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विक्रमशिला सेतु पर 1 सितंबर से वाहनों के आवागमन पर रोक! बंद से पहले बड़ी राहत की उम्मीद! मिलेगा ‘तैरता पुल’, जानें क्या है यह

Bhagalpur News: गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु की मरम्मत के कारण 1 सितंबर से 30 नवंबर तक आवाजाही पूरी तरह बंद रहेगी। लाखों यात्रियों और व्यावसायिक वाहनों की परेशानी कम करने के लिए बिहार के पथ निर्माण मंत्री ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से समानांतर पॉन्टून ब्रिज बनाने की मांग की है।

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Bhagalpur News: भागलपुर और नवगछिया के बीच गंगा नदी पर स्थित विक्रमशिला सेतु पर 1 सितंबर से वाहनों का आवागमन पूरी तरह रोक दिया जाएगा। सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से के पुनर्निर्माण के लिए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है, जिसकी घोषणा प्रशासन और शासन द्वारा की गई है। पुनर्निर्माण कार्य को 30 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस अवधि में लोगों को होने वाली असुविधा को कम करने के उद्देश्य से सेतु के समानांतर एक पॉन्टून ब्रिज बनाने की मांग उठाई गई है।

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बिहार के पथ निर्माण मंत्री और बिहपुर विधायक इंजीनियर शैलेंद्र ने दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर यह मांग रखी है। मंत्री शैलेंद्र ने गडकरी को पॉन्टून ब्रिज के साथ ही बिहार की कई अन्य सड़क और पुल परियोजनाओं से संबंधित एक ज्ञापन भी सौंपा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्रीय मंत्री गडकरी ने इस मांग पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया है। उन्होंने बिहार आकर इन प्रस्तावों की जानकारी लेने और संबंधित अधिकारियों को परियोजनाओं की स्थिति समझने तथा आगे की कार्रवाई करने का निर्देश देने की बात कही है।

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क्यों बंद हो रहा है विक्रमशिला सेतु?

भागलपुर को नवगछिया के रास्ते कोसी और सीमांचल के एक बड़े हिस्से से जोड़ने वाला विक्रमशिला सेतु इस क्षेत्र की जीवनरेखा है। पूर्व में इस सेतु का एक हिस्सा गंगा में क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद इस मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ था। बाद में बेली ब्रिज के माध्यम से हल्के वाहनों की आवाजाही शुरू की गई थी। अब क्षतिग्रस्त हिस्से के पूर्ण पुनर्निर्माण के लिए इसे बंद करना अनिवार्य हो गया है। इस मार्ग पर यातायात रुकने से सिर्फ भागलपुर और नवगछिया ही नहीं, बल्कि कोसी और सीमांचल के बड़े क्षेत्र प्रभावित होंगे। रोजमर्रा के यात्रियों के अलावा बस, ट्रक और अन्य व्यावसायिक वाहनों के आवागमन पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। सेतु बंद रहने की अवधि में वैकल्पिक मार्गों पर दबाव काफी बढ़ जाएगा, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से पॉन्टून ब्रिज की मांग को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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पॉन्टून ब्रिज से मिलेगी राहत?

यदि एक अस्थायी पॉन्टून ब्रिज का निर्माण होता है, तो सेतु के पुनर्निर्माण के दौरान नदी पार करने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो सकता है। यह लाखों लोगों और हजारों व्यावसायिक वाहनों के लिए बड़ी राहत साबित होगा। हालांकि, इस तरह के पुल का निर्माण तकनीकी जांच, नदी की स्थिति, जलस्तर, सुरक्षा मानकों और वाहनों के भार वहन क्षमता जैसे कई जटिल पहलुओं पर निर्भर करेगा। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों और मालवाहक वाहनों के लिए सुचारु वैकल्पिक व्यवस्था बनाए रखना होगी। ऐसे में अस्थायी पुल की संभावना पर केंद्र और राज्य स्तर पर गहन तकनीकी आकलन आवश्यक है।

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क्या होता है पॉन्टून ब्रिज और कैसे बनता है?

पॉन्टून ब्रिज सामान्य स्थायी पुलों से भिन्न होता है। यह एक अस्थायी, तैरता हुआ पुल है, जिसे नदी के ऊपर बड़े फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म (पॉन्टून) की सहायता से बनाया जाता है। इन प्लेटफॉर्म्स को आपस में जोड़कर पुल का ढांचा तैयार किया जाता है, जिसके ऊपर स्टील गर्डर और सड़क की सतह बनाई जाती है। इस प्रकार, वाहनों के गुजरने योग्य रास्ता तैयार किया जाता है। पॉन्टून ब्रिज का आधार उत्प्लावन (buoyancy) के सिद्धांत पर कार्य करता है, जिसमें पानी पर तैरने वाले पॉन्टून वजन को संभालते हैं। इन्हें एंकर और केबल की मदद से अपनी जगह पर स्थिर रखा जाता है। नदी की धारा और जलस्तर को ध्यान में रखते हुए इसकी संरचना को सुरक्षित तरीके से स्थापित करना महत्वपूर्ण होता है। इस पुल की सबसे बड़ी खासियत इसका अस्थायी होना है; इसे कम समय में तैयार किया जा सकता है और काम पूरा होने के बाद हटाया भी जा सकता है। आपदा, बाढ़ या उन स्थानों पर भी इसका उपयोग होता है जहां स्थायी पुल बनाने में अत्यधिक समय लग सकता है।

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विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से के पुनर्निर्माण की समयसीमा 30 नवंबर तय की गई है, जिसका अर्थ है कि सितंबर से नवंबर के बीच काम को तेजी से पूरा करना होगा। इस दौरान नदी में काम करने की परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होंगी। किसी भी वैकल्पिक व्यवस्था को अंतिम रूप देने से पहले तकनीकी और सुरक्षा मानकों की कठोर जांच आवश्यक है ताकि सभी के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जा सके।

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