Bihar School Construction: बिहार में सरकारी योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जाले के एक स्कूल में लाखों रुपये की लागत से बन रहा तीन मंजिला भवन पिछले दो महीने से अधूरा पड़ा है। चौंकाने वाली बात यह है कि स्कूल के प्रभारी हेडमास्टर और ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर (BEO) दोनों को ही इस महत्वपूर्ण निर्माण कार्य की कोई जानकारी नहीं है।


मामला राढ़ी पश्चिमी पंचायत स्थित उत्क्रमित प्लस टू सह मध्य विद्यालय राढ़ी कन्या का है। यहां एमएस कृष्णा कंस्ट्रक्शन द्वारा मध्य विद्यालय के लिए एक तीन मंजिला भवन का निर्माण कराया जा रहा था। जनवरी में शुरू हुए इस निर्माण कार्य के तहत दो मंजिल तक छत की ढलाई हो चुकी है, लेकिन उसके बाद से ही काम ठप पड़ा है। भवन में हर मंजिल पर तीन-तीन कमरे बनाए जाने का प्रावधान है, पर काम अचानक रुक जाने से पूरा प्रोजेक्ट अधर में है।
निर्माण शुरू हुआ, फिर अचानक रुका
विद्यालय प्रबंधन के पास निर्माण कार्य के रुकने की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। काम क्यों बंद हुआ, कब दोबारा शुरू होगा और वर्तमान स्थिति क्या है, इस पर कोई भी कुछ बताने को तैयार नहीं है। विद्यालय के प्रभारी एचएम विक्रमादित्य झा ने बताया कि उन्हें भवन निर्माण को लेकर न तो कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही इस संबंध में कोई पत्र विद्यालय को प्राप्त हुआ है। ऐसे में उन्हें काम रुकने के कारणों की कोई जानकारी नहीं है।
‘भवन निर्माण को लेकर मुझे किसी प्रकार की पूर्व सूचना नहीं दी गयी है। इस संबंध में कोई पत्र भी विद्यालय को प्राप्त नहीं हुआ है।’- विक्रमादित्य झा, प्रभारी एचएम
अधिकारी बोले- हमें सूचना नहीं
विभागीय स्तर पर भी स्थिति कमोबेश यही है। जाले के बीईओ प्रमोद कुमार ठाकुर ने भी इस निर्माण कार्य से अनभिज्ञता जताई है। उन्होंने कहा कि यह संभव है कि भवन का निर्माण राज्य सरकार की आधारभूत संरचना योजना के तहत कराया जा रहा हो, लेकिन उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है। बीईओ ने यह भी बताया कि राज्य सरकार की ओर से निर्धारित मॉडल नक्शे के आधार पर ही भवन का निर्माण किया जाना है।
‘संभव है कि भवन का निर्माण राज्य सरकार की आधारभूत संरचना योजना के तहत कराया जा रहा हो, लेकिन मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है।’- प्रमोद कुमार ठाकुर, बीईओ
लाखों की योजना पर सवाल
यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस विद्यालय में सरकारी योजना के तहत लाखों रुपये की लागत से भवन निर्माण कराया जा रहा है, उसकी जानकारी संबंधित विद्यालय प्रबंधन और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को क्यों नहीं है? दो मंजिल तक निर्माण के बाद काम रोक दिए जाने के बावजूद विभागीय स्तर पर इसकी निगरानी क्यों नहीं हुई, यह भी जांच का विषय है। निर्माण कार्य की प्रगति, योजना की स्वीकृति, लागत और कार्य बंद होने के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट न होना सरकारी तंत्र की लापरवाही उजागर करता है। अब देखना होगा कि इस मामले में कब तक कोई कार्रवाई होती है और यह अधूरा भवन कब पूरा हो पाता है।








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