Patna Traffic Management: राजधानी पटना में सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक जाम की समस्या से अब जल्द ही छुटकारा मिल सकता है। पथ निर्माण विभाग ने शहर में यातायात प्रवाह और सड़क सुरक्षा में सुधार के उद्देश्य से ‘ट्रैफिक कंजेशन मैनेजमेंट एंड सॉल्यूशंस’ पर एक उच्च-स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया। विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल की अध्यक्षता में विश्वेश्वरैया भवन स्थित सभागार में यह बैठक 12 सितंबर को संपन्न हुई।


इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में सीआरआरआई के पूर्व निदेशक और आईआईटी बॉम्बे के पूर्व प्रोफेसर पी.के. सिकदर और आर्कैडिस आईबीआई ग्रुप के इंडिया ऑपरेशंस के कंट्री हेड वेंकटा चुंदुरु ने मुख्य वक्ताओं के रूप में भाग लिया। बैठक में पटना की भौगोलिक स्थिति, बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या में वृद्धि, अतिक्रमण और यातायात नियमों के संदर्भ में उत्पन्न होने वाली ट्रैफिक चुनौतियों पर गहन चर्चा की गई।
पटना के प्रमुख जाम वाले क्षेत्रों की पहचान
बैठक में पटना के कई प्रमुख स्थानों पर ट्रैफिक जाम और दबाव की समस्या पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया। इनमें डाक बंगला, पटना जंक्शन रोड, जीपीओ गोलंबर, एग्जीबिशन रोड, बोरिंग रोड, गांधी मैदान, पीएमसीएच, अशोक राजपथ, सगुना मोड़, अनीसाबाद और बेली रोड जैसे क्षेत्र शामिल थे। इन स्थानों पर सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने के उपायों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
AI तकनीक से पटना ट्रैफिक होगा स्मार्ट, पहले से मिलेगी जाम की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान आर्कैडिस द्वारा तैयार ‘मिशन सुगम पटना: ASTraM और SOS’ नामक एक तकनीकी मसौदा प्रस्तुत किया गया। इस मसौदे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स और एकीकृत प्लेटफॉर्म का उपयोग करके प्रौद्योगिकी-आधारित उपायों का प्रस्ताव किया गया है। एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव में मौजूदा एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र (ICCC) के बुनियादी ढांचे का अधिक उपयोग करके एक ‘इंटेलिजेंस लेयर’ बनाने की बात कही गई है।
इस प्रणाली के तहत, AI मॉडल 30-60 मिनट पहले ही ट्रैफिक जाम की भविष्यवाणी कर सकेंगे और स्वचालित रूप से ट्रैफिक सिग्नल और डायवर्जन को समायोजित कर पाएंगे। योजना में रेलवे स्टेशनों और बाजारों के पास ई-रिक्शा और ऑटो-रिक्शा के अनियोजित ठहराव को विनियमित करने के लिए जियोफेंसिंग, वर्चुअल स्टैंड और शेड्यूलिंग का भी प्रस्ताव है।
सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम और मेट्रो यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्था
प्रस्तावित उपायों में AI-आधारित दुर्घटना का पता लगाना, पास की एम्बुलेंस को अलर्ट भेजना और दुर्घटना पीड़ितों को 10 मिनट के भीतर अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बनाना शामिल है। विभाग ने अनधिकृत सड़क किनारे पार्किंग और अतिक्रमणों की पहचान करके प्रभावी सड़क चौड़ाई बढ़ाने पर भी चर्चा की। एक अन्य प्रस्ताव बारिश और जलभराव के दौरान यातायात के प्रबंधन पर केंद्रित है, जिसमें आपातकालीन सेवाओं को सुचारु रखते हुए वाहनों को वैकल्पिक मार्गों पर मोड़ने के लिए अग्रिम अलर्ट का उपयोग किया जाएगा।
इस योजना में पटना मेट्रो स्टेशनों के आसपास भीड़ और यात्री ड्रॉप-ऑफ गतिविधि के प्रबंधन के उपाय भी शामिल हैं। ट्रैफिक नियंत्रण के लिए तैनात कर्मियों की उपस्थिति निगरानी प्रणाली भी चर्चा किए गए अन्य प्रस्तावों में से थी। बैठक में पटना और बिहार के अन्य प्रमुख शहरी क्षेत्रों में भीड़ को कम करने के लिए एक ठोस और कार्रवाई योग्य योजना बनाने का आह्वान किया गया।
बैठक में बी०एस०आर०डी०सी०एल० के प्रबंध निदेशक, पटना नगर आयुक्त, ट्रैफिक एसपी, बी०आर०पी०एन०एन०एल० के प्रबंध निदेशक और जिला प्रशासन व ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के बाद, पी.के. सिकदर और अन्य अधिकारियों ने पथ निर्माण विभाग में एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र (ICCC) का निरीक्षण किया। उन्होंने केंद्र के मौजूदा संचालन और प्रक्रियाओं के बारे में अधिकारियों और इंजीनियरों से जानकारी प्राप्त की। उम्मीद है कि इन उपायों से पटना ट्रैफिक प्रबंधन में एक नया अध्याय जुड़ेगा और आम लोगों को जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी।








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