Bihar JDU: 1998 की ये तस्वीर… और आज 2026। तब नीतीश कुमार के ऑफिस की ये तस्वीर कैमरे में कैद हुई थी। आज करीब 28 साल बाद भी बिहार की राजनीति के सबसे चर्चित चेहरों में उनका नाबना हुआ है। राजनीति में बहुत चेहरे आते हैं, बहुत चले जाते हैं—लेकिन कुछ चेहरे समय की तस्वीर का हिस्सा बन जाते हैं।
एक तस्वीर, करीब तीन दशक का राजनीतिक सफर। वक़्त बदलता है, किरदार बदलते हैं… लेकिन कुछ कहानियां चलती रहती हैं।
जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने अपनी ही पार्टी के नेताओं से एक बेहद चौंकाने वाली अपील की है। उन्होंने बिहार में JDU का नाम बदलकर ‘जनता दल नीतीश’ करने का प्रस्ताव रखा है। खगड़िया में ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम के दौरान अपने भाषण में संजय झा ने यह बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार के विकास और पार्टी के उत्थान के लिए पूरी ताकत और मनोयोग से काम किया है, इसलिए उनके योगदान को सम्मान देने के लिए पार्टी का नाम उनके नाम पर होना चाहिए।
संजय झा ने खगड़िया में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा से सीधे मुखातिब होकर कहा कि JDU को अब ‘जनता दल नीतीश’ के नाम से जाना जाए। यह अपील ऐसे समय में आई है जब नीतीश कुमार की जन्मस्थली बख्तियारपुर का नाम ‘नीतीशपुरम’ रखने की मांग भी जोर पकड़ रही है। बुधवार को हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने भी बख्तियारपुर का नाम ‘नीतीशपुरम’ करने का प्रस्ताव दिया था, जिससे बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
फरक्का संधि पर भी मुखर हुए संजय झा, बिहार के हितों की अनदेखी का आरोप
संजय झा इन दिनों बांग्लादेश के साथ फरक्का जल संधि को लेकर बिहार के विभिन्न जिलों का दौरा कर ‘नीतीश संवाद’ का आयोजन कर रहे हैं। गंगा नदी के तटवर्ती 12 जिलों का उनका दौरा बक्सर से शुरू हुआ था और कटिहार में समाप्त होगा। उन्होंने फरक्का जल संधि को बिहार के साथ नाइंसाफी बताया है, क्योंकि इस संधि के कारण बिहार को अपने हिस्से का पानी बांग्लादेश को देना पड़ता है। संजय झा फरक्का जल संधि के नवीनीकरण के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं।
संजय झा ने कहा, “जब भी बिहार के विकास की चर्चा होती है तो नीतीश कुमार का नाम आता है। फरक्का जल संधि को आगे नहीं बढ़ाने की आवाज भी नीतीश कुमार ने ही उठाई थी।”
गुरुवार को जदयू प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के साथ जल संधि में बिहार के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। झा ने स्पष्ट किया कि फरक्का बराज के कारण बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है, क्योंकि गंगा में गाद भरने से जल ग्रहण क्षमता लगातार कम हो रही है, जिससे पानी का फैलाव बढ़ रहा है।
30 साल से हो रहा अन्याय, अब नहीं सहेगा बिहार
संजय झा ने मांग की है कि बांग्लादेश के साथ गंगाजल बंटवारे का समझौता तभी किया जाए जब बिहार की हिस्सेदारी तय हो। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2050 तक बिहार की जल जरूरतों का आकलन कर उसकी हिस्सेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
संजय झा ने चेतावनी देते हुए कहा, “बीते 30 वर्षों से बिहार के साथ अन्याय हो रहा है। बिहार पिछले 30 सालों से हो रहे अन्याय को अब आगे नहीं सहने वाला। इस अन्याय के लिए उनकी पार्टी भी तैयार नहीं है।”
उन्होंने इस महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने का भी ऐलान किया है, जिससे फरक्का जल संधि और बिहार के जल संसाधनों पर नई सिरे से बहस छिड़ सकती है। संजय झा की ये मुखर मांगें Bihar JDU और राज्य की राजनीति में आने वाले समय में बड़े बदलाव ला सकती हैं।







