
Aviation Turbine Fuel: 1 अप्रैल से हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ा झटका लगने वाला है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ के दामों में भारी बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं, जिसका सीधा असर आपके हवाई टिकटों पर पड़ेगा। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतें भारतीय विमानन उद्योग के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। हर महीने की पहली तारीख को एटीएफ के दाम अपडेट किए जाते हैं, और इस बार स्थिति पिछले महीने से काफी अलग नजर आ रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और भारतीय रुपये के मुकाबले डॉलर की मजबूती, दोनों ही एटीएफ को महंगा बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यदि एटीएफ की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर एयरलाइंस के परिचालन लागत पर पड़ेगा और इस अतिरिक्त भार को अंततः आम यात्रियों को ही उठाना होगा। चाहे छुट्टियों का प्लान हो, किसी आपात स्थिति में उड़ान भरनी हो, या अचानक यात्रा करनी पड़े, हवाई यात्रा का बजट निश्चित रूप से बिगड़ने वाला है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Aviation Turbine Fuel की बढ़ती कीमत और आपके बजट पर प्रभाव
एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें कैसे तय होती हैं, यह समझना जरूरी है। हर महीने की पहली तारीख को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) मिलकर एटीएफ के नए दाम निर्धारित करते हैं। इसमें बेस प्राइस, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, राज्य वैट और डीलर कमीशन जैसे घटक शामिल होते हैं। किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का लगभग 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा केवल एटीएफ पर ही खर्च होता है। इसका मतलब है कि एटीएफ की कीमत में थोड़ी सी भी वृद्धि एयरलाइन की लागत को सीधे बढ़ा देती है, और यह बोझ आखिरकार हवाई टिकटों के माध्यम से यात्रियों पर आता है।
राज्यों का वैट: कीमतों का सबसे बड़ा पेच
एटीएफ की कीमत निर्धारण में सबसे बड़ा पेंच राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला मूल्य वर्धित कर (VAT) है। विभिन्न राज्यों में वैट की दरें अलग-अलग होने के कारण एटीएफ की कीमतों में भारी अंतर देखने को मिलता है। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में एटीएफ पर लगभग 25 प्रतिशत वैट लगता है, जबकि दिल्ली में यह 20 प्रतिशत से अधिक है। वहीं, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों ने वैट को घटाकर मात्र 1 प्रतिशत तक कर दिया है। इसका सीधा नतीजा यह हुआ कि इन राज्यों में विमानन उद्योग ने तेजी से विकास किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। एक ही एटीएफ मुंबई में महंगा और हैदराबाद में सस्ता होने का एकमात्र कारण राज्य के कर हैं, जिस पर केंद्र सरकार सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।
एटीएफ अभी तक वस्तु एवं सेवा कर (GST) के दायरे में नहीं आया है। पेट्रोल और डीजल की तरह, यह भी राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है। यही कारण है कि केंद्र सरकार सीधे वैट दरों को निर्धारित नहीं कर सकती, बल्कि केवल राज्यों से इसमें कटौती की अपील कर सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए, विमानन मंत्रालय राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एटीएफ पर वैट घटाने के लिए पत्र लिखने की तैयारी कर रहा है। राज्यों के वित्त विभागों को भी इस संबंध में अलग से पत्र भेजा जाएगा।
अन्य शुल्कों की भी होगी समीक्षा
विमानन मंत्रालय इस मुद्दे पर एयरलाइंस, यात्रियों और एयरपोर्ट तीनों के हितों को ध्यान में रखते हुए समाधान तलाश रहा है। इसी कड़ी में, एयरपोर्ट ऑपरेटर्स के साथ भी एक बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें यात्रियों से वसूले जाने वाले विभिन्न शुल्कों की समीक्षा की जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि यदि एक तरफ ईंधन महंगा हो, तो दूसरी तरफ से यात्रियों को कुछ राहत प्रदान की जा सके। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि हवाई यात्रा सभी के लिए सुलभ और किफायती बनी रहे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/business/







