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बिहार में बाढ़ का तांडव! हाजीपुर- गाजीपुर NH 19, आरा-बक्सर फोरलेन पर चढ़ा पानी, छपरा के दो बांध टूटे, 17 लाख आबादी प्रभावित, 12 जिलों में मंत्री का कैंप

Bihar Flood: गंगा समेत कई नदियां उफान पर हैं, जिससे 17 लाख आबादी प्रभावित हुई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट रहने और राहत-बचाव कार्य में तेजी लाने का कड़ा निर्देश दिया है।

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Bihar Flood: बिहार के 12 जिलों में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। गंगा सहित प्रमुख नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी से तटबंधों पर भारी दबाव है, जिससे नए इलाकों में पानी फैल रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हालात की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने और राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। राजधानी पटना में गंगा नदी का जलस्तर 2016 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जिसके चलते क्रूज और बोट का परिचालन अगले आदेश तक रोक दिया गया है। इधर, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की लगातार मैराथन बैठकों का दौर जारी है।

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बिहार में बाढ़ का तांडव! हाजीपुर- गाजीपुर NH 19, आरा-बक्सर फोरलेन पर चढ़ा पानी, छपरा के दो बांध टूटे, 17 लाख आबादी प्रभावित, 12 जिलों में मंत्री का कैंप

सड़कों पर चढ़ा बाढ़ का पानी, कई इलाके कटे

बाढ़ के कारण राज्य के कई महत्वपूर्ण मार्गों पर आवागमन बाधित हो गया है। हाजीपुर-गाजीपुर नेशनल हाईवे 19 और आरा-बक्सर फोरलेन पर पानी चढ़ गया है। हाजीपुर-महनार मुख्य मार्ग भी पूरी तरह डूब चुका है। हाजीपुर शहर के कुछ हिस्सों में भी बाढ़ का पानी घुसने लगा है। सारण (छपरा) जिले के दिघवारा और दरियापुर में मही और सुखमयी नदियों के दो बांध टूट गए हैं।

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बिहार में बाढ़ का तांडव! हाजीपुर- गाजीपुर NH 19, आरा-बक्सर फोरलेन पर चढ़ा पानी, छपरा के दो बांध टूटे, 17 लाख आबादी प्रभावित, 12 जिलों में मंत्री का कैंप

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दिघवारा प्रखंड की त्रिलोकचक पंचायत के केशरपुर गांव के समीप मही नदी का बांध 25 से 30 फीट चौड़ाई में टूटा है, जबकि दरियापुर में मठिया के पास सुखमयी नदी का बांध टूटा है। इससे कई गांवों का संपर्क प्रखंड मुख्यालय से कट गया है। भोजपुर के बड़हरा और शाहपुर समेत विभिन्न प्रखंडों में भी बाढ़ विकराल रूप ले रही है। देर रात सरैया-आरा मुख्य मार्ग पर चौमुखा, पिपरा और यादवपुर के पास पानी चढ़ गया, वहीं आरा से बक्सर फोरलेन पर चंदवा और बामपाली के बीच भी आवागमन बाधित है।

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17 लाख आबादी प्रभावित, CM ने 12 जिलों के मंत्रियों को भेजा

आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, राज्य के 61 प्रखंडों की 300 पंचायतों में लगभग 17 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित है। हालांकि, यह सरकारी आंकड़ा है और वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने का अनुमान है। गंगा नदी का जलस्तर बक्सर से भागलपुर तक लगातार बढ़ रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गंगा से प्रभावित 12 जिलों के प्रभारी मंत्रियों और सचिवों को तत्काल प्रभाव से अपने-अपने जिलों का दौरा करने का निर्देश दिया है। ये मंत्री और सचिव इन प्रभावित क्षेत्रों में कैंप कर राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार निगरानी करेंगे, ताकि जरूरतमंदों तक त्वरित सहायता पहुंचाई जा सके।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, ‘राज्य में बाढ़ की स्थिति पर राज्य सरकार निरंतर नजर बनाए हुए है। राहत और बचाव कार्य तेज करने का निर्देश दिया गया है।’

इन 12 जिलों में बक्सर, भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, बेगूसराय, समस्तीपुर, लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार शामिल हैं। कटिहार और खगड़िया में कोसी एवं गंगा नदी लाल निशान के पार कर गई हैं। सोन, गंडक, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, घाघरा और बागमती नदियां भी कई जगहों पर लाल निशान से ऊपर बह रही हैं।

राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी

बाढ़ पीड़ितों को सहायता पहुंचाने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं। लोगों को स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षित आवागमन प्रदान करने के लिए 50 चिकित्सा शिविर, 19 बोट एंबुलेंस और 36 पशु चिकित्सा शिविर संचालित किए जा रहे हैं। विस्थापित और प्रभावित आबादी की निकासी एवं आवागमन को सुगम बनाने के लिए कुल 858 नावों का परिचालन हो रहा है। अब तक 12314 पॉलीथीन शीट और 2228 ड्राई राशन पैकेट का वितरण किया जा चुका है। संभावित खतरों से निपटने और त्वरित राहत एवं बचाव कार्य के लिए राज्य में एनडीआरएफ की 7 और एसडीआरएफ की 27 टीमों को विभिन्न प्रभावित जिलों में तैनात किया गया है।

