Bihar Floods: बिहार में हर साल आने वाली विनाशकारी बाढ़ से स्थायी राहत दिलाने के लिए जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने फरक्का जलसंधि के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। भागलपुर के टाउन हॉल में आयोजित ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम में जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने स्पष्ट कहा कि फरक्का जलसंधि के नाम पर बिहार के हितों की अनदेखी अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने इस संधि को बिहार की बाढ़ समस्या से सीधा जोड़ते हुए गंभीर सवाल उठाए।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के साथ प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा और बिहार सरकार के मंत्री बुलो मंडल समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने नेताओं का भव्य स्वागत चांदी का मुकुट पहनाकर किया, वहीं अतिथियों के सम्मान में झिंझिया नृत्य का भी आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
बिहार की बाढ़ और फरक्का जलसंधि का सीधा कनेक्शन
संजय झा ने बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ की भयावहता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बाढ़ की वजह से राज्य के कई जिले हर साल प्रभावित होते हैं, जिससे लाखों लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती हैं और आम जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है। उन्होंने फरक्का जलसंधि को इस समस्या की जड़ बताते हुए कहा कि बिहार को बाढ़ से स्थायी राहत दिलाने के लिए इस विषय पर गहन विचार-विमर्श और ठोस पहल की नितांत आवश्यकता है।
संजय झा ने कहा, ‘बिहार के जल संसाधनों पर पहला अधिकार यहां की जनता का है। फरक्का जल संधि के नाम पर बिहार के हितों की अनदेखी अब और बर्दाश्त नहीं की जा सकती।’ उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि बक्सर के रास्ते गंगा में बिहार की ओर से लगभग 400 क्यूमेक पानी आता है, जबकि बांग्लादेश को 1,500 क्यूमेक पानी देने की व्यवस्था है।
जल प्रबंधन और गाद जमा होने की समस्या पर जोर
जदयू नेताओं ने कार्यक्रम में जल प्रबंधन की खामियों और नदियों में गाद (सिल्ट) जमा होने की गंभीर समस्या का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बाढ़ से बचाव के लिए केवल तात्कालिक उपाय ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और ठोस पहल की जरूरत है, जिसमें फरक्का जलसंधि की समीक्षा एक अहम कदम है। नेताओं ने एक स्वर में कहा कि बिहार के हितों को सर्वोपरि रखते हुए इस मुद्दे को केंद्र के सामने मजबूती से उठाया जाना चाहिए।
राज्य में हर साल बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों के लिए एक स्थायी समाधान खोजने की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया गया। भागलपुर के टाउन हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में जदयू कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखने को मिला, जो इस मुद्दे पर पार्टी के कड़े रुख का संकेत देता है। बिहार में बाढ़ की समस्या कई जिलों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, ऐसे में फरक्का जलसंधि का मुद्दा अब राजनीतिक गलियारों में और गरमा सकता है। पढ़िए विस्तार से
फरक्का जलसंधि पर भागलपुर में जदयू का नीतीश संवाद, चांदी का मुकुट पहनाकर संजय झा और उमेश कुशवाहा का भव्य स्वागत
भागलपुर के टाउन हॉल में फरक्का जलसंधि को लेकर जदयू की ओर से नीतीश संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा, बिहार सरकार के मंत्री बुलो मंडल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा का चांदी का मुकुट पहनाकर भव्य स्वागत किया इस मौके पर राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ की समस्या को प्रमुखता से उठाया।
उन्होंने कहा कि बिहार के कई जिले हर साल बाढ़ से प्रभावित होते हैं इससे लाखों लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है और किसानों की फसल एवं जनजीवन पर भी इसका व्यापक असर पड़ता है।
उन्होंने फरक्का जलसंधि के मुद्दे पर चर्चा करते हुए कहा कि बिहार को बाढ़ की समस्या से स्थायी राहत दिलाने के लिए इस विषय पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है।
जल प्रबंधन, नदियों में गाद की समस्या और बाढ़ से बचाव के लिए ठोस पहल की आवश्यकता है। बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे को मजबूती से उठाने की जरूरत है कार्यक्रम के माध्यम से जदयू नेताओं ने फरक्का जलसंधि और बिहार में बाढ़ की समस्या को लेकर अपनी बात रखी। इस आयोजन को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में भी खासा उत्साह देखने को मिला







