Bhagalpur Ganga Erosion: बिहार के भागलपुर जिले से एक हृदय विदारक खबर सामने आई है, जहाँ नवगछिया अनुमंडल के राघोपुर पंचायत स्थित छोटी अलालपुर गांव में हजारों लोगों की आस्था का प्रतीक चेती दुर्गा मंदिर गंगा नदी में समा गया। मंगलवार को भीषण कटाव के कारण यह ऐतिहासिक धरोहर देखते ही देखते नदी के गर्भ में विलीन हो गई। इस घटना से पूरे इलाके में मातम पसर गया है और कई बुजुर्ग ग्रामीणों की आँखें नम हो गईं। यह मंदिर सिर्फ छोटी अलालपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के लिए गहरी आस्था का केंद्र था।
सदियों पुरानी आस्था पर संकट, प्रशासन पर गंभीर आरोप
चेती दुर्गा मंदिर का गंगा में समा जाना स्थानीय लोगों के लिए एक अपूरणीय क्षति है। हर साल चैत्र नवरात्रि के दौरान यहाँ भव्य चेती दुर्गा पूजा का आयोजन होता था, जिसमें भारी भीड़ उमड़ती थी। इस मंदिर के विलीन होने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मंदिर उनकी पहचान का हिस्सा था और इसके चले जाने से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है।
स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि “गंगा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के साथ ही इस इलाके में तेजी से कटाव हो रहा था। मंदिर पर लगातार खतरा मंडरा रहा था, लेकिन प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा समय रहते ठोस निरोधात्मक कार्य (फ्लड फाइटिंग वर्क) नहीं किए गए। यदि समय पर जियो बैग या बोल्डर पिचिंग का काम मुस्तैदी से किया जाता, तो शायद इस ऐतिहासिक धरोहर और पूरे गांव को बचाया जा सकता था।”
ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि गंगा नदी के बिहार में बढ़ते कटाव को रोकने के लिए प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाए। उनका कहना है कि अगर समय पर जियो बैग या बोल्डर पिचिंग जैसे कटाव निरोधात्मक कार्य किए जाते, तो शायद इस ऐतिहासिक मंदिर को बचाया जा सकता था। यह लापरवाही अब स्थानीय लोगों के गुस्से का कारण बन रही है।
अब बस्ती पर मंडराया खतरा, पुनर्वास की मांग तेज
चेती दुर्गा मंदिर के गंगा में विलीन होने के बाद अब छोटी अलालपुर और राघोपुर के रिहायशी इलाकों पर सीधा खतरा मंडराने लगा है। नदी का रुख तेजी से बस्ती की तरफ बढ़ रहा है, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। यह स्थिति क्षेत्र में एक बड़े मानवीय संकट की आशंका पैदा कर रही है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सरकार से तुरंत युद्धस्तर पर कटाव निरोधात्मक कार्य शुरू करने की मांग की है। इसके साथ ही, उन्होंने प्रभावित लोगों के तत्काल पुनर्वास की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार को इस गंभीर स्थिति को प्राथमिकता देनी चाहिए और लोगों के जीवन व संपत्ति की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।







