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सरकार का नया दांव: अब सैटेलाइट से होगी फोन की लोकेशन ट्रैकिंग, प्राइवेसी पर उठे सवाल

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नई दिल्ली: एक तरफ जहां सरकार ‘संचार साथी’ ऐप से पीछे हटी है, वहीं दूसरी तरफ अब सैटेलाइट के ज़रिए फोन की लोकेशन ट्रैक करने की तैयारी में है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, सरकार टेलीकॉम इंडस्ट्री के एक प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस प्रस्ताव के तहत, स्मार्टफोन कंपनियों को अपने डिवाइस में सैटेलाइट लोकेशन ट्रैकिंग फीचर को इनेबल करना होगा। हालांकि, इस कदम से Apple, Google और Samsung जैसी दिग्गज कंपनियों ने प्राइवेसी संबंधी चिंताओं को उठाते हुए विरोध जताया है।

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टेलीकॉम उद्योग का प्रस्ताव और A-GPS टेक्नोलॉजी

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सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने सरकार को सुझाव दिया है कि अगर A-GPS (Assisted GPS) टेक्नोलॉजी को इनेबल करने के लिए स्मार्टफोन कंपनियों को आदेश दिया जाए, तो यूज़र की लोकेशन सटीक रूप से ट्रैक की जा सकती है। इस टेक्नोलॉजी में सैटेलाइट सिग्नल के साथ-साथ सेलुलर डेटा का भी इस्तेमाल होता है। COAI के अनुसार, इस प्रस्ताव के लागू होने पर यूज़र की लोकेशन सर्विस ‘ऑलवेज ऑन’ रहेगी और उसे डिसेबल करने का कोई विकल्प यूज़र के पास नहीं होगा। वर्तमान में, लोकेशन का पता लगाने के लिए सेलुलर टावर डेटा का उपयोग किया जाता है, जो उतनी सटीक जानकारी नहीं दे पाता।

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सरकारी बैठक और इंडस्ट्री का विरोध

बताया जा रहा है कि इस महत्वपूर्ण मसले पर विचार-विमर्श के लिए गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को स्मार्टफोन इंडस्ट्री के अधिकारियों के साथ एक बैठक बुलाई थी, लेकिन फिलहाल यह बैठक स्थगित कर दी गई है।

स्मार्टफोन कंपनियों की दलीलें और प्राइवेसी की चिंताएं

Apple, Google और अन्य प्रमुख स्मार्टफोन निर्माताओं ने इस प्रस्ताव को लागू न करने की अपील की है। इन कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले लॉबिंग ग्रुप, सेल्यूलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) का कहना है कि दुनिया भर में कहीं भी डिवाइस लेवल पर इस तरह की लोकेशन ट्रैकिंग नहीं की जाती है। ICEA के अनुसार, A-GPS टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल लोकेशन सर्विलांस के लिए नहीं होता है। इस प्रस्ताव से कई गंभीर लीगल, प्राइवेसी और नेशनल सिक्योरिटी से जुड़े सवाल खड़े होते हैं।

ICEA ने आगे कहा कि यूजर बेस में सैन्य अधिकारी, जज और पत्रकार जैसे संवेदनशील पदों पर बैठे लोग भी शामिल होते हैं। उनकी लोकेशन को लगातार ट्रैक किए जाने से उनकी सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।

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