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मार्च, 16, 2026
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भारत की ऊर्जा सुरक्षा: कच्चे तेल का आयात और पश्चिम एशियाई संकट

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Crude Oil Imports: अमेरिका के उच्च टैरिफ और डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद रूस से कच्चे तेल के आयात में कमी के बावजूद, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने भारत को अपनी तेल आयात रणनीति पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के इस दौर में, देश ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नए विकल्पों की तलाश में है।

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# भारत की ऊर्जा सुरक्षा: कच्चे तेल का आयात और पश्चिम एशियाई संकट

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## भारत की कच्चे तेल का आयात रणनीति में बदलाव

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फरवरी 2024 में, रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा, जबकि सऊदी अरब दूसरे स्थान पर रहा। हालांकि, पश्चिम एशियाई देशों से भारत का आयात जनवरी में लगभग 7.7 लाख बैरल प्रतिदिन से बढ़कर फरवरी में लगभग 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुँच गया है, जो इस क्षेत्र पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तेल बाजार में लगातार उठा-पटक जारी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

ग्लोबल डेटा और एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में भारत ने रूस से लगभग 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया, जो जनवरी के 1.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन और दिसंबर के 1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन के मुकाबले मामूली कमी है। बावजूद इसके, रूस भारत के लिए एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। वहीं, केप्लर का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में सऊदी अरब से 6 से 7 लाख बैरल प्रतिदिन का आयात स्तर जारी रह सकता है, जो पिछले छह वर्षों में किसी एक देश से होने वाले सबसे स्थिर और बड़े आयात में से एक होगा।

हालिया आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो-तीन महीनों में भारत की पश्चिम एशिया पर तेल निर्भरता बढ़ी है। केप्लर के रिफाइनिंग और मॉडलिंग के रिसर्च एनालिस्ट सुमित रितोलिया बताते हैं कि रूस से आयात में कमी के बाद खाड़ी देशों से सप्लाई बढ़ाई गई है। वर्तमान में इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से प्रतिदिन 2.5 से 2.7 मिलियन बैरल तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए भारत पहुँच रहा है। हालांकि, यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है, तो इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से कार्गो मूवमेंट बुरी तरह प्रभावित हो सकता है, जिससे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

## भू-राजनीतिक चुनौतियाँ और वैकल्पिक स्रोत

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ईरान से जुड़े तनाव के कारण पश्चिम एशिया में शिपमेंट अनिश्चितता बढ़ी है। ऐसी स्थिति में, भारतीय रिफाइनर अब सप्लाई चेन के जोखिम को कम करने के लिए अफ्रीका, अमेरिका या लैटिन अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों की ओर भी देख सकते हैं। भारत की वर्तमान रणनीति संतुलित दृष्टिकोण पर आधारित है: रूस से प्रतिस्पर्धी कीमतों पर खरीद, खाड़ी देशों से स्थिर आपूर्ति और भविष्य के लिए संभावित वैकल्पिक स्रोतों की तलाश। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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आने वाले महीनों में तेल बाजार की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति और वैश्विक तेल की कीमतें पर निर्भर करेगी। भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नज़र रखनी होगी। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/business/। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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