही नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

“राघोपुर में बांध की सुरक्षा और आगे के कटाव को रोकने के लिए सभी जरूरी और संभावित उपाय किए जा रहे हैं। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।”

– उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी

मंगलवार सुबह राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध के सी-नोज के पास अपस्ट्रीम में अचानक तेज कटाव शुरू हुआ। देखते ही देखते तटबंध का 100 मीटर से अधिक हिस्सा गंगा में समा गया। इसके साथ ही रेलवे लाइन के किनारे बने मां चैती दुर्गा मंदिर और बाबा बजरंगबली मंदिर भी नदी में विलीन हो गए, जो स्थानीय लोगों के लिए गहरी क्षति है। अब तक कुल 350 मीटर से अधिक लंबाई में तटबंध क्षतिग्रस्त हो चुका है, और पुरानी रेलवे लाइन की तरफ मात्र 100 मीटर तटबंध ही बचा है, जिससे रेलवे लाइन के अस्तित्व पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। गंगा का पानी अब सीधे रेलवे लाइन से टकरा रहा है। पश्चिम चंपारण में भी गंडक का कटाव तेज हो गया है, जबकि मधुबनी की चिऊरही पंचायत के रेवहिया और योगापट्टी में भी नदी किनारे कटाव जारी है।

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जलप्रपात पर रोक और निचले इलाकों में दहशत: आगे क्या?

लगातार बारिश का असर रोहतास के मांझरकुंड जलप्रपात पर भी पड़ा है। बारिश के कारण झरने का जलप्रवाह काफी बढ़ गया है, जिससे दुर्घटना की आशंका है। इसे देखते हुए प्रशासन ने पर्यटकों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। मांझरकुंड जलप्रपात में अगले आदेश तक पर्यटकों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रशासन ने लोगों से सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस प्रतिबंध का पालन करने की अपील की है। आने वाले दिनों में बाढ़ की स्थिति और बिगड़ सकती है, जिस पर सरकार और प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है।

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