Bihar Politics: बिहार में कैबिनेट बैठक समाप्त होने के तत्काल बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने आवास पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) कोटे के मंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। लगभग दो घंटे तक चली इस बैठक में मंत्रियों के विभागों के कामकाज की समीक्षा की गई और उन्हें आगे के कार्यों के लिए कुछ नई जिम्मेदारियां व लक्ष्य दिए गए। इस पूरी कवायद में सबसे खास बात यह रही कि जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के किसी भी मंत्री को इसमें शामिल नहीं किया गया।
विभागों के कामकाज की समीक्षा और आगामी कार्ययोजना
बीजेपी मंत्री केदार गुप्ता ने बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में बताया कि यह केवल बीजेपी कोटे के मंत्रियों की बैठक थी और भविष्य में अन्य सहयोगी दलों के मंत्रियों के साथ भी ऐसी चर्चाएं होंगी। हालांकि, मुख्यमंत्री आवास पर कैबिनेट बैठक के तुरंत बाद हुई इस विशिष्ट बैठक ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में अटकलों को तेज कर दिया है। बताया जा रहा है कि बैठक का मुख्य एजेंडा मंत्रियों के विभागों की वर्तमान स्थिति और उनके प्रदर्शन की जानकारी लेना था। सम्राट चौधरी ने प्रत्येक विभाग के कामकाज से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की और आगामी प्राथमिकताओं पर भी चर्चा की गई।
बीजेपी मंत्री केदार गुप्ता ने कहा, “फिलहाल बीजेपी कोटे के मंत्रियों के साथ बैठक हुई है। आने वाले समय में दूसरे मंत्रियों के साथ भी बैठक की जाएगी।”
JDU मंत्रियों की अनुपस्थिति ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
बैठक के बाद मीडियाकर्मी मंत्रियों की प्रतिक्रिया जानने को उत्सुक थे। पत्रकारों द्वारा सवाल पूछे जाने पर अधिकांश मंत्री विस्तार से जानकारी देने से बचते नजर आए। मंत्री नीतीश मिश्रा ने इसे एक सामान्य बैठक बताया और फिर अपनी गाड़ी में बैठकर वहां से निकल गए। आमतौर पर मीडिया से मुखातिब होने वाले शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी भी इस बार सवालों के जवाब दिए बिना ही रवाना हो गए। दो घंटे तक चली इस बैठक को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, खासकर इसलिए कि एनडीए गठबंधन में बीजेपी और जेडीयू सहित कई दल शामिल हैं, लेकिन इस बैठक में केवल बीजेपी के मंत्रियों को बुलाया गया। इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नए समीकरणों और आंतरिक गतिशीलता पर बहस छेड़ दी है।
फिलहाल, बैठक में किन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक इस बैठक की टाइमिंग और इसके स्वरूप को गठबंधन की आंतरिक समीकरणों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मान रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस घटनाक्रम का बिहार की सियासी तस्वीर पर क्या प्रभाव पड़ता है।






