PM मोदी ने क्यों बदला एंट्री का तरीका? रैंप, वर्टिकल वीडियो… क्या GenZ की नाराजगी बनेगी BJP की टेंशन?
PM Modi Strategy: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन और राहुल गांधी की बढ़ती सक्रियता के बाद बीजेपी ने युवाओं से जुड़ने का नया तरीका अपनाया है। पीएम मोदी ने खुद को GenZ के अनुकूल ढालना शुरू कर दिया है, जिसका असर आगामी चुनावों में दिख सकता है।
PM Modi Strategy: गुजरात के वडोदरा में मंगलवार को ‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंच पर पहुंचने का अंदाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। आमतौर पर पीएम मोदी स्टेज पर बगल से एंट्री लेते हैं, लेकिन इस बार उनके लिए मंच के सामने एक रैंप बनाया गया था। वह युवाओं के बीच से होते हुए और उनका अभिवादन स्वीकार करते हुए मंच तक पहुंचे।
PM Modi | नन्हे देशभक्तों संग PM मोदी का प्यारा अंदाज, वीडियो ने जीता दिल | Deshaj Times
खबर से पहले यह जानिए -नवसारी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बच्चों के साथ प्यारा अंदाज देखने को मिला। नन्हे देशभक्तों के साथ PM मोदी की मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों का ध्यान खींच रहा है।
इस दौरान युवाओं को पसंद आने वाला हाई एनर्जी म्यूजिक भी बजता रहा। इसे GenZ से जुड़ने की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की नई रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जोरदार प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री ने खुद भी वर्टिकल वीडियो बनाना शुरू कर दिया है और अब यह नया तरीका अपनाया गया है।
इस नई रणनीति की चर्चा इसलिए भी हो रही है, क्योंकि तमिलनाडु में चमत्कारिक तरीके से सत्ता तक पहुंचे जोसेफ विजय यानी थलपति विजय, राहुल गांधी, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी और अभिषेक बनर्जी जैसे नेता भी जनता से जुड़ने के लिए ऐसे ही तरीकों का इस्तेमाल कर चुके हैं। इसमें मंच पर दर्जनों नेताओं को बिठाने के बजाय एक मुख्य नेता बीच में होता है और चारों तरफ बैठे समर्थकों के बीच अपनी बात रखता है। पारंपरिक तौर पर स्टेज और जनता के बीच कुछ दूरी रखी जाती है, जिसे भरने के लिए बड़ी रैलियों में स्क्रीन का इस्तेमाल होता है।
‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम में नया अंदाज
पारंपरिक मंचों के विपरीत, रैंप वाले स्टेज में नेता या स्पीकर सीधे जनता के बीच खड़े होते हैं। इससे ज्यादा से ज्यादा लोग उन्हें अपने करीब महसूस कर पाते हैं। कई बार ये नेता वहीं से जनता से सीधे बातचीत करते हैं, हाथ मिलाते हैं या सवाल-जवाब भी कर लेते हैं। बड़े और दूर के मंचों पर यह संभव नहीं हो पाता। शायद यही वजह है कि युवाओं से बढ़ती दूरी की समस्या से जूझ रही बीजेपी और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संवाद के इस नए तरीके को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में संवाद का बदला हुआ तरीका काफी चर्चा में है, जहां वह पहले युवाओं की बात सुनते हैं और फिर अपनी बात रखते हैं। इसे गैर-राजनीतिक बताकर अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
राहुल गांधी और CJP ने बढ़ाई BJP की चिंता
हाल ही में यह देखने को मिला है कि CJP के प्रदर्शन के कारण युवाओं के बढ़ते गुस्से का सामना कर पाना बीजेपी के लिए काफी मुश्किल रहा। इसी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रियों को इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं से जुड़ने के निर्देश दिए थे। इसकी शुरुआत उन्होंने खुद की और अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे नेता भी वर्टिकल वीडियो बनाने लगे हैं। बीजेपी में अभी भी लगातार प्रयास जारी हैं कि युवाओं के साथ और बेहतर संवाद कैसे स्थापित किया जाए। कहा जा रहा है कि संभावित कैबिनेट फेरबदल में इसका असर दिख सकता है, जहां कम उम्र के अधिक नेताओं को मंत्री बनाया जा सकता है।
दूसरी तरफ, राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता और सक्रियता ने भी बीजेपी की चिंताओं को बढ़ा दिया है। राहुल गांधी लगातार सक्रिय हैं और अलग-अलग शहरों में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए युवाओं से संवाद कर रहे हैं। इन कार्यक्रमों में संवाद के तरीके को बदला गया है। वह युवाओं को बुलाते हैं, पहले उनकी बात सुनते हैं और बाद में अपनी बात रखते हैं। CJP की लगातार सक्रियता और विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिशों ने भी बीजेपी पर दबाव बढ़ा दिया है। इसी का नतीजा है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन तौर-तरीकों को अपना रहे हैं, जिनसे बीजेपी शायद अब तक दूरी बना रही थी। इसी क्रम में वह सेल्फी वीडियो बना रहे हैं, ‘मित्रो’ की जगह ‘हाय फ्रेंड्स’ बोल रहे हैं और GenZ के बीच इस्तेमाल होने वाले कई शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं।
आने वाले कुछ ही समय में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गुजरात, मणिपुर और गोवा जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें से पांच राज्यों में बीजेपी की सरकारें हैं, और चार राज्यों में तो पिछले दो या तीन बार से बीजेपी की ही सरकार है। ऐसे में बढ़ती एंटी-इंकंबेंसी के साथ बीजेपी युवाओं की नाराजगी को जोड़ना नहीं चाहती है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 के लोकसभा चुनाव में कुल मतदाताओं में से 22.78 प्रतिशत मतदाता 18 से 29 साल की उम्र के थे। यानी, लगभग 20 प्रतिशत मतदाता युवा वर्ग से आते हैं। इसी वर्ग ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करके धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया था। इस आयु वर्ग के 21 प्रतिशत वोटर यूपी में, 23 प्रतिशत गुजरात में, 21 प्रतिशत पंजाब में, 22 प्रतिशत उत्तराखंड में, 20 प्रतिशत गोवा में और 24 प्रतिशत मणिपुर में हैं। ऐसे में कोई भी राजनीतिक दल इन युवाओं को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाना चाहता है।
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