NEET Exam Controversy: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के पुनर्गठन के बाद भी विवादों का सिलसिला थम नहीं रहा है। अब री-नीट परीक्षा में बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लखीसराय में सॉल्वर गैंग के खुलासे के बाद सामने आया है कि अभ्यर्थियों के थंब इम्प्रेशन और बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करने का बेहद संवेदनशील कार्य एक ऐसी कंपनी को दिया गया था, जिसे कई राज्यों ने पहले ही ब्लैकलिस्ट कर रखा है।
जांच के दौरान मिली जानकारी ने परीक्षा प्रबंधन से जुड़े संस्थानों की कार्यप्रणाली पर नई बहस छेड़ दी है। बताया जा रहा है कि बायोमेट्रिक सत्यापन का जिम्मा EDCIl को सौंपा गया था, जिसने यह महत्वपूर्ण कार्य इनोवेटिव व्यू नामक कंपनी को दे दिया।






ब्लैकलिस्टेड कंपनी को अहम जिम्मेदारी, उठ रहे गंभीर सवाल
सॉल्वर गैंग मामले में कुछ बायोमेट्रिक कर्मचारियों और सुपरवाइजरों की कथित संलिप्तता सामने आने के बाद इनोवेटिव व्यू कंपनी की भूमिका अब जांच के केंद्र में है। आरोप है कि परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं का फायदा उठाकर सॉल्वर गैंग ने अपनी पैठ बनाई। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि सुरक्षा और पहचान सत्यापन में कहीं कोई चूक या मिलीभगत तो नहीं हुई।
इनोवेटिव व्यू कंपनी को पूर्व में भी कई राज्यों में परीक्षा संबंधी कार्यों में अनियमितताओं के आरोपों का सामना करना पड़ा है। जानकारी के अनुसार, झारखंड सरकार ने वर्ष 2025 में, तमिलनाडु सरकार ने 2025 में और उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2022 में इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया था। इन कार्रवाइयों के पीछे परीक्षा प्रबंधन और तकनीकी सेवाओं से जुड़ी गंभीर शिकायतें बताई गई थीं।
संवेदनशील परीक्षा में इतनी बड़ी लापरवाही क्यों?
री-नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण और संवेदनशील परीक्षा में बायोमेट्रिक सत्यापन का कार्य ऐसी कंपनी को सौंपना, जिसके खिलाफ पहले से विभिन्न राज्यों में कार्रवाई हो चुकी हो, गंभीर चिंता का विषय है। शिक्षा और परीक्षा प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पहचान सत्यापन की प्रक्रिया सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है। ऐसे में सेवा प्रदाता एजेंसियों के चयन और उनकी निगरानी को लेकर अधिक सतर्कता बरतने की सख्त आवश्यकता है।
वर्तमान में, सॉल्वर गैंग मामले की जांच जारी है। जांच एजेंसियां बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया, परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित कंपनियों की भूमिका की गहन पड़ताल कर रही हैं। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि अनियमितताओं में किन-किन स्तरों पर चूक हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार था। इस खुलासे से बिहार समेत पूरे देश में परीक्षा की शुचिता को लेकर विश्वास और गहरा सकता है।
NEET फर्जीवाड़ा: मास्टरमाइंड खुद बाहर, दूसरों से दिलवाता था परीक्षा! बिहार के नामी कॉलेज के 2 छात्र निष्कासित, CBI जांच
Bihar NEET Fraud: बिहार में नीट री-एग्जाम में हुए कथित फर्जीवाड़े को लेकर बड़ा एक्शन लिया गया है। मगध मेडिकल कॉलेज के चौथे वर्ष के दो छात्रों, अर्पित सिंह और विवेक कुमार को कॉलेज से बाहर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन छात्रों पर फर्जी परीक्षार्थी के रूप में परीक्षा दिलाने का आरोप है। कॉलेज प्राचार्या डॉक्टर लता शुक्ला द्विवेदी ने इस बात की पुष्टि की है कि गिरफ्तारी के बाद जारी सूची में दोनों छात्रों के नाम शामिल हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि अर्पित सिंह खुद बाहर रहकर विवेक को परीक्षा केंद्र के अंदर भेजता था।
