Bihar Health Facilities: बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य के 312 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को अब फर्स्ट रेफरल यूनिट (FRU) के रूप में विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने इस महत्वपूर्ण बदलाव के लिए कमर कस ली है, जिससे ग्रामीण इलाकों में भी मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।
राज्य स्वास्थ्य समिति ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों और अस्पतालों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। खास तौर पर, ऑपरेशन थियेटर (ओटी) और प्रसव कक्ष (लेबर रूम) में आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता का विस्तृत आकलन करने को कहा गया है। यह पहल आम लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से की गई है।
राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक डॉ नवल किशोर चौधरी ने इस संबंध में सभी संबंधित अधिकारियों को पत्र जारी किया है। इसके तहत प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों की संभावित संख्या, उपलब्ध उपकरण, विशेषज्ञ चिकित्सक और मानव संसाधन की स्थिति का विस्तृत गैप एनालिसिस किया जाएगा।
केंद्र सरकार की ‘फाइनेंशियल असिस्टेंस फॉर पब्लिक हेल्थ इंस्टीट्यूशंस (एफएपीएचआइ)’ योजना के तहत इन 312 सीएचसी को एफआरयू में बदलने और मौजूदा ओटी को मजबूत करने के लिए बजट आवंटित किया गया है। यह योजना 2026-27 तक संचालित होगी। उपकरणों की जरूरत के मुताबिक, बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआइसीएल) के ईएमएमएस पोर्टल पर ऑनलाइन मांग भेजी जाएगी।
समिति ने यह भी निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारी अपनी रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कर ई-मेल के माध्यम से भेजें। इससे आवंटित राशि का समय पर और सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। इस पहल से बिहार के स्वास्थ्य ढांचे में महत्वपूर्ण सुधार आएगा और आम लोगों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिल पाएगा।







