Bihar Pathology Labs: पटना: बिहार में अब निजी पैथोलॉजी लैब की मनमानी नहीं चलेगी। स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में संचालित सभी निजी पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक लैब की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने सभी जिलों में इन लैब की जांच करने का निर्णय लिया है, ताकि मरीजों को विश्वसनीय जांच रिपोर्ट मिल सके और मानकों का पालन न करने वाली लैब पर सख्त कार्रवाई की जा सके। इस पहल से बिहार के लोगों को बेहतर और भरोसेमंद स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।

स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य मरीजों को सटीक और विश्वसनीय जांच सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके लिए सभी जिलों में निजी लैब की संख्या का आकलन किया जाएगा, साथ ही उनकी गुणवत्ता, उपलब्ध संसाधनों और निर्धारित मानकों की गहन समीक्षा होगी। विभागीय समीक्षा के बाद, उन लैब पर कार्रवाई की जाएगी जो मानकों का उल्लंघन कर रही होंगी।

गुणवत्ता जांच के लिए जिलों में बनेगी टीम, शिकायत की भी होगी व्यवस्था
स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को स्पष्ट दिशा-निर्देश भेजे हैं। इसके तहत, जिलों में विशेष टीमें गठित की जाएंगी जो नियमित रूप से निजी पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक लैब की जांच करेंगी। खासकर ग्रामीण इलाकों में स्थापित सभी निजी लैब पर पैनी नजर रखी जाएगी। इसके अलावा, पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक सेवाओं की गुणवत्ता से संबंधित किसी भी शिकायत के लिए एक विशेष व्यवस्था भी बनाई जाएगी, ताकि लोग अपनी समस्याओं को सीधे विभाग तक पहुंचा सकें।
जरूरत के मुताबिक पीपीपी मोड पर स्थापित होंगे नए लैब
इस जांच प्रक्रिया के बाद लैब सेवाओं की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जहां भी बेहतर जांच सुविधाओं की कमी पाई जाएगी, वहां सरकार खुद से नए लैब की स्थापना पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर कराएगी। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के हर हिस्से में लोगों को आधुनिक और विश्वसनीय जांच सुविधाएं उपलब्ध हों, जिससे उन्हें इलाज में कोई परेशानी न हो।
पैथोलॉजी जांच की बढ़ती मांग और गुणवत्ता पर सवाल
विभाग के अनुसार, बिहार में पैथोलॉजी जांच की मांग लगातार बढ़ रही है। इस बढ़ती मांग के कारण कई निजी लैब संचालित हो रहे हैं, लेकिन उनमें से कितने निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन कर रहे हैं, इसकी कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसी कमी को दूर करने और मरीजों के स्वास्थ्य से कोई समझौता न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। यह कदम राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।







