Patna High Speed Rail: दिल्ली-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर परियोजना ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। इस परियोजना के तहत पटना को भी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने इस महत्वाकांक्षी कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) रेल मंत्रालय को सौंप दी है, जिससे बिहार और उत्तर भारत के प्रमुख शहरी केंद्रों के बीच तेज कनेक्टिविटी की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
पटना-दिल्ली की दूरी सिमटेगी
यह प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल सेवा पटना और दिल्ली के बीच यात्रा के समय को नाटकीय रूप से कम कर सकती है। वर्तमान में ट्रेन से इस सफर में लगभग 10 से 12 घंटे लगते हैं, लेकिन हाई-स्पीड कॉरिडोर के चालू होने के बाद यह यात्रा मात्र चार से पांच घंटे में पूरी हो सकेगी। बिहार और दिल्ली-एनसीआर के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह समय की बचत रोजगार, शिक्षा और व्यावसायिक अवसरों तक पहुंच को बेहतर बनाएगी। इसके साथ ही, दिवाली और छठ जैसे त्योहारों के दौरान यात्रा करना भी अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।
प्रशासनिक टीम होगी मजबूत
परियोजना को गति देने के लिए प्रशासनिक और तकनीकी टीम को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। भारतीय रेलवे ने वरिष्ठ अधिकारियों से आवेदन आमंत्रित किए हैं, और रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अगले 30 दिनों के भीतर नियुक्तियां पूरी होने की उम्मीद है। 7 सितंबर को जारी दो अधिसूचनाओं में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) और असिस्टेंट जनरल मैनेजर (AGM) स्तर पर नियुक्तियों का उल्लेख किया गया है। परियोजना से संबंधित कार्यों की देखरेख के लिए प्रत्येक स्तर पर तीन अधिकारियों का प्रस्ताव है। जैसे-जैसे कॉरिडोर पर काम आगे बढ़ेगा, ये अधिकारी पटना, दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी और नोएडा सहित विभिन्न स्थानों पर परिचालन से जुड़े रहेंगे।
बिहार को मिलेगी व्यापक कनेक्टिविटी
प्रस्तावित कॉरिडोर का लाभ केवल पटना तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे बिहार को मिलेगा। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और अन्य प्रमुख केंद्रों के साथ तेज संपर्क व्यवसायों, पर्यटन, शिक्षा और निवेश को बढ़ावा देगा। यह कॉरिडोर लगभग 865 किलोमीटर लंबा होगा, जो वाराणसी और पटना होते हुए दिल्ली को सिलीगुड़ी से जोड़ेगा। हालांकि, यह परियोजना अभी नियोजन और विकास के चरण में है। डीपीआर रेल मंत्रालय को सौंपी जा चुकी है, और आगे की स्वीकृतियां, योजना और कार्यान्वयन के चरण ही परियोजना की समय-सीमा और अंतिम परिचालन को निर्धारित करेंगे।
इस परियोजना से बिहार के बुनियादी ढांचे और परिवहन व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है। डीपीआर जमा होने के बाद अब सभी की निगाहें रेल मंत्रालय की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे इस महत्वाकांक्षी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा और बिहार के लाखों लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।







