Bihar Human Trafficking: झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा से बिहार के CM Samrat ने कहा : ‘जल्द अमीर बनने की चाह’ ने बिगाड़ी जिंदगी, मानव तस्करी पर जीरो टॉलरेंस! अपराधी और शराब टारगेट पर! जहां आज, यह पूर्वी जोन कांफ्रेंस मानव तस्करी और बाल गुमशुदगी जैसे गंभीर मुद्दों पर राज्यों के बीच समन्वय और सहयोग बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।
बिहार में मानव तस्करी और लापता बच्चों की बढ़ती चुनौती के बीच, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ‘जल्द अमीर बनने की चाह’ लोगों की जिंदगी बिगाड़ रही है, जिसके कारण शराब और अपराध जैसी चुनौतियां बढ़ रही हैं। पटना के बापू सभागार में आयोजित पूर्वी जोन कांफ्रेंस में उन्होंने बिहार सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को प्रमुखता से सामने रखा।






गृह विभाग द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण कांफ्रेंस में बिहार के साथ-साथ झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस दौरान गुमशुदा बच्चों की बरामदगी और मानव तस्करी रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियानों की सफलता पर भी प्रकाश डाला।
‘नया सवेरा 3.0’ ने बदली 1200 से अधिक बच्चों की जिंदगी
लापता बच्चों को उनके परिवारों से मिलाने के लिए बिहार सरकार के ‘नया सवेरा 3.0’ अभियान ने सराहनीय काम किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस पहल के तहत अब तक 1200 से अधिक लापता बच्चों को सफलतापूर्वक बरामद किया जा चुका है। यह आंकड़ा राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और प्रयासों को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, ‘गुमशुदगी-पलायन के बीच शराब और अपराध की चुनौती बनी हुई है। जल्द अमीर बनने की चाह लोगों की जिंदगी बिगाड़ रही है। बिहार सरकार मानव तस्करी और लापता बच्चों के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है।’
अपराध और शराब की चुनौती पर सरकार का कड़ा रुख
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में शराबबंदी और अपराध को नियंत्रित करने के लिए सरकार के कठोर रुख को रेखांकित किया। उन्होंने स्वीकार किया कि जल्द अमीर बनने की लालसा के चलते कई लोग गलत रास्ते अपना रहे हैं, जिससे समाज में अपराध और पलायन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। सरकार इन चुनौतियों से निपटने के लिए हर संभव कदम उठा रही है और कानून व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

यह पूर्वी जोन कांफ्रेंस मानव तस्करी और बाल गुमशुदगी जैसे गंभीर मुद्दों पर राज्यों के बीच समन्वय और सहयोग बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। बिहार सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी ऐसे अभियानों को जारी रखेगी ताकि हर बच्चे को सुरक्षित भविष्य मिल सके।








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