मास्टरमाइंड की चौंकाने वाली रणनीति और कॉलेज की कार्रवाई
अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, चौथे वर्ष का छात्र अर्पित सिंह जांच एजेंसियों के रडार पर पहले से था। सूत्रों की मानें तो अर्पित सिंह कभी भी दूसरे के बदले खुद नीट परीक्षा देने नहीं जाता था। इसके लिए वह पहले से ही किसी सहपाठी को तैयार कर लेता था। प्राचार्या डॉक्टर लता शुक्ला द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की गिरफ्तारी के बाद यह साफ हो गया है कि वे गंभीर अनियमितताओं और गलत गतिविधियों में शामिल थे। ऐसे में उन्हें मेडिकल कोर्स पूरा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यही कारण है कि कॉलेज प्रशासन निष्कासन की प्रक्रिया पूरी कर रहा है। साथ ही इस मामले की अन्य स्तरों पर भी जांच की जाएगी।
डॉक्टर लता शुक्ला द्विवेदी ने कहा, “नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में किसी भी प्रकार की धांधली स्वीकार नहीं की जा सकती। योग्य और मेहनती छात्रों का हक मारकर यदि कोई व्यक्ति डॉक्टर बनने की कोशिश करता है, तो यह पूरे समाज और चिकित्सा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।”
सीबीआई की पड़ताल और लखीसराय में बड़ी गिरफ्तारी
कुछ दिन पहले सीबीआई की टीम मगध मेडिकल कॉलेज पहुंची थी और उसने यहां छात्रों की गतिविधियों के बारे में गंभीरता से जानकारी जुटाई थी। अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि अर्पित सिंह पहले भी ऐसी धांधली कर चुका था और कई बार सफल भी रहा। कुछ पुख्ता जानकारी मिलने के बाद ही सीबीआई की टीम अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल गया पहुंची थी।
इस बीच, रविवार को नीट का री-एग्जाम हुआ। इस दौरान प्रशासन ने लखीसराय के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी कर नौ फर्जी परीक्षार्थियों (स्कॉलर) को गिरफ्तार किया। इसके अलावा, बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़ी निजी एजेंसी के सात कर्मियों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि गिरफ्तार लोग असली अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचे थे और इसके लिए मोटी रकम का सौदा किया गया था।
लखीसराय जिले के चार परीक्षा केंद्रों पर कुल 720 अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होना था, जिनमें से 673 उपस्थित रहे और 47 अनुपस्थित थे।
| परीक्षा केंद्र का नाम | गिरफ्तार फर्जी परीक्षार्थियों की संख्या |
|---|---|
| केआरके हाईस्कूल | 1 |
| राजकीय हसनपुर हाईस्कूल | 1 |
| केंद्रीय विद्यालय | 7 |
| डायट लखीसराय केंद्र | 0 |
इन गिरफ्तारियों से स्पष्ट है कि यह फर्जीवाड़ा एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा था, जिसे तोड़ने के लिए पुलिस सक्रिय है।
पुलिस का एक्शन और सॉल्वर गैंग पर शिकंजा
लखीसराय में गिरफ्तारी के बाद रविवार देर शाम सिटी डीएसपी धर्मेंद्र भारती और मगध मेडिकल थानाध्यक्ष कृष्ण कुमार समेत अन्य पुलिस टीम ने गिरफ्तार छात्रों के हॉस्टल के कमरों की तलाशी ली। इस दौरान एक टैब, पहचान पत्र और कई अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, छात्र पिछले कुछ दिनों से कॉलेज परिसर से भी बाहर था।
पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी है। नौ फर्जी परीक्षार्थियों की गिरफ्तारी के साथ, दो दर्जन से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। बताया जा रहा है कि इनमें एक दर्जन से अधिक लोग बायोमेट्रिक प्रक्रिया से जुड़े हो सकते हैं। डीएम शैलेंद्र कुमार और एसपी प्रेरणा कुमार ने संयुक्त रूप से गहन जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।