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अधिकारियों को रात्रि गश्ती और कड़ी निगरानी के निर्देश

जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और सहायक नदियों में बैकवाटर के संभावित प्रभाव को देखते हुए अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को संवेदनशील तटबंधों, स्थलों, स्लुइस गेटों और निचले क्षेत्रों में रात्रि गश्ती करने को कहा है।

डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देशित करते हुए कहा, ‘सभी संवेदनशील स्थलों पर रात्रि पेट्रोलिंग एवं सतत निगरानी सुनिश्चित की जाए। तटबंधों एवं अन्य संरचनाओं पर सीपेज, ओवरटॉपिंग, कटाव, रिसाव अथवा किसी भी प्रकार की प्रतिकूल स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए। किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल वरीय अधिकारियों को दी जाए और बिना किसी देरी के प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई हो।’

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से पटना में गंगाजी के घाटों के तेजी से बढ़ते जलस्तर को देखते हुए शहरी सुरक्षा तटबंध के आसपास के इलाकों पर कड़ी नजर रखने के लिए पटना नगर निगम, जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने और विशेष तौर पर निगरानी बरतने के निर्देश दिए हैं। बाढ़ के बढ़ते खतरे के बीच महनार में लगने वाले गणिनाथ मेला को भी बंद कर दिया गया है।

बाढ़ ने रोकी रफ्तार! बिहार में ट्रेनें रद्द, पटना-गया रूट पर हजारों यात्री फंसे, जानें कब मिलेगी राहत

Bihar Train Service: बिहार में लगातार हो रही बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। इसी कड़ी में, पुनपुन नदी में आई बाढ़ के कारण पटना-गया रेल खंड पर बिहार ट्रेन सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई है। नदी का पानी रेलवे पुल संख्या 21 के गार्डरों तक पहुंच जाने के बाद, सुरक्षा को देखते हुए डाउन लाइन पर ट्रेनों का परिचालन अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है। इस वजह से कई महत्वपूर्ण ट्रेनें रद्द या परिवर्तित मार्ग से चलाई जा रही हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कौन सी ट्रेनें हुई रद्द?

भारतीय रेलवे ने पुनपुन नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण रविवार, 6 सितंबर को पटना और गया के बीच चलने वाली 10 मेमू (MEMU) ट्रेनों को रद्द कर दिया है। यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जब तक जलस्तर सामान्य नहीं हो जाता और ट्रैक व पुल की सुरक्षा की पूरी तरह जांच नहीं हो जाती, तब तक परिचालन बहाल नहीं किया जाएगा।

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ट्रेन संख्यामार्ग
63242गया-पटना मेमू
63244गया-पटना मेमू
63245पटना-गया मेमू
63247पटना-गया मेमू
63248गया-पटना मेमू
63251पटना-गया मेमू
63256गया-पटना मेमू
63274पटना-आरजीडी मेमू
63250गया-पटना मेमू
63253पटना-गया मेमू

लंबी दूरी की ट्रेनों पर भी असर

बाढ़ के कारण केवल स्थानीय मेमू ट्रेनें ही नहीं, बल्कि लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों के मार्ग भी बदले गए हैं। 6 सितंबर को चलने वाली 18625 पूर्णिया कोर्ट-हटिया एक्सप्रेस और 18626 हटिया-पूर्णिया कोर्ट एक्सप्रेस को परिवर्तित मार्ग से चलाया जाएगा। ये ट्रेनें अब पटना और गया से होकर नहीं गुजरेंगी, बल्कि बख्तियारपुर और किऊल के रास्ते अपने गंतव्य तक पहुंचेंगी। इस बदलाव से इन ट्रेनों के यात्रियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ेगा।

पुल की सुरक्षा और निगरानी

“रेलवे अधिकारियों ने पुल और प्रभावित रेल खंड की स्थिति की लगातार निगरानी करने और सुरक्षा मानकों के अनुसार आवश्यक उपाय करने के निर्देश दिए हैं।”

रेलवे के अनुसार, 4 सितंबर की रात से ही पुल संख्या 21 पर पानी का दबाव बढ़ रहा था। यह पुल पटना-परसा डाउन लाइन पर किलोमीटर 11/38 और 11/32 के बीच स्थित है। रेलवे अधिकारी और कर्मचारी लगातार पुल और आसपास के ट्रैक सेक्शन की बारीकी से जांच कर रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ट्रेनों का परिचालन तभी फिर से शुरू होगा, जब जलस्तर कम हो जाएगा और पुल व ट्रैक को यातायात के लिए पूरी तरह सुरक्षित घोषित कर दिया जाएगा।

पुनपुन नदी में जलस्तर बढ़ने से उत्पन्न हुई यह स्थिति बिहार में बाढ़ की व्यापक समस्या का एक और उदाहरण है। राज्य के कई हिस्सों में नदियां उफान पर हैं, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। रेलवे प्रशासन यात्रियों से अपील कर रहा है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले ट्रेनों की स्थिति के बारे में नवीनतम जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। स्थिति सामान्य होने पर ही पटना-गया खंड पर ट्रेन सेवाएं बहाल की जाएंगी, जिसकी सूचना अलग से जारी की जाएगी।

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