Bihar Fish Farmers: बिहार में मछली पालन के क्षेत्र को संगठित और मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। अब मत्स्य पालकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा। प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना के तहत नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (एनएफडीपी) पर मछुआरों, मत्स्य पालकों और इस क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों का पंजीकरण तेजी से हो रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य असंगठित मत्स्य पालन क्षेत्र को व्यवस्थित करना, लाभार्थियों को सरकारी सहायता से जोड़ना और मछली पालन को एक लाभदायक व्यवसाय के रूप में विकसित करना है।
डिजिटल पहचान से बदलेगी मत्स्य पालकों की तस्वीर
मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मत्स्य निदेशालय की इस विशेष पहल के कारण अब तक बिहार में 1.60 लाख से अधिक मत्स्य पालकों ने पंजीकरण कराया है। 15 अक्टूबर 2026 की एनएफडीपी रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में कुल 1,88,510 आवेदन दर्ज किए गए हैं। इनमें से 1,59,735 आवेदन कन्फर्म हो चुके हैं, जबकि 16,281 आवेदन अभी प्रक्रिया में हैं। इस रिपोर्ट में व्यक्तिगत श्रेणी के 1,87,388 और संगठन श्रेणी के 1,122 आवेदन शामिल हैं।

एनएफडीपी पोर्टल पर पंजीकरण से मछुआरों और मत्स्य पालकों को एक डिजिटल पहचान मिल रही है। यह डिजिटल पहचान उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय जानकारी और व्यवसाय की प्रभावी योजना बनाने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करेगी।
35% तक अनुदान, ऐसे मिलेगा लाभ
प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना के विभिन्न घटकों का लाभ उठाने के लिए एनएफडीपी पर पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। यह पंजीकरण प्रक्रिया न केवल पारदर्शिता लाती है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि सही लाभार्थी तक योजना का लाभ पहुँचे।
इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), छोटे उद्यमों, सहकारी समितियों और मत्स्य किसान संगठनों को 35 प्रतिशत तक प्रदर्शन अनुदान देने का प्रावधान है। इसका सीधा मकसद मत्स्य पालन से जुड़े समूहों और संगठनों को प्रोत्साहित करना, उनकी कार्यक्षमता को बढ़ाना और इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में उद्यमशीलता को बढ़ावा देना है। यह अनुदान मछली पालन को आर्थिक रूप से और अधिक आकर्षक बनाएगा।
बिहार में बढ़ेगा मछली उत्पादन, मिलेगी आर्थिक मजबूती
मत्स्य पालन क्षेत्र के डिजिटलीकरण और सरकारी योजनाओं से सीधे जुड़ाव के कारण बिहार में मछली उत्पादन को एक नई दिशा मिलेगी। यह पहल न केवल मछुआरों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाएगी, बल्कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी। भविष्य में इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से और अधिक मत्स्य पालकों को जोड़ने की उम्मीद है, जिससे बिहार मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकेगा और उन्हें बेहतर बाजार पहुँच भी मिल पाएगी।

















